Gham (ग़म)
ग़म -ए-ज़िंदगी: दिल छू लेने वाली शायरियाँ शायरी 1 हर साँस में है दर्द, हर दिल में है ग़म , क्या कहें इस ज़माने से, क्या खोया क्या पाया हम। शायरी 2 ज़िंदगी की राहों में, ग़म का सफ़र है जारी, खुशियों की तलाश में, हर शब है हमारी भारी। शायरी 3 जब रात गहराए, और तनहाई का साया हो, तब हर एक पल में बस, तेरे ग़म का एहसास हो। शायरी 4 आँखों में नमी है, लबों पे खामोशी है, दिल में छुपाए बैठे हैं, ये कैसा ग़म है। शायरी 5 बदलते मौसमों में भी, ये दिल ना बदला, हर साँस के साथ है, मेरा ये ग़म का सिलसिला। शायरी 6 कभी तो ढलेगी रात, कभी तो सहर होगी, कब तक रहेगा दिल में, ये ग़म की लहर होगी। शायरी 7 ...