Monday, June 15, 2026

Hayaa (हया)

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हया की रंगीन दुनिया: शायरी का अनमोल खज़ाना

नज़र में हया, दिल में पाकीज़गी

लबों पे है मुस्कान और आँखों में गहरा पानी है,
तेरी हया ही तो मेरी मोहब्बत की निशानी है।

चेहरे पे आती है तेरे जब भी थोड़ी सी लाली,
समझ लेता हूँ कि तुमने ओढ़ी है हया की चादर काली।

इश्क़ में भी रहे एक अदब, एक पर्दा सा,
यही तो सिखाती है हमें ये पाकीज़ा हया।

नज़रें झुका के चलना भी एक अदा है तेरी,
रूह को छू जाती है तेरी ये प्यारी सी हया मेरी।

दामन को अपनी हया से यूँ सँवारो तुम,
के देखने वाला भी कहे, क्या नायाब हो तुम।

जब कोई देखे तुम्हें, तो तुम शर्म से झुक जाओ,
यही तो असली हुस्न है, यही है तुम्हारी हया।

इश्क़ की राह में भी एक पर्दा ज़रूरी है,
दिल को पाक रखती है ये हुस्न-ए-हया।

खूबसूरती तो हर कोई देख लेता है,
मगर हया को हर आँख नहीं पहचानती है।

जिस दिल में हया हो, वो कभी नहीं भटकता,
नेकी की राहों पर चलता है, कभी नहीं अटकता।

तुम्हारा चेहरा जब भी देखता हूँ मैं,
हया के नूर से रोशन पाता हूँ मैं।

वो ज़माना अब कहाँ, जब आँखों में हया थी,
अब तो हर जगह बस बेपरवाही की हवा थी।

अगर हया ना हो तो हुस्न भी फीका लगे,
रूह की पाकीज़गी से ही तो हर रिश्ता जगे।

अपनी हया का दामन ना छोड़ना कभी,
यही तो है वो दौलत जो मिटती नहीं कभी।

हर बात पे शर्मा जाना, हर अदा में हया,
कुछ इस तरह से तुमने हमको दीवाना किया।

वो नज़रों की गुस्ताखी, और फिर आँखों में हया,
कुछ ऐसा ही तो होता है तेरा हर इक अदा।

कभी लबों पे हंसी, कभी आँखों में हया,
यही तो है अंदाज़-ए-मोहब्बत-ए-दिलरुबा।

हुस्न की क्या ज़रूरत, जब हया खुद कमाल हो,
हर एक नज़र में फिर एक नया सवाल हो।

वो चुप रहना तेरा, और बातों में हया,
सारा जहाँ हार जाए, ऐसी है तेरी अदा।

दिल की गहराइयों में हया को बसा लो तुम,
सच्ची मोहब्बत का दामन ना छोड़ना तुम।

एक नूर सा बिखर जाए, जब चेहरा खिलता है,
हया के पर्दे में ही तो सच्चा हुस्न मिलता है।

हया तेरी मेरे दिल में घर कर गई है,
हर सुबह अब तेरी यादों से भर गई है।

लबों पे ख़ामोशी, आँखों में थोड़ी सी हया,
तेरा अंदाज़-ए-बयाँ ही तो है सबसे जुदा।

तेरी हया की महक, फिज़ाओं में घुल जाए,
देखने वाला भी बस तुझमें ही खो जाए।

वो ज़ुल्फ़ों का हट जाना, फिर नज़र में हया,
हर अदा में तेरी, बस दिखता है खुदा।

हया है गर तुम्हारी, तो दिल भी पाक होगा,
ये इश्क़ भी तब ही तो सच्चा और बेबाक होगा।

जब तुम पास आती हो, तो दिल धड़क जाता है,
तेरी आँखों की हया, मुझे बेहद भाता है।

तेरी हया में जो जादू है, वो कहीं और नहीं,
यही तो है वो नगीना, जो मिलता हर मोड़ नहीं।

