Tuesday, June 9, 2026

Chashm (चश्म)

चश्म: इश्क की ज़ुबान

तुम्हारी चश्म (चश्म) का हर नज़ारा, मेरे दिल में उतर जाता है,
हर बार जब तुम मुस्कुराती हो, मेरा हर गम बिखर जाता है।

इन गहरी चश्म (चश्म) में छुपा है एक समंदर गहरा,
मैं डूबना चाहता हूँ इसमें, पाकर तुम्हारा चेहरा।

जब से देखा है तुम्हारी चश्म (चश्म) का नूर,
हर शय बेनूर लगती है, हर शय बेकसूर।

तेरी चश्म (चश्म)-ए-मयगूं का हर इशारा, दीवाना बना देता है,
कौन कहता है शराब ज़रूरी है, जब ये जाम पिला देता है।

वो चश्म (चश्म)-ए-हया जो झुकती है, कमाल कर जाती है,
हज़ार बातें बिन बोले, वो बयान कर जाती है।

फ़लक भी हैरान है, चाँद भी परेशान है,
जब से देखा है तेरी चश्म (चश्म) में मेरा जहान है।

मेरी हर सुबह, मेरी हर शाम है, तेरी चश्म (चश्m),
इनमें ही अब मेरा आराम है, इनमें ही मेरा मुकाम है।

ये कौन सी कशिश है तेरी चश्म (चश्म) में,
हर पल खींचती है मुझे अपनी रूह की रस्म में।

अगर मेरी चश्म (चश्म) से देख सको तुम खुद को,
तो जान जाओगे कितना हसीन है तुम्हारा वजूद।

तेरी चश्म (चश्म) की हकीकत से कौन वाकिफ होगा,
इसमें तो मेरी हर खुशी, हर आरज़ू समाई है।

Monday, June 8, 2026

Aankhein (आँखें)

आँखें: दिल की ज़ुबान

तेरी आँखें समुंदर से गहरी, इनमें डूब जाने को दिल करता है।

एक नज़र जो उठाई तुमने, सारी दुनिया ठहर गई इन आँखों में।

तेरी आँखें नहीं, ये तो मेरे इश्क़ का आईना हैं।

खामोश रहती हैं ये आँखें, पर दिल की हर बात कह जाती हैं।

तेरी नशीली आँखें, हर रात ख्वाबों में आती हैं।

इन आँखों की चमक में ही, मेरी दुनिया रौशन है।

जब से देखा है तेरी आँखों को, कोई और नज़ारा भाता नहीं।

तेरी आँखों में डूबकर जाना, मोहब्बत लफ्ज़ों से ज़्यादा है।

कितनी मासूम हैं ये आँखें, पल भर में दिल जीत लेती हैं।

तेरी आँखों का जादू, हर मुलाकात को खास बना देता है।

ये आँखें जो कभी झुके नहीं, आज तेरे इंतज़ार में पलकें बिछाए बैठी हैं।

Sunday, June 7, 2026

Nazaakat (नज़ाकत)

नज़ाकत भरी शायरी

तेरी हर अदा में है वो नज़ाकत (नज़ाकत), जो दिल को छू जाए, नज़र उठाए भी तो क़यामत सी ले आए।

फूलों सी कोमलता, साँसों में खुशबू, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) ही तो है, मेरे महबूब।

अल्फाज़ भी शर्मा जाएँ, तेरी चाल की नज़ाकत (नज़ाकत) देख कर, जैसे कोई ग़ज़ल चल पड़ी हो, चुपके से दिल में उतर कर।

चाँद में भी नहीं वो नूर, जो तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) में है, हर एक अदा में तेरी, एक अलग ही रंगत है।

तेरी आँखों की गहराई, लबों की वो नज़ाकत (नज़ाकत), हर साँस में बसी है, तेरी चाहत, तेरी इनायत।

छू ले जो हवा तुझको, तो वो भी इठलाए, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) पे तो कुदरत भी सर झुकाए।

लफ़्ज़ों में कैसे बयान हो, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) का आलम, तू तो ख़ुद एक मुकम्मल ग़ज़ल है, मेरा दिलकश सनम।

हर बात में तेरी मिठास, हर अंदाज़ में नज़ाकत (नज़ाकत), तू है एक ऐसा अफ़साना, जिसकी हर पंक्ति है इबादत।

कभी रेशमी ख़्वाबों में, कभी महकी हवाओं में, तेरी नज़ाकत (नज़ाकत) का जादू है, मेरी हर दुआओं में।

खुदा ने तराशा है तुम्हें, बड़ी नज़ाकत (नज़ाकत) के साथ, तभी तो तुम बन गई हो, मेरे जीने की हर बात।

Saturday, June 6, 2026

Adaa (अदा)

