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Dhuan (धुआँ)

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धुआँ (Dhuan): रूह की गहराई से निकली शायरी दर्द का धुआँ ज़िंदगी की राहों में यूँ अक्सर मिलते हैं, जब दिल जलता है तो उठता है ये धुआँ . यादों का धुआँ तेरी यादें आज भी मेरे दिल को जलाती हैं, हर शाम उठता है उनकी आग से गहरा धुआँ . इश्क़ का धुआँ इश्क़ की आग जब जलती है सीने में, तो आँखों से अक्सर निकलता है मीठा धुआँ . अधूरे ख्वाबों का धुआँ कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते हैं ज़िंदगी में, बनकर धुआँ आसमान में बिखर जाते हैं. तन्हाई का धुआँ तन्हाई की शाम में अक्सर यूँ होता है, हर साँस से निकलता है एक उदास धुआँ . ...

Raakh (рах)

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जली हुई उम्मीदों की राख (राख) दर्द-ए-दिल की दास्तान अधूरे ख्वाबों की राख मोहब्बत की आग में जलकर, सब कुछ मिट गया, बची है बस अब अधूरे ख्वाबों की राख . यादों की राख दिल के आंगन में बिखरी है यादों की राख , हर कण में छिपी है एक अनकही दास्ताँ. दिल की राख कहने को तो बहुत कुछ था, पर अब कुछ नहीं, सिर्फ मेरे जले हुए दिल की राख है बची हुई. इश्क़ की राख इश्क़ की आग ने सब कुछ जला दिया, अब तो बस उसकी यादों की राख बची है. टूटे सपनों की राख क्या बताएँ कैसे टूट गए सब सपने, बस बची है अब टूटे सपनों की राख . ...

Mitti (मिट्टी)

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मिट्टी (Mitti) पर दिल को छू लेने वाली शायरियां पहला नज़राना ज़िंदगी की हकीकत है, हम सब Mitti (मिट्टी) के बने हैं, आख़िर में इसी में मिल जाना है, ये कायनात के सबक हैं। रूह का सुकून जब बारिश की बूँदें गिरती हैं, Mitti (मिट्टी) की खुशबू आती है, लगता है जैसे रूह को मेरी, कोई अनमोल दावत भाती है। माँ की ममता बच्चों को खेलता देखूँ, Mitti (मिट्टी) में सने हुए, याद आती है माँ की ममता, और बचपन के खोए हुए। जड़ों से रिश्ता कितना भी उड़ लें आसमान में, पर जड़ें तो Mitti (मिट्टी) में ही हैं, अपनी पहचान वही है, जहाँ हमारे पुरखों की निशानी है। सरहद की Mitti (मिट्टी) ...

Gor (गोर)

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गोर (Gor) पर दिलकश शायरी संग्रह ज़िंदगी की इस राह में, एक दिन तो है जाना, आख़िरी मंज़िल है हमारी, वो गहरा गोर ठिकाना। दुनिया की रौनकें सब, पल भर की कहानी हैं, सच्ची हकीकत तो है, बस मिट्टी की गोर निशानी हैं। क्या खूब सजाया है हमने, इस फ़ानी दुनिया को, लेकिन भूल जाते हैं, असल घर है हमारा गोर । ग़म न कर ऐ दिल, इस दुनिया की बेवफ़ाई का, सुकून मिलेगा आखिर, जब सो जाएंगे गोर में जा कर। कितने आए कितने गए, सब मिट्टी में मिल गए, क्या दौलत क्या शोहरत, सब का ठिकाना गोर है। जब रूह परवाज़ करेगी, जिस्म ठंडा पड़ जाएगा, तब इस ज़मी...

Mazaar (मज़ार)

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इश्क़ और इबादत: मज़ार की रूहानी दास्तान सुकून की पनाह तेरी चौखट पे सुकून मिलता है, ऐ दिल की बात कौन समझे, इस फ़ानी दुनिया में कहाँ मिलती है वो राहत, जो तेरे मज़ार पे है। मरहम-ए-दिल नज़र झुकती है, दिल को करार आता है, हर ज़ख़्म-ए-दिल का मरहम है ये तेरा मज़ार । नूरानी रौशनी दुआओं का सिलसिला यहाँ खत्म नहीं होता, रोशन रहता है हमेशा ये नूरानी मज़ार । खुदा की रहमत क्या माँगू उस खुदा से, जब सब कुछ मिल जाए, तेरी रहमतों से भर जाए मेरा ये मज़ार । यादों की महक हर शाम यहाँ एक नया चिराग जलता है, तेरी यादों से महकता ये प्यारा मज़ार । दिल को करार टूटे दिल लेकर आते हैं सब तेरी पनाह में, सुकून का पैगाम देता है ये तेरा मज़ार । ...

Qabr (क़ब्र)

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क़ब्र (Qabr) पर बेहतरीन शायरी शायरी 1 तेरी यादों की आग अब भी बुझी नहीं, मेरी रुह को जलाती है हर पल, चाहे क़ब्र (क़ब्र) में सोये हों कहीं। शायरी 2 ज़िंदगी भर की थकान लिए अब कहाँ जाऊँ, आखिर मिल ही गई मंज़िल, ये सुकून की क़ब्र (क़ब्र) । शायरी 3 खुदा जाने क्या था उस शक्स की तकदीर में, हँसता हुआ गया, सो गया अपनी क़ब्र (क़ब्र) में। शायरी 4 मत पूछो क्या गुज़री हम पर इस दुनिया में, बेहतर है कि अब सो जाएँगे अपनी क़ब्र (क़ब्र) में। शायरी 5 मिट्टी का जिस्म मिट्टी में मिल ही जाएगा, बस रह जाएगी यादें, जब क़ब्र (क़ब्र) में समा जाएगा। शायरी 6 हर आहट पे लगता है कोई आने वाला है, अब तो इंतजार है बस, मेरी क़ब्र (क़ब्र) बनाने वाला है। ...

Kafan (कफ़न)

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कफ़न (Kafan): शायरी का संग्रह शायरी 1 ज़िंदगी भर साथ देने का वादा किया था तुमने हमसे, और जाते-जाते हमें एक कफ़न भी न दिया। शायरी 2 मेरी कब्र पर आकर क्यों रोते हो यारों, जब ज़िंदा था तब तो एक कफ़न भी न दिया। शायरी 3 मौत की नींद सो रहा हूँ सुकून से अब, बेशक मेरे बदन पर अब कफ़न है। शायरी 4 तेरी याद में हम आज भी जीते हैं, बस फर्क इतना है कि अब तन पर कफ़न है। शायरी 5 इश्क़ में दिल तोड़ने वालों को क्या पता, एक दिन उन्हें भी कफ़न में लिपटाया जाएगा। शायरी 6 गरीब की मोहब्बत का मज़ाक मत उड़ाओ, उसके पास देने को बस एक कफ़न ही होता है। शायरी 7 जिस दिन मेरा जनाज़ा उठेगा, तुम्हें...