Barbaad (बर्बाद)
दर्द-ए-दास्तान: जब हर चीज़ हो जाए बर्बाद उजड़ी हुई बस्तियाँ तेरी मोहब्बत ने हमको कुछ यूँ कर दिया, के ख़ुद को भी हमने बर्बाद कर दिया। न चैन आया, न करार मिला कभी, बस तेरी यादों में ही हमने जीना सीख लिया। ख़्वाबों का टूट जाना जो देखे थे कभी हमने सुनहरे से ख़्वाब, आज वो सब के सब हैं बर्बाद से। किस्मत का खेल है या है कोई सज़ा, बस रह गई है दिल में एक अजीब सी याद। मोहब्बत की कीमत मोहब्बत की राह में लुटाया सब कुछ, और अंत में सिर्फ़ हुए बर्बाद । ये कैसा इश्क़ था, ये कैसी थी चाहत, जिसने हमें कर दिया हर ख़ुशी से आज़ाद। वक्त की मार वक्त की गर्दिशों ने क्या ख़ूब सितम ढाए,...