हया है गहना तेरा, हया है तेरी ज़ीनत,
इसकी हिफाज़त करना, यही तो है तेरी दौलत।

तेरी सादगी में भी एक अलग सी कशिश है,
तेरी आँखों की हया में एक गहरी रंजिश है।

नज़रें उठाना, फिर पलकों को झुका लेना,
ऐसी अदा है तेरी, कि दिल दे बैठे जमाना।

प्यार की हद से भी आगे निकल जाती है हया,
जब दिल से दिल मिलते हैं, तो बन जाती है दुआ।

Sunday, June 14, 2026

Muskaan (मुस्कान)

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मुस्कान (Muskaan) - दिल छू लेने वाली शायरी

होठों पर खिली एक छोटी सी खुशी, जीवन को रोशन कर जाती है।

तेरी मुस्कान ने जो कमाल कर दिया,
वीरान दिल को फिर से गुलज़ार कर दिया।

होंठों पे लिए एक प्यारी सी मुस्कान,
तुमने हर मुश्किल को आसान कर दिया।

तेरी मुस्कान से रौशन है मेरा जहाँ,
जैसे अँधेरी रात में चाँदनी का समाँ।

एक तेरी मुस्कान पे कुर्बान ये जिंदगी,
क्या खूब लगती है तेरी सादगी।

तेरी मुस्कान से फूल खिलते हैं,
दिल के वीराने में बहारें मिलती हैं।

दर्द छुपाकर भी जो हंसना जानती है,
वो हर मुस्कान मेरी जान पहचानती है।

बड़ी अनमोल है तेरी मुस्कान ऐ दोस्त,
इसे यूँ ही हर किसी पर लुटाया न कर।

तेरी मुस्कान में छुपा है मेरा सुकून,
तू हंसता रहे तो हर दर्द मेरा कम हो जाए सून।

कागज़ पर उतार कर देखा तेरी मुस्कान को,
हर लफ्ज़ में तेरी खुश्बू सी मिली मुझको।

एक पल की मुस्कान कभी यूं ही आ जाती है,
जीवन के हर गम को भुला जाती है।

तेरी मुस्कान ने दिल में घर कर लिया,
हर अँधेरे को रोशन कर दिया।

वो हल्की सी मुस्कान जो तेरे लबों पर है,
मेरी हर खुशी का ठिकाना उसी पर है।

तेरी एक झलक और वो प्यारी सी मुस्कान,
बस इतना ही काफी है मेरी जान।

जो छुपाए कई गम अपने अंदर,
ऐसी मुस्कान से कौन भला डरे?

