Maashooq (माशूक़)

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दिलकश नज़ारे, महफ़िल-ए-इश्क़ और
माशूक़ की बातें

शायरी 1

आँखों में तुम्हारी, है एक जहान छुपा,
मेरा दिल तो बस तुम्हारा, ऐ मेरी माशूक़ जान।

शायरी 2

हर साँस में तुम हो, हर धड़कन में तुम्हारी याद,
तुम ही तो हो मेरी ज़िंदगी, ऐ मेरी माशूक़

शायरी 3

तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की छाँव में, खो जाऊँ मैं कहीं,
बस यही है आरज़ू, ऐ मेरी माशूक़ हसीन।

शायरी 4

शाम ढले जब तुम आती हो, दिल खिल जाता है,
तुम्हारा दीदार ही तो है, ऐ मेरी माशूक़, जीने का मक़सद।

शायरी 5

तेरे लबों की हँसी, मेरी जान बन गई है,
तुम बिन ये दुनिया, ऐ मेरी माशूक़, वीरान हो गई है।

शायरी 6

इश्क़ की राहों में, बस तुम ही तुम नज़र आते हो,
हर मंज़िल की चाहत हो तुम, ऐ मेरी माशूक़

शायरी 7

तुम्हारा साथ हो तो, हर दर्द मिट जाता है,
तुम बिन ये जीवन, ऐ मेरी माशूक़, अधूरा सा लगता है।

शायरी 8

चाँद भी शर्मा जाए, तुम्हारी ख़ूबसूरती से,
ऐसी है मेरी माशूक़, ज़माने भर में अकेली।

शायरी 9

तुम्हारी आँखों का जादू, मुझ पर छा गया है,
अब तो हर पल, ऐ मेरी माशूक़, तेरा ही नशा है।

शायरी 10

दिल में तुम्हारी तस्वीर, लबों पे तुम्हारा नाम,
बस यही है ज़िंदगी, ऐ मेरी माशूक़, हर सुबह-ओ-शाम।

शायरी 11

तेरी अदाओं पे, ये दिल कुर्बान है मेरा,
तुम ही तो हो मेरी दुनिया, ऐ मेरी माशूक़ सजना।

शायरी 12

जब से तुम्हें देखा है, नींदें उड़ गई हैं,
तेरी चाहत में, ऐ मेरी माशूक़, रातों की सुबह हो गई है।

शायरी 13

तुम्हारे बिना ज़िंदगी, एक सज़ा सी लगती है,
तुम साथ हो तो, ऐ मेरी माशूक़, हर पल में मज़ा है।

शायरी 14

तेरी यादों के सहारे, जी रहे हैं हम,
तुमसे दूर होकर भी, ऐ मेरी माशूक़, तुम्हारे पास हैं हम।

शायरी 15

हर लम्हा तुझको चाहा, हर पल तुझे पुकारा,
तू ही है मेरी मंज़िल, ऐ मेरी माशूक़, तू ही सहारा।

शायरी 16

तेरी बातें, तेरी यादें, मेरा सुकून हैं,
तुम बिन ये दिल, ऐ मेरी माशूक़, हमेशा बेचैन है।

शायरी 17

तुम्हारे हुस्न की क्या मिसाल दूँ मैं,
दुनिया में नहीं कोई, ऐ मेरी माशूक़, तुम जैसी।

शायरी 18

तुम्हारी एक झलक के लिए, तरसते हैं नयन,
तुम बिन ये जीवन, ऐ मेरी माशूक़, लगता है सूनापन।

शायरी 19

तुम्हारे नाम से ही, दिल को मिलता है करार,
तुम ही तो हो मेरी ज़िंदगी, ऐ मेरी माशूक़, मेरा प्यार।

शायरी 20

हर सुबह तेरी याद, हर शाम तेरा इंतज़ार,
ये सिलसिला चलेगा, ऐ मेरी माशूक़, जब तक है जान।

शायरी 21

तेरी हर बात पे, दिल को यकीं आता है,
तुम बिन ये जीवन, ऐ मेरी माशूक़, कहाँ भाता है।

शायरी 22

फूलों से भी नाज़ुक, है तुम्हारा दिल,
जिसे मैं हमेशा रखूँगा, ऐ मेरी माशूक़, संभाल के।

शायरी 23

तुम्हारे चेहरे पे नूर है, आँखों में चमक,
तुम ही तो हो, ऐ मेरी माशूक़, मेरे दिल की धड़क।

शायरी 24

तेरी हर अदा पे, दिल बेकरार होता है,
तुम बिन ये जीवन, ऐ मेरी माशूक़, बेकार होता है।

शायरी 25

तुम्हारे क़दमों में, मैं अपनी जान बिछा दूँ,
बस तुम ही रहो साथ, ऐ मेरी माशूक़, यही दुआ है।

शायरी 26

तेरी मोहब्बत में, हम फ़ना हो जाएँ,
बस तेरी बाहों में, ऐ मेरी माशूक़, खो जाएँ।

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