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Bekaar (बेकार)

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दिल की गहराइयों से: बेक़ार पर ३० शायरी शायरी 1 कुछ ख्वाब थे जो दिल में सजाये थे, तेरी बेरुखी ने सब को बेकार कर दिया। शायरी 2 हर कोशिश मेरी अब लगती है बेकार , जब से छोड़ा है तूने मेरा साथ, यार। शायरी 3 ज़िन्दगी के पन्ने पलट कर देखे हैं कई बार, तेरे बिना हर कहानी लगती है बेकार । शायरी 4 अकेलेपन की रातें, अब ये दिन भी क्या गिनूं, तेरी चाहत के बिना, सब कुछ है बेकार । शायरी 5 जो ना हो साथ तेरा, ये दुनिया भी क्या काम की, मेरी हर खुशी, हर पल, तेरे बिना है बेकार । शायरी 6 ...

Bezaar (बेज़ार)

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बेज़ार (Bezaar) शायरी संग्रह शायरी 1 ज़िन्दगी के इस सफर से, अब मैं बड़ा बेज़ार हूँ, ढूंढता हूँ सुकून जहाँ, हर पल इंतेज़ार हूँ। शायरी 2 तेरी बेरुखी ने किया है, मुझको इतना बेज़ार , अब तो अपने ही साये से भी, नहीं है मुझको प्यार। शायरी 3 इश्क़ की राहें थीं कभी हसीं, अब मैं हूँ उनसे बेज़ार , हर मोड़ पर मिली है ठोकर, अब नहीं है कोई करार। शायरी 4 ये दुनिया की रस्मों से, दिल अब है मेरा बेज़ार , हर चेहरे पर नक़ाब है, अब नहीं कोई एतबार। शायरी 5 ख़ामोशी से सुनता हूँ अब, हर बात को मैं बेज़ार , गहरे हैं कुछ ज़ख्म ऐसे, जिनसे नहीं है इंक़ार। ...

Roona (रोना)

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दिल को छू लेने वाली शायरी: रोना (Roona) अश्कों की ज़ुबान जब दिल में दर्द हद से गुज़र जाता है, तब अश्कों के सिवा कुछ नहीं आता है रोना । खामोश रातें खामोश रातों में तेरी याद सताती है, हर एक पल तेरी जुदाई मुझे रोना सिखाती है। ज़ख्मों का मरहम गहरे ज़ख्मों को कैसे भरें हम, आँखों से बस निकलता है रोना । तकदीर की मार तकदीर की लिखी को कौन मिटा पाया है, हमने हर मोड़ पर बस रोना ही पाया है। तन्हाई का साथी जब कोई न हो साथ तन्हाई में, तब दिल खोल कर जी भर के रोना अच्छा लगता है। टूटे हुए सपने ...

Aansu (आँसू)

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Aansu (आँसू) - दिल की गहराई से निकले अल्फ़ाज़ जब भी छलक जाते हैं ये आँसू पलकों से, कह जाते हैं अनकही बातें धड़कनों से। तेरी याद में बहते हैं मेरे ये आँसू हर शाम, जैसे दिल की ज़मीं पर बरसता हो कोई पैग़ाम। कभी खुशी के, कभी गम के, ये आँसू गवाह हैं, हर दर्द-ओ-जुदाई के ये सच्चे रहनुमा हैं। हर रात पलकों से गिरते हैं कुछ आँसू मेरे, जिनमें धुंधली सी तस्वीर है बस अब तेरे। ये आँसू नहीं, ये तो मेरे दिल के टुकड़े हैं, जो तेरी बेरुख़ी से आज टूटे पड़े हैं। लबों पर हँसी मगर आँखों में आँसू लिए फिरता हूँ, दर्द को छुपाकर भी तेरा...

Ashk (अश्क)

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अश्क (Ashk): दर्द और एहसास की गहराइयाँ लबों पर तबस्सुम, मगर आँखों में नमी है, कहने को तो सब है, पर तेरी कमी है, और बहते हैं मेरे अश्क । हर रात तन्हाई में तारे गिनते रहे, ज़िंदगी की हकीकत से हम भी डरते रहे, और छलके अश्क । वो कहते थे, कभी जुदा न होंगे हम, आज उन्हीं की याद में बहते हैं अश्क बेगम। क्या खूब कहा था किसी ने, वक़्त बेवफ़ा होता है, हमने भी खोया है सब कुछ, और हर रात अश्क रोता है। तेरे जाने के बाद, दिल वीरान सा है, हर धड़कन में तेरा नाम है, आँखों में अश्क का सैलाब सा है। कौन कहता है कि सिर्फ़ दर्द में रोते हैं, खुशी के लम्हों में भी तो अश्क बहते हैं। रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है, ज़रा सी बात पर ही बिख...

Marham (मरहम)

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मरहम (Marham): घावों पर प्यार की तासीर शायरी 1 ज़ख्म गहरे थे बहुत, दर्द भी था बेशुमार, तेरी मोहब्बत मिली, बन गई मेरा Marham (मरहम) यार। शायरी 2 टूटे हुए दिल को बस तेरी याद ही सहलाती है, हर दर्द का जैसे तू ही तो Marham (मरहम) बन जाती है। शायरी 3 लफ्ज़ नहीं मिलते, दर्द बयां कैसे करें, तेरी चुप्पी ही मेरे ज़ख्मों का Marham (मरहम) बन गई। शायरी 4 इश्क़ में जो चोट लगी, उसका निशां गहरा था, फिर तेरी एक झलक ही मेरा Marham (मरहम) ठहरा था। शायरी 5 दुनिया के सारे गम एक तरफ रख दो, तेरी हंसी ही मेरा सबसे बड़ा Marham (मरहम) है सुनो। ...