Jaana (जाना)
जाना (Jaana): दिल की राहों का सफर
शायरी 1
हर राह पर तेरा इंतज़ार था, तुझे दूर तक जाना था, हम बेकरार थे।
शायरी 2
क्या खूब कहा था उसने, वापस नहीं जाना, मगर दिल है कि फिर उसी राह पर ठहर जाना।
शायरी 3
यह कैसा सफर है, कहाँ तक जाना है हमें, कुछ पता नहीं, बस चले जा रहे हैं हम।
शायरी 4
कुछ भी कहो, कुछ भी करो, लेकिन यह मत भूलो, लौटकर फिर उसी मंज़िल पर जाना है तुमको।
शायरी 5
क्यों डरते हो राह के काँटों से ऐ मुसाफ़िर, ज़िंदगी का नाम ही है आगे बढ़ते जाना।
शायरी 6
वो कहता था कि रुक जाना, मगर मैं सुनता नहीं था, ज़िंदगी की धुन पर मुझे बस चलते जाना था।
शायरी 7
कुछ फासले ऐसे होते हैं, जिन्हें तय कर के ही जाना पड़ता है, भले ही रास्ते में दिल का हर दर्द सहना पड़ता है।
शायरी 8
किस्मत में था दूर जाना, या तकदीर ने ही मोड़ दिया, हर मोड़ पर हमने बस तेरा नाम लिया।
शायरी 9
कौन जाने कहाँ तक जाना है इस बेखुदी को, बस एक तेरी याद है, जो साथ चल रही है।
शायरी 10
दिल में उम्मीदें लेकर, निकल पड़े हैं सफर पर, मंज़िल मिले या न मिले, हमें तो जाना है आखिर।
शायरी 11
हर शाम यही सोचता हूँ, अब कहाँ जाना है, तेरी यादों के सिवा, कोई और ठिकाना नहीं।
शायरी 12
तुमने कहा था कि लौट के आऊँगा ज़रूर, मगर कहाँ जाना है, यह बताया नहीं।
शायरी 13
एक दिन सबको यहाँ से दूर जाना है, कुछ यादें छोड़कर, कुछ किस्से सुनाकर।
शायरी 14
दिल की हर धड़कन में बस एक ही आवाज़ है, तेरी राहों में मुझे दूर तक जाना है।
शायरी 15
यह रातें, यह बातें, सब छूट जाना है एक दिन, बस रह जाएंगी यादें, जो कभी भुला न पाओगे तुम।
शायरी 16
जब तक साँसें हैं, तब तक चलते ही जाना है, ठहरने का नाम ही तो मौत है प्यारे।
शायरी 17
यह जिंदगी एक सफर है, जिसे तय कर के जाना है, हर कदम पर नया मंज़र, हर पल नया फसाना है।
शायरी 18
कहाँ जाना है, क्या पाना है, यह सवाल न पूछो, बस चलते रहो, रास्ते खुद ब खुद बताते जाएंगे।
शायरी 19
जो जाना चाहे उसे रोकते नहीं हम, क्योंकि जाते हुए को रोकना, उसकी मर्ज़ी के खिलाफ है।