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Showing posts from May, 2026

Husn (हुस्न)

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हुस्न (Husn) पर शायरी तुम्हारे हुस्न की तारीफ में क्या लिखूँ, कलम भी रुक गई, अलफ़ाज़ कम पड़ गए। नज़रों ने जब देखा तुम्हारा हुस्न , चाँद भी शर्मा के बादलों में छुप गया। तेरा हुस्न वो जादू है जो सर चढ़ के बोलता है, जो भी देखे बस तेरा ही हो लेता है। हर अदा में है तेरी हुस्न की झलक, हर निगाह में है तेरी चाहत की चमक। खुदा ने बख्शा है तुम्हें कमाल का हुस्न , जो देख ले एक बार, वो फिर कहीं और ना देखे। तेरे हुस्न का चर्चा हर ज़ुबाँ पर है, तेरी सादगी भी एक कयामत है। ये कौन आया कि निखर गया है हुस्न -ए-जहाँ, हर शै में अब तो है रंगीनियाँ हज़ार। हुस्न को बेपर्दा न कर, कहीं आँखे जल न जाएँ, ...

Chahat (चाहत)

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💖 चाहत (Chahat) - दिल की गहराइयों से 💖 तुम्हें पा लेने के सिवा एक और चाहत (चाहत) है मेरी, मैं जब भी जन्म लूँ बस तुमसे ही प्यार करूँ। हमारी चाहत (चाहत) और आपकी मोहब्बत में सिर्फ इतना ही अंतर है, आपके कुछ हिस्से में हम हैं और हमारी रूह रूह में सिर्फ आप। ना तोल मेरी मोहब्बत अपनी दिल्लगी से, देखकर मेरी चाहत (चाहत) को अक्सर तराजू टूट जाते है। हमने तो एक ही शख्स पर चाहत (चाहत) ख़त्म कर दी, अब मोहब्बत किसे कहते है मालूम नहीं। मेरी चाहत (चाहत) का ये अंजाम हुआ, दिल मेरा फिर से नाकाम हुआ। तेरी चाहत (चाहत) ने मुझे बदल दिया, हर सोच को तेरे रंग में रंग दिया। दिल की धड़कन को तेरी चाहत (चाहत) समझा है, दर्द को आंखों से झलकता पानी समझा है। तेरी चाहत (चाहत) की है इतनी शिद्दत, पा लिया तुझ को तो मर जाऊँगा। ...

Ulfat (उल्फ़त)

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उल्फ़त के रंग यह सिलसिला उल्फ़त (उल्फ़त) का चलता ही रह गया, दिल की चाह में दिलबर मचलता ही रह गया। खुदा करे, मेरी उल्फ़त (उल्फ़त) में तुम कुछ यूँ उलझ जाओ, मैं तुमको दिल में भी सोचूँ तो तुम समझ जाओ। होंठों पे उल्फ़त (उल्फ़त) का नाम होता है, आँखों में छलकता जाम होता है। राज़-ए- उल्फ़त (उल्फ़त) , सीने में हम, लिए फिरते हैं, वो बयाँ अगर कर दें तो ज़िन्दगी ही संवर जाए। इश्क़ में हर कदम है इक मंज़िल, राह-ए- उल्फ़त (उल्फ़त) की मुश्किलात न पूछ। तुमसे उल्फ़त (उल्फ़त) के ये तकाज़े न निभाए जाते, वरना तमन्ना हमें भी खूब थी कि चाहे जाते। दिल में कुछ टूटने लगता है तिरे ज़िक्र के साथ, चंद आँसू तिरी उल्फ़त (उल्फ़त) के बहाने निकले। है ये उल्फ़त (उल्फ़त) भी क्या बला साहब, इस में झुकते नवाब देखे हैं। जगा दिया सुबह तेरी याद-ए- उल्फ़त (उल्फ़त) ने वरना, आज इतवार था बहुत देर तक सोते हम। कम निगाही की हमें खुद भी कहाँ थी तौफीक, कम निगाही के लिए उस ना उल्फ़त (उल्फ़त) चाहे जाते। ...

