Mazaar (मज़ार)
इश्क़ और इबादत: मज़ार की रूहानी दास्तान सुकून की पनाह तेरी चौखट पे सुकून मिलता है, ऐ दिल की बात कौन समझे, इस फ़ानी दुनिया में कहाँ मिलती है वो राहत, जो तेरे मज़ार पे है। मरहम-ए-दिल नज़र झुकती है, दिल को करार आता है, हर ज़ख़्म-ए-दिल का मरहम है ये तेरा मज़ार । नूरानी रौशनी दुआओं का सिलसिला यहाँ खत्म नहीं होता, रोशन रहता है हमेशा ये नूरानी मज़ार । खुदा की रहमत क्या माँगू उस खुदा से, जब सब कुछ मिल जाए, तेरी रहमतों से भर जाए मेरा ये मज़ार । यादों की महक हर शाम यहाँ एक नया चिराग जलता है, तेरी यादों से महकता ये प्यारा मज़ार । दिल को करार टूटे दिल लेकर आते हैं सब तेरी पनाह में, सुकून का पैगाम देता है ये तेरा मज़ार । ...