Sanwarna (सँवरना)
सँवरना (Sanwarna): सौंदर्य और भावनाओं की गहराई Shayari 1 आइना क्या करेगा तेरी खूबसूरती का बयाँ, जब तू खुद को सँवरना चाहे तो कायनात रुक जाए। Shayari 2 पलकों में छुपाकर रखा है दीदार तेरा, ख़ुद को सँवरना छोड़, तेरी यादों में डूबे रहते हैं। Shayari 3 हर अदा में तेरी एक नई बात है, तुझे देखे तो दिल चाहे और सँवरना । Shayari 4 क्या ज़रूरत है तुझे किसी श्रृंगार की, तेरी सादगी ही काफी है, खुद को सँवरना क्या। Shayari 5 जब तुम पास होते हो, हर लम्हा खूबसूरत लगता है, खुद को सँवरना तो बस एक बहाना होता है। ...