Maashooq (माशूक़)
दिलकश नज़ारे, महफ़िल-ए-इश्क़ और माशूक़ की बातें शायरी 1 आँखों में तुम्हारी, है एक जहान छुपा, मेरा दिल तो बस तुम्हारा, ऐ मेरी माशूक़ जान। शायरी 2 हर साँस में तुम हो, हर धड़कन में तुम्हारी याद, तुम ही तो हो मेरी ज़िंदगी, ऐ मेरी माशूक़ । शायरी 3 तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की छाँव में, खो जाऊँ मैं कहीं, बस यही है आरज़ू, ऐ मेरी माशूक़ हसीन। शायरी 4 शाम ढले जब तुम आती हो, दिल खिल जाता है, तुम्हारा दीदार ही तो है, ऐ मेरी माशूक़ , जीने का मक़सद। शायरी 5 तेरे लबों की हँसी, मेरी जान बन गई है, तुम बिन ये दुनिया, ऐ मेरी माशूक़ , वीरान हो गई है। ...