तेरी मुस्कान है या कोई जादू है,
जो हर दिल को मोह लेती है।

खामोश रात में तेरी मुस्कान की बात,
करती है मेरे दिल को मदहोश रात।

तेरी मुस्कान की एक झलक पा लूं गर,
तो मेरी हर उदासी हो जाए फुर्र।

ये सिर्फ एक मुस्कान नहीं, इबादत है मेरी,
जिसे देख कर सुकून मिलता है।

तेरी मुस्कान से बिखरती है खुशियाँ,
जैसे सूरज से बिखरती हैं किरणें।

कितनी हसीन होती है ये मुस्कान,
जो हर दर्द को छुपा लेती है आसानी से।

तेरी मुस्कान को दिल में सजा रखा है,
जैसे किसी मंदिर में भगवान को सजा रखा है।

जब तुम हंसते हो तो फूल खिलते हैं,
तुम्हारी मुस्कान से सारे गम मिलते हैं।

तेरी मुस्कान में वो जादू है,
जो हर किसी को दीवाना बना दे।

एक छोटी सी मुस्कान भी क्या गजब करती है,
ना जाने कितने दिलों को जीत लेती है।

तेरी मुस्कान की रौनक से,
मेरा घर आँगन जगमगा उठता है।

गमों की धूप में तेरी मुस्कान,
जैसे ठंडी हवा का झोंका हो।

तेरी मुस्कान से ही मेरी सुबह होती है,
तेरी मुस्कान से ही मेरी शाम होती है।

जब भी तू हंसती है, दिल खुश हो जाता है,
तेरी मुस्कान से हर गम दूर हो जाता है।

तेरी मुस्कान वो दवा है,
जो हर मर्ज को मिटा देती है।

क्या हसीन लगती है तेरी वो मुस्कान,
जिसमें छिपी है मेरी सारी जहान।

तेरी मुस्कान है मेरा पहला प्यार,
तेरी मुस्कान है मेरा संसार।

नज़रें मिलती हैं तो दिल धड़कता है,
तेरी मुस्कान से मेरा हर दिन चमकता है।

तेरी मुस्कान है मेरी जिंदगी का नूर,
इसके बिना हर खुशी है दूर।

क्या जादू है तेरी मुस्कान में,
जो हर उदासी को मिटा देती है शान से।

तेरी मुस्कान से ही जीवन में रंग है,
इसके बिना सब बेढंग है।

लबों पर मुस्कान और आँखों में प्यार,
खुदा करे ऐसा ही बना रहे हर बार।

Saturday, June 13, 2026

Tabassum (तबस्सुम)

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तबस्सुम (Tabassum)

मुस्कुराहट के कुछ अनमोल लम्हे...

होठों पर जब खिंचती है तुम्हारी तबस्सुम,
सारा जहाँ लगता है रोशन, गुम हो जाते हैं हर गम।

वो हल्की सी तबस्सुम, दिल को छू जाती है,
हर उदासी, हर थकान पल भर में मिटा जाती है।

न जाने कितनी हिकायतें बयान करती है ये तबस्सुम,
खामोशी में भी दिल के राज़ खोल जाती है ये तबस्सुम

तेरी तबस्सुम है जैसे सुबह की पहली किरण,
आँखों में चमक, दिल में सुकून, हर पल है नयापन।

ज़िंदगी की उलझनों में एक पल का आराम है ये तबस्सुम,
हर दर्द को भुलाने का एक प्यारा सा पैगाम है ये तबस्सुम

क्या जादू है तेरी नज़रों में, क्या तेरी तबस्सुम में,
देखते ही दिल बहल जाता है, डूब जाते हैं सुकून में।

हर लफ्ज़ से बेहतर, हर खामोशी से गहरी,
तेरी तबस्सुम की अदा है सबसे निराली।

जब भी तेरी तबस्सुम मेरे सामने आती है,
हर काली रात भी चाँदनी बन जाती है।

तेरी तबस्सुम से महकती है फिज़ा, तेरी बातों से दिल,
तू है तो हर सुबह है सुहानी, हर शाम रंगीन।

खुदा ने क्या खूब नवाज़ा है तुझे इस तबस्सुम से,
जिसे देख कर हर दिल में खुशियों का रंग भर जाए।

गमों की भीड़ में तेरी तबस्सुम ही सहारा है,
हर मुश्किल को आसान बनाने का प्यारा नज़ारा है।

तेरी तबस्सुम से सजाई है मैंने अपनी दुनिया,
हर ख्वाब में तू ही तू, हर नज़र में तेरी अदा।

चाँद की चमक, सितारों की रौशनी फीकी पड़ जाए,
जब तेरी तबस्सुम से ये ज़माना जगमगा जाए।

तेरी तबस्सुम है जैसे फूलों की महक, बारिश की बूँद,
जो भी देखे, उसके दिल में छा जाए सुकून।

हर मुश्किल आसान हो जाती है, हर राह सीधी,
जब तेरी तबस्सुम की एक झलक मिल जाती है।

तेरी तबस्सुम के सिवा कुछ और नहीं चाहिए,
मेरी हर दुआ में बस तेरी खुशी शामिल है।

दिल की गहराइयों से निकलती है तेरी तबस्सुम,
जो मेरे हर ज़ख्म पर मलहम बन जाती है।

तेरी तबस्सुम की रोशनी से रौशन है हर सुबह मेरी,
तेरे बगैर तो हर शाम उदास लगती है तेरी।

ये हल्की सी तबस्सुम, ये प्यारी सी अदा,
तू ही तो है मेरी हर खुशी की वजह।

तेरी तबस्सुम में वो सुकून है जो कहीं नहीं मिलता,
तेरी अदाओं में वो नशा है जो हर दिल को भाता है।

फूलों से नाज़ुक, सितारों से हसीन,
तेरी तबस्सुम है मेरी हर खुशी की ज़मीन।

तेरी तबस्सुम की चाशनी में घुला है हर पल मेरा,
हर लम्हा है प्यारा, हर पल है सुनहरा।

क्या हसीन मंज़र होता है जब तू मुस्कुराती है,
तेरी तबस्सुम से कायनात भी इठलाती है।

