Tuesday, June 2, 2026

Noor (नूर)

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नूर (Noor) की रोशनी में डूबे ख़्याल

तुम्हारे चेहरे का हर नक्श है ऐसा, जैसे खुदा ने अपनी पूरी कला से तराशा हो, ये कैसा नूर है जो हर अंधेरे को भी रोशन कर दे.

जब तुम मुस्कुराते हो, तो हर तरफ फैल जाती है एक नई सुबह, तुम्हारा नूर चाँद-तारों से भी ज़्यादा जगमगाता है.

मेरी दुनिया में सिर्फ तुम्हारी ही रोशनी है, हर पल, हर दिशा में, तुम्हारे इश्क का नूर मेरी रूह को सुकून देता है.

नज़रें मिलती हैं तो दिल में एक अजीब सी हलचल होती है, ये तुम्हारे चेहरे का नूर ही तो है जो जादू कर जाता है.

रात की गहराइयों में भी तुम्हारी याद का दिया जलता है, क्योंकि उसमें तुम्हारे नूर की एक चमक है.

फूलों में खुशबू, सितारों में चमक, सब फिके पड़ जाते हैं, जब सामने आता है तुम्हारे हुस्न का नूर.

हर सुबह तेरी याद के साथ आती है, हर शाम तेरे ख्वाबों से सजी, मेरा हर लम्हा तुम्हारे नूर से ही रौशन है.

दिल के हर कोने में बस तुम ही बसे हो, मेरी हर साँस में तुम्हारा नाम है, तुम्हारी आँखों का नूर ही मेरी ज़िन्दगी का पैगाम है.

कायनात की हर खूबसूरत चीज़ तुमसे ही बनी है, ऐसा लगता है, क्योंकि तुम्हारा नूर हर चीज़ को और भी हसीन बना देता है.

जिस दिन से तुम्हें देखा है, दिल को सुकून मिल गया है, तुम्हारे चेहरे का नूर मेरी ज़िन्दगी की हर अंधेरी राह को रोशन कर गया है.

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