Husn (हुस्न)
हुस्न (Husn) पर शायरी तुम्हारे हुस्न की तारीफ में क्या लिखूँ, कलम भी रुक गई, अलफ़ाज़ कम पड़ गए। नज़रों ने जब देखा तुम्हारा हुस्न , चाँद भी शर्मा के बादलों में छुप गया। तेरा हुस्न वो जादू है जो सर चढ़ के बोलता है, जो भी देखे बस तेरा ही हो लेता है। हर अदा में है तेरी हुस्न की झलक, हर निगाह में है तेरी चाहत की चमक। खुदा ने बख्शा है तुम्हें कमाल का हुस्न , जो देख ले एक बार, वो फिर कहीं और ना देखे। तेरे हुस्न का चर्चा हर ज़ुबाँ पर है, तेरी सादगी भी एक कयामत है। ये कौन आया कि निखर गया है हुस्न -ए-जहाँ, हर शै में अब तो है रंगीनियाँ हज़ार। हुस्न को बेपर्दा न कर, कहीं आँखे जल न जाएँ, ...