तेरी तबस्सुम की हर अदा पे दिल कुर्बान है,
इस दिल की हर धड़कन में बस तेरा नाम है।

तेरी तबस्सुम को देख कर ही मैं जीता हूँ,
वरना इस बेरंग दुनिया में और क्या है जो मैं सीखता हूँ।

हर शाम को तेरे ख्यालों में तबस्सुम मिलती है,
तेरी यादों से ही मेरी रातें रंगीन होती हैं।

तेरी तबस्सुम ने सिखाई है मुझे जीने की अदा,
अब हर पल को मैं जीता हूँ, होकर तुझपे फिदा।

जन्नत से आई हुई कोई हूर लगती है,
तेरी तबस्सुम हर गम को दूर करती है।

तेरी तबस्सुम की मिठास से भरा है मेरा हर पल,
तेरे साथ हर दिन है खुशगवार, हर सुबह है उज्जवल।

वो होंठों की हल्की सी हरकत, वो आँखें नमकीन,
तेरी तबस्सुम है सबसे प्यारी, सबसे रंगीन।

हर दर्द की दवा, हर मर्ज का इलाज,
तेरी तबस्सुम है मेरा सबसे अनमोल ताज।

तेरी तबस्सुम से मिलती है मुझको नई उड़ान,
हर मुश्किल को पार करने का मिलता है अरमान।

चाहे कितनी भी हो दूरियाँ, चाहे कितने भी फासले,
तेरी तबस्सुम हमेशा मेरे दिल में मुस्कुराती रहे।

"मुस्कुराहट वो खूबसूरत गहना है, जो हर चेहरे पर सजता है।" ✨

🔗 और अधिक शायरी के लिए, यहाँ देखें: मनमोहक मुस्कान शायरी | खुशी पर आधारित कविताएँ

Friday, June 12, 2026

Lab (लब)

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लबों की शायरी: खूबसूरत अहसास

मधुर और दिलकश लम्हे जो बयां करते हैं लबों का जादू

तुम्हारे लबों पे हंसी हो सदा, यही है दुआ मेरी,
चाहे कितनी भी हो दूरियां, पूरी हो हर खुशी तेरी।

जब भी देखता हूं मैं तेरे लबों को मुस्कुराते हुए,
भूल जाता हूं गम सारे, दिल झूम उठता है गाते हुए।

उनकी खामोशी भी कुछ कह जाती है, जब लब उनके हिलते हैं,
न जाने कितने राज़, उनकी नज़र में मिलते हैं।

तेरी लबों की लाली, जैसे शाम की सूरज की रोशनी,
देखूं तो लगे हर शाम, जैसे कोई नई कहानी।

उनके लबों से जो निकली बात, वो दिल में उतर गई,
सारी दुनिया की दौलत, उस पल में बिखर गई।

खामोश लबों की कहानी, कभी समझ न पाए हम,
कुछ अनकहे अल्फाज, बन गए दिल के गम।

क्या जादू है तेरे लबों में, जो हर बात मीठी लगती है,
तेरे लफ्जों की खुशबू, रूह में समाती है।

जब भी तेरे लबों पे आता है मेरा नाम,
लगता है जैसे पूरा हो गया मेरा हर काम।

तेरे लबों की तारीफ में क्या लिखूं, अल्फाज़ कम पड़ जाएंगे,
तेरी एक मुस्कान पे, हजारों दिल मर जाएंगे।

कुछ कहा नहीं, पर लबों पे हंसी सजा ली थी,
इशारों ही इशारों में, दिल की बात बता दी थी।

वो चुप रहे, उनके लबों पे कोई बात न थी,
मगर उनकी आंखें, हजारों दास्तां कह रही थी।

कैसे बताऊं तुम्हें, क्या असर है तेरे लबों का,
जो भी छू ले इन्हें, दीवाना हो जाए रब का।

तेरे लबों की ये ख़ामोशी, कभी-कभी चुभ जाती है,
कोई बात कह दो, ये धड़कन सहम जाती है।

बस एक बार तेरे लबों से निकले मेरा नाम,
तो समझूं पूरी हो गई हर सुबह और शाम।

तेरे लबों की नरमी, जैसे गुलाब की पत्ती हो,
जिसे छूते ही दिल में, एक अलग सी मस्ती हो।

