Qalb (क़ल्ब)

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क़ल्ब की गहराई से निकली, रूहानी शाइरी

क़ल्ब का अफ़साना

मेरे क़ल्ब की हर धड़कन में, तेरा ही नाम है,
यह इश्क़ है या इबादत, बस यही मेरा काम है।

दर्द-ए-क़ल्ब

जब से तेरा साथ छूटा, वीरान हुआ मेरा क़ल्ब,
हर लम्हा जैसे सदियों सा, हर साँस में एक कर्ब।

क़ल्ब की आवाज़

सुनो कभी तो मेरे क़ल्ब की ख़ामोश आवाज़ को,
हर अल्फ़ाज़ में छुपा है, एक अधूरा राज़ कोई।

उल्फ़त-ए-क़ल्ब

यह उल्फ़त जो मेरे क़ल्ब में है, कभी कम न होगी,
तेरी यादों से ही तो, मेरी दुनिया रोशन होगी।

क़ल्ब की ज़ुबान

इश्क़ की बातें कहाँ, लफ़्ज़ों से बयाँ होती हैं,
यह तो क़ल्ब की ज़ुबान है, जो आँखों से पढ़ती हैं।

रोशन क़ल्ब

तेरे दीदार से रोशन हुआ, मेरा यह उदास क़ल्ब,
मिली है ज़िदगी को नई राह, मिट गया हर कर्ब।

क़ल्ब का सौदा

तेरी चाहत में लुटा दिया, अपना यह क़ल्ब-ओ-जान,
अब हर खुशी, हर गम, तुझ पर ही कुर्बान।

धड़कनें क़ल्ब की

मेरी हर धड़कन, मेरे क़ल्ब की, तुझे ही पुकारे,
यह कैसी बेकरारी है, यह कैसे इशारे।

तन्हा क़ल्ब

तन्हाई में भी तेरा ही, नाम लेता है मेरा क़ल्ब,
तेरी यादों से ही तो, कटती है रात और शब।

क़ल्ब का सुकून

जिस दिन से तुम मिले हो, सुकून मिला इस क़ल्ब को,
हर पल है अब खुशी का, नहीं कोई डर अब मुझको।

जज़्बा-ए-क़ल्ब

यह जो जज़्बा है मेरे क़ल्ब में, यह है सिर्फ तेरे लिए,
हर साँस, हर लम्हा, सिर्फ तुझको है जिए।

क़ल्ब की राह

तेरी ओर मुड़ गई है, मेरे क़ल्ब की हर राह,
अब मंज़िल भी तू ही है, और तू ही है पनाह।

बेताब क़ल्ब

न जाने कब से बेताब है, यह मेरा दीवाना क़ल्ब,
इक नज़र तेरी पाकर, मिट जाए हर कर्ब।

क़ल्ब का चिराग

तेरे प्यार का चिराग है, मेरे क़ल्ब में रोशन,
बुझ न पाएगी यह लौ, चाहे हो कैसी भी उलझन।

रूह और क़ल्ब

मेरी रूह में समाए हो, मेरे क़ल्ब में बसे हो तुम,
मेरी हर कहानी के, हसीन हिस्से हो तुम।

क़ल्ब की पुकार

हर रात मेरा क़ल्ब, तुझको ही पुकारा करता है,
तेरे दीदार की हसरत में, हर पल गुज़ारा करता है।

क़ल्ब की शफ़ा

तेरी बातों से मिलती है, मेरे क़ल्ब को शफ़ा,
हर ज़ख्म भर जाता है, मिल जाती है रज़ा।

क़ल्ब की सरहद

कोई सरहद नहीं है, मेरे क़ल्ब की मोहब्बत की,
यह तो बेपनाह है, यह तो है इनायत खुदा की।

नूर-ए-क़ल्ब

तेरे आने से आया है, मेरे क़ल्ब में नूर,
दूर हुए सब अंधेरे, अब हर शय है पुरनूर।

क़ल्ब का सागर

मेरे क़ल्ब में गहरा है, एक इश्क़ का सागर,
डूबे हैं इसमें हम, बिना किसी ख़तरे के डर।

क़ल्ब की धुन

यह क़ल्ब की धुन है, जो बजती है तेरे नाम से,
सुनाओ कभी तो धड़कनें, अपने मेरे पैग़ाम से।

गुलशन-ए-क़ल्ब

तुम आ गए तो खिल उठा, मेरा गुलशन-ए-क़ल्ब,
हर फूल में खुशबू तेरी, हर पत्ती में रब।

मुंतज़िर क़ल्ब

हर शाम मेरा क़ल्ब, तेरा मुंतज़िर रहता है,
न जाने कब तू आएगा, यह दिल बस कहता है।

क़ल्ब का मक़ाम

तेरा नाम ही है अब तो, मेरे क़ल्ब का मक़ाम,
तेरी यादों में ही गुज़रे, सुबह और शाम।

क़ल्ब की किताब

मेरे क़ल्ब की किताब में, बस तेरा ही ज़िक्र है,
हर हर्फ़ में तेरी चाहत, हर सफ़हे पर फ़िक्र है।

ख़्वाब-ए-क़ल्ब

हर रात मेरे क़ल्ब में, तेरा ही ख़्वाब आता है,
यह दिल तुझ बिन क्यों इतना, घबराता है।

क़ल्ब का मज़हब

मेरे क़ल्ब का मज़हब है, सिर्फ तेरी परस्तिश,
यही मेरी इबादत है, यही मेरी फरमाइश।

इश्क़-ए-क़ल्ब

इश्क़-ए-हक़ीक़ी है, जो बसा है मेरे क़ल्ब में,
यह कभी न मिटेगा, रहेगा हर पल में।

फ़ना फ़िल्-क़ल्ब

तेरी चाहत में हुए हैं, हम तो फ़ना फ़िल्-क़ल्ब,
अब न कोई होश है, न कोई मतलब।

क़ल्ब की रोशनी

तेरी यादों से ही रौशन है, मेरे क़ल्ब की हर गली,
जैसे चांदनी रात में, तारे बिखरे हों कहीं।

सफ़र-ए-क़ल्ब

यह सफ़र है मेरे क़ल्ब का, जो तुझ तक ही जाए,
राहों में तेरी यादें, हर कदम पर मुस्कुराए।

मुहब्बत-ए-क़ल्ब

मुहब्बत-ए-क़ल्ब है यह, जो रूह तक समा गई,
अब हर साँस में तेरी खुशबू, हर धड़कन में छा गई।

क़ल्ब का आईना

मेरे क़ल्ब का आईना, बस तेरा अक्स दिखाता है,
और

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