Simatna (सिमटना)

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सिमटना (Simatna): गहराई और एहसास

जीवन के हर मोड़ पर, कुछ यादें, कुछ पल, कुछ भावनाएँ... सभी **सिमटना** चाहते हैं, एक कोने में, दिल के करीब, अपनी पहचान बनाने।

यादों का सिमटना

वक्त की रेत पर बनते-बिगड़ते निशान,
बस तेरी यादों का दिल में सिमटना बाकी है।

बिखरे थे अरमान जैसे खुले आसमान में,
अब तेरी आहट से सब को सिमटना है।

पुराने खतों में अक्सर वो मिलती है,
मेरी खुशियों का तुझमें सिमटना अब भी तय है।

हर एक पल को मैं बस जीना चाहता हूँ,
ताकि तेरे एहसासों में ही सिमटना सीखूँ।

अधूरी कहानियों का क्या होता है आखिर,
क्या उन्हें भी किसी मोड़ पर सिमटना होता है?

एहसासों का सिमटना

दिल में हजार ख्वाहिशें लिए फिरता हूँ,
पर तेरी बाहों में ही इन्हें सिमटना है।

अल्फाज कम पड़ जाते हैं जब तू पास हो,
मेरी सारी बातें तुझमें ही सिमटना चाहती हैं।

समंदर की लहरों सा है मेरा प्यार,
किनारों पर आकर ही उसे सिमटना आता है।

ये रातें और ये तन्हाई, सब कुछ अधूरा है,
तेरे आने से ही इन सबको सिमटना है।

कुछ राज़ हैं जो दिल में छुपा रखे हैं,
तेरी आँखों में देखकर ही इन्हें सिमटना है।

जीवन का सिमटना

हर मोड़ पर जिंदगी कुछ सिखाती है,
अंत में एक छोटी सी कहानी में सिमटना सिखाती है।

दुनिया की दौड़ में कहाँ तक भागें हम,
एक दिन तो मिट्टी में ही सिमटना है।

ख्वाबों की दुनिया भी कितनी अजीब है,
पलक झपकते ही उन्हें सिमटना पड़ता है।

छोटे से लम्हे में बिखर जाती है जिंदगी,
फिर यादों में ही उसे सिमटना पड़ता है।

कब तक जिएँगे हम गैरों की तरह,
खुद में ही कहीं तो सिमटना है।

मोहब्बत का सिमटना

तेरी आँखों में अक्सर मैं खो जाता हूँ,
मेरी दुनिया को तुझमें ही सिमटना है।

बिखेर कर खुद को तुझ पर मैंने लुटा दिया,
अब तेरी पनाहों में ही मुझे सिमटना है।

ये मोहब्बत भी एक खूबसूरत आग है,
जिसमें जलकर ही हमें सिमटना है।

दूरियों का गम तो अब कुछ रहा नहीं,
तेरे करीब आकर ही तो हमें सिमटना है।

हर आरजू, हर तमन्ना है बस यही,
तेरी मोहब्बत में सदा को सिमटना है।

विरह का सिमटना

जब से बिछड़े हैं तुझसे, ये हाल है हमारा,
खुद की परछाई में ही हमें सिमटना है।

तन्हाई की चादर ओढ़ कर सो जाते हैं,
बस गमों में ही अब हमें सिमटना है।

वो खुशियों के पल अब कहाँ मिलते हैं,
अंधेरों में ही हमें अब सिमटना है।

हसरतें सारी राख हो गईं इस दिल की,
अब तो बस खामोशी में ही सिमटना है।

हर आहट पे लगता है तुम आए हो,
फिर हकीकत देख कर सिमटना पड़ता है।

अस्तित्व का सिमटना

तारों भरी रात में भी खुद को अकेला पाते हैं,
अपने ही साये में हमें सिमटना आता है।

कितनी बड़ी है ये दुनिया, फिर भी दिल छोटा है,
खुद की सोच में ही हमें सिमटना है।

हर दर्द, हर खुशी का हिसाब रखता है दिल,
आखिर एक दिन सबको सिमटना ही है।

ये जिस्म तो मिट्टी है, एक दिन मिल जाएगी,
रूह को ही बस कहीं सिमटना है।

अधूरे ख्वाबों का बोझ लिए फिरते हैं,
क्या इन्हें भी किसी कोने में सिमटना है?

उम्मीद का सिमटना

टूटी हुई उम्मीदों का ढेर लगा है,
कौन जाने कब इन्हें फिर से सिमटना है।

अंधेरों से डर कर हम बैठ जाते हैं,
क्या इन रातों को कभी नहीं सिमटना है?

कभी तो सूरज भी ढलता है शाम में,
और उसकी रोशनी को भी सिमटना है।

पत्तों की तरह बिखर गए हम राहों में,
हवा के झोंके से उन्हें सिमटना है।

एक आस है जो दिल में बची हुई है,
शायद उसे भी एक दिन सिमटना है।

समय का सिमटना

घड़ी की सुई भी कितनी तेज चलती है,
हर पल को आखिर तो सिमटना ही है।

बीते हुए लम्हों की कहानी क्या कहें,
उन्हें यादों में ही तो सिमटना है।

कब तक जवानी का ये रंग रहेगा,
ढलती उम्र में इसे भी तो सिमटना है।

हर सुबह के बाद एक शाम आती है,
और दिन की चहल-पहल को सिमटना है।

ये सफर जिंदगी का चलता ही रहता है,
मंज़िल पर आकर इसे सिमटना है।

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