इंतज़ार है उस दिन का, जब लबों पे तेरा नाम होगा,
मेरी हर सांस में, बस तेरा ही पैगाम होगा।

शराब की क्या ज़रूरत, जब तेरे लब इतने नशेले हैं,
इनमें खो जाएं तो, होश भी खो बैठेले हैं।

अदाएं तेरी कातिल, और लब तेरे शराब,
तेरी एक झलक से, मिट जाए हर अज़ाब।

तेरी लबों की ये मुस्कान, है दुनिया की सबसे हसीन चीज़,
देखूं तो लगे हर पल, जैसे कोई नई तफ्तीश।

जब भी तेरे लबों पे आती है कोई बात,
लगता है जैसे थम जाए हर रात।

लब उनके, जैसे दो पंखुड़ियां गुलाब की,
खुशबू से भर दें हर साँस मेरी, हर सुबह की।

तेरी लबों की खामोशी में भी, एक शोर है,
जो मेरे दिल को, तेरी तरफ खींचे और है।

काजल से भरी आँखों में, एक नमी सी है,
लबों पे तेरे मुस्कान, फिर भी एक कमी सी है।

क्या हसीन मंज़र है, जब लबों से बात निकलती है,
हर अल्फाज़ में, प्यार की खुशबू महकती है।

तेरे लबों पे वो तिल, जैसे कोई गहरा राज़ हो,
जिसे पढ़ने की चाहत में, मेरा दिल बेताब हो।

कैसे बयान करूं, तेरे लबों की वो शोखी,
जो हर पल मेरे दिल में, नई आग भड़की।

तेरे लबों से जो निकले, वो हर लफ्ज़ अनमोल है,
जैसे कोई मोती, जिसे दुनिया ढूंढती गोल है।

लबों को मेरे छू कर, तुमने कर दिया बेताब,
अब हर पल मांगू, तेरी मोहब्बत का हिसाब।

उनकी लबों की वो हंसी, जो दिल में बस जाए,
कोई और खुशी, फिर क्या भाए।

मेरे लबों पे हमेशा, तेरा ही नाम रहता है,
हर सांस में मेरी, बस तेरा ही प्यार बहता है।

ये लबों की बातें नहीं, दिल की गहराई है,
जिसे समझना चाहो तो, हर बात में सच्चाई है।

उनके लबों पे जो खिलती है मुस्कान,
बन जाती है वो मेरे जीवन की पहचान।

कभी लबों पे होती है खामोशी, कभी गीत,
तेरी यादों में रहते हैं, हम हर पल फना दिल के मीत।

वो लब जब खुलते हैं, तो फूल बरसते हैं,
उनकी बातों से, दिल के बाग़ महकते हैं।

ये लबों का जादू है, जो मुझ पे छा गया है,
तेरी मोहब्बत में, मेरा दिल बहक गया है।

जब से देखा है तेरे लबों को, मेरे होश उड़ गए,
लगता है जैसे मैं, सारी दुनिया से बिछड़ गए।

तेरी लबों की छुअन से, हर ज़ख्म भर जाए,
तेरी एक मुस्कान पे, ये दिल मर जाए।

लबों पे उनके हमेशा, एक बात अधूरी रहती है,
इंतज़ार में उनके, मेरी रात अधूरी रहती है।

दिल का सुकून है उनके लबों की हंसी,
जो देखे एक बार, वो हो जाए बेबस ही।

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Thursday, June 11, 2026

Ghaisu (गैसूर)

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हुस्न-ए-गैसूर: एक काव्यात्मक सफर