Pyaar (प्यार)

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प्यार के रंगीन एहसास तेरे बिना अधूरी है मेरी ज़िंदगी, जैसे बिना चाँद के रात अधूरी है। हर सांस में तेरा नाम है, तू ही मेरी सबसे खूबसूरत ख्वाब है। तुमसे मिलकर समझा हूँ, प्यार (प्यार) का असली मतलब क्या होता है। तुम्हारे बिना हर लम्हा, जैसे बिना रंग के सफर होता है। दिल की हसरत ज़ुबान पे आने लगी, तूने देखा और ज़िंदगी मुस्कुराने लगी। ये इश्क़ की इंतेहा थी या दीवानगी मेरी, हर सूरत में सूरत तेरी नज़र आने लगी। क्यूँ प्यार (प्यार) पे जान लुटाते हैं लोग, आज मालूम हुआ है आप को पाने के बाद। जहाँ Care मिलती है ना वहाँ Love हो ही जाता है। मोहब्बत में गुस्सा और शक़ वही करता है जिसमें मोहब्बत कूट-कूट के भरी होती है, यही तो है सच्चा प्यार (प्यार) मेरी जान। तुझसे ही शुरू और तुझ पर ही खत्म, मेरी हर कहानी का हर लफ्ज़ तू। तेरे प्या...

Mohabbat (मोहब्बत)

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मोहब्बत के खूबसूरत अल्फाज़ तेरी आँखों में देखी है मैंने एक ऐसी दुनिया, जहाँ मेरी हर साँस सिर्फ़ तेरी मोहब्बत में गुम है। हर लम्हा जो तेरे साथ गुज़रा, वही तो मेरी सच्ची मोहब्बत की कहानी बन गया। तू दूर सही, मगर दिल के करीब है, यही तो मेरी बेपनाह मोहब्बत का अजीब दस्तूर है। ज़िंदगी का हर रंग फीका है तेरे बिना, मेरी मोहब्बत ने ही मुझे जीने की वजह दी है। क्या बताऊँ कितनी है तुमसे मोहब्बत , बस इतना समझ लो कि अब तुम ही मेरी दुनिया हो। मेरी हर दुआ में शामिल है तेरा नाम, क्योंकि मेरी मोहब्बत तेरे ही नाम से मुकम्मल है। कभी ना खत्म होने वाली है ये चाहत, मेरी रूह में बसी है तेरी पाक मोहब्बत । जब से देखा है तुम्हें, तब से हर जगह तुम ही तुम हो, शायद यही मेरी स...

Ishq (इश्क़)

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इश्क़: दिल से निकली दस आवाज़ें इश्क़ वो नशा है, जो हर मर्ज़ की दवा है, बस एक नज़र तेरी, और दिल लापता है। तेरी चाहत में, हम खुद को भुला बैठे, इश्क़ की गलियों में, हर हद मिटा बैठे। इश्क़ की आग में जलकर, हम खाक हुए, फिर उसी राख से, नए ख्वाब हुए। वो कहते हैं, इश्क़ इबादत है, मैंने माना, तेरी सूरत में ही पाया, अपना खुदा माना। इश्क़ ने सिखाया हमें जीना और मरना, हर पल तेरे इंतज़ार में आहें भरना। मेरी रूह में बस गया है तेरा इश्क़, हर साँस लेती है, अब तेरा ही ज़िक्र। इश्क़ वो तूफ़ान है, जो दिल को हिला दे, कभी आसमाँ बना दे, कभी खाक मिला दे। कहाँ से लाऊँ वो लफ्ज़, जो तेरा इश्क़ बयां कर सकें, मेरी खामोशी में ही, सारे जज़्बात मचल सकें। इश्क़ की गलियों में भटकते रहे उमर भर, मिली जो मंज़िल, तो देखा, वो भी थी तेर...