जमाल (Jamal) पर शायरी
तेरे चेहरे का हर नक्श एक मुकम्मल ग़ज़ल, क्या खूब बनाया है खुदा ने तेरा जमाल।
चांद भी शर्मा जाए देखकर तेरा रूप, तूने बिखेरा है हर सू अपने जमाल का अनूप।
निगाहें ठहर जाती हैं जहां तेरा दीदार हो, ऐसा दिलकश है तेरा जमाल, हर कोई फ़िदा हो।
हर अदा में तेरी एक नई बात है, तेरा जमाल तो जैसे एक रोशन रात है।
ये जो हँसी है लबों पर, ये आंखों की चमक, यही तो है तेरे हुस्न का जमाल, जिसकी हमें है ललक।
फूलों में खुशबू, सितारों में चमक, सब फीके हैं तेरे जमाल की बनिस्बत।
जबसे देखा है तेरा जमाल, तबसे दिल बेकरार है, तेरी हर अदा पर मेरी जान निसार है।
दुनिया की हर चमक फीकी लगे मुझे, जबसे नज़र आया है तेरा जमाल।
हर लफ्ज़ में बस तेरी तारीफें हों, कोई क्या बयान करे तेरे जमाल की हदें।
तेरी सादगी में भी एक अजब जमाल है, जो हर नज़र को अपनी ओर खींचता है हर हाल है।