केसुलों की मदहोश कर देने वाली खूबसूरती पर 30 से अधिक शायरियां

तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा जब भी लहराती है,

दिल में मेरे एक तूफानी सी हलचल मचाती है, ऐ मेरे गैसूर।

रुख पर जो बिखरे हैं तेरे काले गैसूर,

देखकर उन्हें हर दिल हो गया मजबूर।

शब-ए-हिज्र में याद आते हैं तेरे गैसूर,

दिल की तन्हाई में बन जाते हैं वो नूर।

हवा से खेलती जब तेरी लटें आती हैं,

खुशबू बिखेरकर दिल को मेरे महकाती हैं, ये तेरे गैसूर।

इन गैसूर की कसम, हमने वफा की है,

हर सांस तेरी यादों से हमने भरी है।

अदा से जब तू अपने गैसूर संवारती है,

कायनात की हर शय तुझपे वारी जाती है।

जैसे बादल घने छाए हों घटा बनकर,

वैसे ही तेरा गैसूर है छाया मेरे दिल पर।

तेरी गैसूर की छाँव में सुकून मिलता है,

इस दुनिया के हर गम से दिल को राहत मिलती है।

पलकें झुकीं, और बिखर गए गैसूर तेरे,

लुट गए हम, और बस हो गए तेरे।

रेशम से भी नरम हैं ये तेरे गैसूर,

छूकर इन्हें दिल होता है चूर-चूर।

जब भी तू अपनी लटों को झटकती है,

कयामत सी एक अदा सब पर बरसती है।

तेरी ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीर में हम कैद हुए,

इस कैद से रिहाई की ना कोई ख्वाहिश हुई, तेरे गैसूर।

ये बल खाती लटें, ये तेरे गैसूर गहरे,

इन्हीं में उलझ कर हम खो गए हैं तेरे।

शबनमी बूंदों सी चमक है तेरे गैसूर में,

हर बूंद में एक नशा है, एक सुकून है।

छिप जाते हैं चाँद तारे तेरे गैसूर में,

जब तू रात को अपनी लटें खोलती है खुले में।

काले नाग सी बल खाती हैं तेरी लटें,

इनकी छाया में हम खो जाते हैं, तेरे गैसूर।

तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में हम जन्नत देखते हैं,

हर धड़कन में बस तुझे ही सोचते हैं, तेरे गैसूर को।

जब तू अपनी ज़ुल्फ़ों को आज़ाद करती है,

सारा आलम तेरी खूबसूरती पर मरता है, तेरी गैसूर पर।

इन गैसूर के साए में हम दुनिया भूल जाते हैं,

हर पल तेरी याद में डूबे रहते हैं।

तेरे गैसूर का हर पेच एक कहानी कहता है,

दिल मेरा हर कहानी को सुनता रहता है।

घटा बनकर छाए हैं तेरे गैसूर गाल

Wednesday, June 10, 2026

Zulf (ज़ुल्फ़)

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ज़ुल्फ़: काली घटा सी, रेशम सी

मोहब्बत और ज़ुल्फ़ों का गहरा रिश्ता

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन,
क्या रोज़ गरजते हो, बरस जाओ किसी दिन।

तेरी ज़ुल्फ़ों की छांव में दिल आराम पाता है,
हर लहराती लट पे दिल मेरा फिसल जाता है।

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक।

सोचा था हम ने आज सँवारेंगे वक़्त को,
अब हाथ में है ज़ुल्फ़, तो फिर ज़ुल्फ़ ही सही।

तेरी ज़ुल्फ़ें बिखर जाएं तो आफत लगती हैं,
और बांध ले तो कयामत लगती हैं।

किसने भीगे हुए बालों से ये छटका पानी,
झूम के आयी घटा टूट के बरसा पानी।

अपने सर इक बला तो लेनी थी,
मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है।

दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है,
कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है।

हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए,
उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए।

तेरी ज़ुल्फ़ों का हो यूं मिलकर सनम तुमसे,
रोने को जी चाहता है, तेरी ज़ुल्फ़ों के साए में सोने को जी चाहता है।

मुलायम हाथ, खम-ए-ज़ुल्फ़, अदा-ए-नैन और होंठ,
क़त्ल बाक़ी है, औज़ार तो सब पूरे हैं।

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई,
फिर फँसा ज़ुल्फ़ों में दिल फिर वही आफ़त आई।

तेरी ज़ुल्फ़ों की खुशबू ने हमें पागल कर दिया,
अब तो हर घड़ी बस तेरा इंतज़ार रहता है।

रुख़-ए-ताबाँ तो हुआ जाँ का ख़्वाहान पैदा,
दिल फँसाने को हुई ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ पैदा।

