Wednesday, June 10, 2026

Nazar (नज़र)

नज़र की बातें

दिल से निकली हर नज़र

झुकी झुकी नज़र तेरी कमाल कर जाती है, उठती है एक बार और सौ सवाल कर जाती है !!

ओ आँख चुरा के जाने वाले, हम भी थे कभी तेरी नज़रों में !!

हर नजर में मुमकिन नहीं है बे-गुनाह रहना, वादा ये करें कि खुद की नजर में बेदाग रहें।

जलने दे चिराग मुझे अँधेरे से डर लगता हैं, आँखे बंद भी करू तो उसका चेहरा नज़र आता है।

अल्फ़ाजो में ढूंढ़ता हूं तुम्हें, हकीकत में कहाँ तुम नज़र आते हो।

कुछ यूँ मिली नज़र उनसे बाकी सब नज़र अंदाज़ हो गए।

तेरी नज़र ने दिल में एक नई दुनिया बसा दी, मेरे हर ख्वाब को सच बना दिया।

तेरी नज़र से प्यार की महक आई, अब दिल में बस तेरा ही राग समाई।

तेरी नज़र से जो रोशनी मिली, मेरे अंधेरे दिल में तू ही तो समाई।

तेरी नज़र का असर अब सिर चढ़कर बोला, दिल ने कहा अब तुझे ही अपना बनाना है।

तेरी नज़र का जादू दिल पे छा गया, देखते-देखते ये दिल तेरा हो गया।

तेरी नज़र से जो नज़रें मिली, ज़िंदगी की राहें आसान सी लगीं।

तेरी नज़र का जादू दिल में उतर गया, हर ख्वाब तेरा मेरे ख्वाबों में बिखर गया।

तेरी नज़र ने ऐसा करिश्मा दिखा दिया, दिल ने तुझे खुदा से भी बढ़कर चाह लिया।

तेरी नज़र ने इश्क़ का पैगाम लिख दिया, मेरे दिल ने तेरा ही नाम लिख दिया।

नज़र से शुरू हुई थी जो कहानी, अब रूह तक उतर गई है वो रवानी।

वो पहली नज़र थी या कोई ख्वाब, दिल को यूं छू गया जैसे मीठा सा हिसाब।

तेरी नज़र से मिली जो ये पहचान, अब हर आइना भी तेरा दीदार मांगे जान।

झुकी नज़र में तेरा प्यार दिखा, दिल ने समझा, अब यह सफ़र तेरे साथ है।

झुकी नज़र में वो जादू था, जिसे दिल से चाहा, वो हासिल था।

झुकी नज़र ने जो किया असर, वो सदा दिल के अंदर रहेगा।

झुकी नज़र में एक राज़ था, जिसे दिल में छिपाने का साहस था।

तेरी एक नज़र ने दिल चुरा लिया, मैं देखता ही रह गया।

कहीं न उन की नज़र से नज़र किसी की लड़े, वो इस लिहाज़ से आँखें झुकाए बैठे हैं।

वो नज़र आता है मुझ को मैं नज़र आता नहीं, ख़ूब करता हूँ अँधेरे में नज़ारे रात को।

बे-तरह पड़ती है नज़र उन की, ख़ैर दिल की नज़र नहीं आती।

अच्छा तिरी नज़र में बहुत मुख़्तलिफ़ हूँ मैं, यानी तिरी नज़र में कोई दूसरा भी है।

नज़र चुरा के वो गुज़रा क़रीब से लेकिन, नज़र बचा के मुझे देखता भी जाता था।

हर चेहरे में आता है नज़र एक ही चेहरा, लगता है कोई मेरी नज़र बाँधे हुए है।

जिस सम्त नज़र जाए मेला नज़र आता है, हर आदमी इस पर भी तन्हा नज़र आता है।

नज़र नज़र से मिलाना कोई मज़ाक़ नहीं, मिला के आँख चुराना कोई मज़ाक़ नहीं।

तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते, इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते।

नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं, जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं।

नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही, नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही।

लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे, अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे।

गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए, हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है।

तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन नज़र दीवार पर जाती रहेगी।

एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर 'ताबिश', और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं।

मुझे ये नज़र आया के वो एक बला है, कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज-ए-अदा है।

तुझे देख कर ये जहाँ रंगीन नज़र आता है, तेरे बिना दिल को चैन कहां आता है।

नज़र भर देख ले जो वोह किसी को, नेकदिल इंसान की भी नियत हिला दे।

नज़रों को तेरे प्यार से इंकार नहीं है, अब मुझे किसी और का इंतज़ार नहीं है।

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