Jigar (जिगर)
जिगर (Jigar): हिम्मत और हौसले पर शायरी शायरी 1 तेरी बेवफाई का ज़हर पीकर भी, मैंने अपने जिगर (जिगर) को मजबूत रखा। शायरी 2 हर मुश्किल से लड़ जाने का हौसला, मेरे जिगर (जिगर) में ही तो है बसा। शायरी 3 दुनिया के रिवाजों से परे, इश्क़ करने का जिगर (जिगर) हर किसी में नहीं। शायरी 4 मोहब्बत की राह में काँटे हज़ार, चलने को चाहिए फौलादी जिगर (जिगर) यार। शायरी 5 तूफ़ानों से टकरा कर भी जो डरा नहीं, समझ लो उसका जिगर (जिगर) कभी मरा नहीं। शायरी 6 दर्द को हँसकर सह जाए जो, ...