तेरी हर अदा पर फ़िदा

तेरी हर अदा पे मरते हैं हम, क्या करें इस दिल का, जो तुझपे फिदा है।
नज़र उठाई तो जादू, झुकाई तो कहर, क्या कहें तेरी इस अदा को, जिसकी कोई हद नहीं।
तेरी वो मदहोश कर देने वाली अदा, हर आशिक को दीवाना बना जाती है।
हजारों खामियां सही मुझमें, पर तेरी एक अदा पे सब माफ कर दिए।
तेरी सादगी में भी एक अलग अदा है, जो हर रंगीनियत पर भारी पड़ती है।
जब भी देखा तेरी आँखों में, एक नई अदा दिखी, क्या खूब है ये हुस्न तेरा, जो हर पल बदलता है।
शिकायत भी करते हैं, प्यार भी लुटाते हैं, तेरी हर अदा को हम बस चाहते हैं।
वो हंसने की अदा, वो चलने का अंदाज़, हर बात में है तेरे कुछ तो खास।
क्या खूब तेरी अदा है, जो दिल को छू जाती है, तू दूर रहे या पास, हर पल याद आती है।
तेरी मासूमियत भी एक अदा है, जो इस कदर भाती है, कि दिल को बस तेरी ही चाहत सताती है।

Friday, June 5, 2026

Gulaab (गुलाब)

गुलाब के रंग, प्यार के संग

गुलाब की तरह महकती है तेरी हर एक बात, तेरी यादों से रोशन होती है मेरी हर रात।

गुलाब की खुशबू सा तेरा एहसास, हर लम्हा दिल में जगाए प्यार की आस।

गुलाब के फूल सा तेरा नाम, जुबां पर आए तो मिल जाए आराम।

तेरा प्यार गुलाब की खुशबू बन जाए, मेरी हर सांस में बसता चला जाए।

गुलाब की तरह तुम भी नाज़ुक हो, और ख़यालों में हमेशा ताज़ा।

हाथ में गुलाब हो और साथ तुम, इस से खूबसूरत क्या ख़्वाब हो सकता है।

गुलाब की तरह तुम्हारा प्यार भी, जितना सहेजों उतना ही महकता है।

गुलाब की खुशबू जैसा प्यार, जो बिना कहे भी सब समझा दे।

जैसे गुलाब बिना शोर के महकता है, वैसे ही सच्चा प्यार खामोश होता है।

गुलाब की पंखुड़ियों में छुपा है इश्क़, जैसे तुम्हारे दिल में मेरी जगह।

Thursday, June 4, 2026

Rukhsaar (रुख़सार)

नूर-ए-रुख़सार पर शायरी

तेरी रुख़सार की लाली, हर सुबह का पैगाम है,
देखूँ जब भी इसे, दिल को मिलता आराम है।
शब की ज़ुल्मत में, चाँदनी सी तेरी रुख़सार,
नूर-ए-मोहब्बत है, मेरी हर साँस का करार।
वो हल्की सी मुस्कान, और उस पर तेरी रुख़सार,
जैसे खुल गया हो जन्नत का कोई नया द्वार।
तेरे रुख़सार पर बिखरी जुल्फ़ों की घटाएँ,
सावन की पहली बारिश सी, मदहोश कर जाएँ।
कागज़ पर उतारूँ क्या तेरी रुख़सार का नज़ारा,
हर लफ्ज़ में सिमट जाए, यह है तेरा सहारा।
जब जब पलकें झुकें, उभरती है तेरी रुख़सार,
इक ख़ूबसूरत हकीकत, नहीं कोई ख़्वाब-ओ-दीदार।
सूरज भी शर्मा जाए, देख तेरी रुख़सार का नूर,
ऐसा जलवा कहीं देखा नहीं, हर ऐब से दूर।
तेरी रुख़सार की मासूमियत, दिल को छू जाती है,
हर गम, हर उदासी, पल भर में मिटा जाती है।
हवा जब छू के गुज़रे, तेरी रुख़सार को,
खुशबू फैल जाए ऐसी, मैं ढूँढूँ हर मोड़ को।
फूलों से भी नाज़ुक, है तेरी रुख़सार की रौनक,
इश्क़ की हर अदा में, है तेरी ही महक।
आँखों में तेरी दुनिया, और रुख़सार पर जहान,
इक तेरी झलक पे, मैं कर दूँ सब कुर्बान।
खुदा ने तराशा होगा, फुर्सत से तेरी रुख़सार,
हर नक़्श में है जादू, हर अंदाज़ में प्यार।

Wednesday, June 3, 2026

Deedar (दीदार)

नज़र-ए-इश्क़: दीदार पर दिलकश शायरी

आप के दीदार के लिए दिल तरसता है,
आप के इंतज़ार में दिल तड़पता है।

मेरी आँखें और दीदार आप का,
या क़यामत आ गई या ख़्वाब है।

देखने के लिए सारा आलम भी कम,
चाहने के लिए एक चेहरा और उसका दीदार बहुत।

हर पल तेरे दीदार को तरसती हैं आँखें मेरी।

दीदार की तमन्ना कल रात रख रही थी,
ख़्वाबों की रह-गुज़र में शमएँ जला जला के।

क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख कर,
जलता हूँ अपनी ताक़त-ए-दीदार देख कर।

तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना,
मेरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना।

जो और कुछ हो तेरी दीद के सिवा मंज़ूर,
तो मुझ पे ख़्वाहिश-ए-जन्नत हराम हो जाए।

इलाही क्या खुले दीदार की राह,
उधर दरवाज़े बंद आँखें इधर बंद।

ये दिल प्यार के काबिल ना रहा, कोई भी इज़हार के काबिल ना रहा,
इस दिल में बस गयी दोस्ती आपकी, अब तो चाँद भी दीदार के काबिल ना रहा!