Dilbar (दिलबर)
दिलकश 'दिलबर' पर शायरी का अनुपम संग्रह
तेरी यादों में खोकर, हर पल ये दिल पुकारे,
तू ही तो है मेरी ज़िंदगी, मेरे दिल का सहारे।
क्या बताऊँ, कितनी मोहब्बत है मुझे तुझसे,
ऐ मेरे प्यारे दिलबर (दिलबर), बस तू ही है मेरे सारे।
नज़रों से दूर सही, दिल से दूर नहीं तुम,
हर धड़कन में बसते हो, हर साँस में तुम।
कैसे भूल जाऊँ उस चेहरे को, जो हर पल याद आता है,
तुम ही तो हो मेरे दिलबर (दिलबर), जिसके लिए ये दिल जी जाता है।
तेरी हर अदा पर ये दिल फिदा होता है,
तेरी हर मुस्कान पर ये जहाँ लुटाता है।
क्या करूँ मैं इस इश्क़ का, जो बढ़ता ही जाता है,
ऐ मेरे दिलबर (दिलबर), तेरी एक झलक को ये तरसता है।
चाँद तारों की तरह, तू रौशन कर दे मेरा जहाँ,
तेरे बिन एक पल भी, अब जीना है बेईमान।
मेरी हर साँस में, मेरे हर एहसास में तू है,
मेरे प्यारे दिलबर (दिलबर), तू ही तो है मेरा खुदा।
जब भी देखता हूँ तुझे, दिल में एक तूफ़ान आता है,
तेरी सादगी पर, ये दिल जान लुटाता है।
क्या करूं मैं इस दीवानगी का, जो बढ़ती ही जाती है,
मेरे दिलबर (दिलबर), तेरी हर बात पर ये दिल मुस्काता है।
तेरी आँखों में डूब कर, दुनिया को भूल जाता हूँ,
तेरे हाथों को पकड़ कर, जन्नत को पा जाता हूँ।
तू ही तो है मेरी मंजिल, मेरा हर सपना,
ऐ मेरे दिलबर (दिलबर), तुझ बिन मैं अधूरा रह जाता हूँ।
इश्क़ की राहों में, तू मेरा हमसफर है,
मेरी हर खुशी की, तू ही तो खबर है।
क्या बताऊँ, कितना प्यार करता हूँ तुझसे,
मेरे दिलबर (दिलबर), तू ही तो मेरी जिंदगी का सफर है।
तेरी खुशबू से महकती है, मेरी हर सुबह,
तेरी यादों में कटती है, मेरी हर शाम।
तू ही तो है मेरी दुनिया, मेरा हर आराम,
मेरे दिलबर (दिलबर), तेरे नाम से ही पूरी होती है हर काम।
तेरा इंतज़ार करता हूँ, हर पल, हर घड़ी,
तेरी एक झलक को, आँखें तरसती खड़ी।
कब आओगे तुम, मेरे सपनों के जहाँ में,
मेरे दिलबर (दिलबर), तू ही तो है मेरी चाहत बड़ी।
तेरी बातें, तेरी यादें, सब दिल में बसा रखी हैं,
तेरी हर तस्वीर को, मैंने आँखों में सजा रखी है।
कैसे कहूँ कि तुमसे कितना प्यार है मुझे,
मेरे दिलबर (दिलबर), हर साँस में तेरी चाहत समा रखी है।
तेरी अदाओं पर फिदा, मेरा दिल दीवाना है,
तेरे बिन हर पल, एक वीराना है।
कब तक तड़पूँ मैं, तेरी यादों में,
मेरे दिलबर (दिलबर), बस तुझको ही पाना है।