तेरी ज़ुल्फ़ भी सावन की घटा जैसी हैं,
बरसें ना बरसें, मगर दिल भीग जाता है।

घनी ज़ुल्फ़ों के साए में चमकता चाँद सा चेहरा,
तुझे देखूँ तो कुछ रातें सुहानी याद आती हैं।

माथे को चूम लूँ मैं ज़ुल्फ़ें बिखर ना जाएं,
इन लम्हों के इंतज़ार में ज़िंदगी ना गुज़र जाए।

तेरी खुली खुली सी ज़ुल्फ़ें इन्हें लाख तुम सँवारो,
इन्हें हम सँवारते तो कुछ और बात होती।

ज़ुल्फ़ों को दिया है रुख-ए-ज़ेबा ने अजब रंग,
जल्वों से तेरे और भी रौशन हुए साए।

मुखालिफ़ बाद-ए-सरसर में ज़रा लहराने दो ज़ुल्फ़ें,
इसी में हम वतन का अपने परचम देख लेते हैं।

निगाह से आसमान को देखना भी क्या ज़रूरी है,
तेरी ज़ुल्फ़ों में जानम कहकशां हम देख लेते हैं।

जम्अ' हुए रात की ख़ामोशी में यार सब,
कोई रो कर तो कोई ज़ुल्फ़ बना कर आया।

तेरी ज़ुल्फ़ों के अंधियारे में अपना शहर भूल आया मैं,
मैं वही शख्स हूँ जो तेरे दिल में अपना घर भूल आया।

हम ख़ाक तेरी ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ सँवारते,
हम से तो अपना हाल भी अच्छा नहीं हुआ।

ज़ाहिद ने मेरा हासिल-ए-ईमान नहीं देखा,
रुख़ पर तेरी ज़ुल्फ़ों को परेशां नहीं देखा।

ज़ुल्फ़ों की तो फितरत है लेकिन मेरे प्यारे,
ज़ुल्फ़ों से भी ज़्यादा बलखाए चलो हो।

तेरी ज़ुल्फ़ क्या सँवारी मेरी किस्मत निखर गई,
उलझनें तमाम मेरी दौलत में संवर गई।

तेरी ज़ुल्फ़ें जब हवा से उड़ती हैं,
कसम से दिल दीवाना हो जाता है।

वो राही हूँ पलभर के लिए, जो ज़ुल्फ़ के साए में ठहरा,
अब ले के चल दूर कहीं, ऐ इश्क़ मेरे बेदाग मुझे।

तेरी ज़ुल्फ़ों के साए में जीने का मज़ा कुछ और है,
तेरे बालों की खुशबू में बहने का नशा कुछ और है।

शब का मानज़र भी कयामत का हसीं है,
है तकिया कहीं, ज़ुल्फ़ कहीं, खुद वो कहीं हैं।

रुख़-ए-यार पे ये ज़ुल्फ़ें यूँ फिसल रही हैं,
कभी दिन निकल रहा है, कभी रात ढल रही है।

बेमौत हमको हुस्न से मारा ना कीजिए,
सरेआम यूं ज़ुल्फ़ सवारा न कीजिए।

बिजली ने सीख ली उनके तबस्सुम की अदा,
रंग ज़ुल्फ़ों की चुरा लाई है बरसात की घटा।

तेरा चेहरा चूम लेते हैं तुमने भी जालिम,
ज़ुल्फ़ों को सर पे चढ़ा रखा है।

ज़ुल्फ़ों से यूँ चेहरे को छुपाते क्यों हो,
शर्माते हो तो सामने आते क्यों हो।

छेड़ी है कभी लब को कभी रुखसारों को तुमने,
ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पर चढ़ा रखा।

रंज खुशी में बदल कर देख लो,
ज़ुल्फ़ यार में थोड़ा उलझ कर देख लो।

तेरी ज़ुल्फ़ों का साया जो चेहरे पे गिरता है,
दिल नहीं अब तो रुख तक महकता है।

तराशा है उनको बड़ी फुर्सत से,
ज़ुल्फ़ें जो उनकी बादल की याद दिला दे।

रात ढली, सुब्ह का मंजर भी क़यामत का हसीं है,
ज़ुल्फ़ कहीं, तकिया कहीं, और वो कहीं है।