Berukhi (बेरुख़ी)
बेरुख़ी (Berukhi): दर्द और अल्फाज़ का संगम तेरी खामोशी में भी वो बात थी, जो छुपाए थी तेरी बेरुख़ी की रात थी। हर लफ्ज़ में तेरी बेरुख़ी का असर था, मेरे दिल में बस यही एक डर था। इश्क़ में मिली बस यही बेरुख़ी , ज़िंदगी भर का अब यही है दुख़ी। क्या बताऊँ तेरी बेरुख़ी का आलम, हम तो तेरे बिना बेहाल हैं सनम। उसकी एक निगाह में थी लाखों बेरुख़ी , और हम थे कि बस प्यार ही देखते रहे। हर रात जाग कर तेरी यादों में गुम, तेरी बेरुख़ी ने कर दिया है ये सितम। तेरी बेरुख़ी का अंदाज़ बदल ...