Thursday, June 11, 2026

Ghaisu (गैसूर)

hindi shayari, हिंदी शायरी


हुस्न-ए-गैसूर: एक काव्यात्मक सफर

केसुलों की मदहोश कर देने वाली खूबसूरती पर 30 से अधिक शायरियां

तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा जब भी लहराती है,

दिल में मेरे एक तूफानी सी हलचल मचाती है, ऐ मेरे **गैसूर**।

रुख पर जो बिखरे हैं तेरे काले **गैसूर**,

देखकर उन्हें हर दिल हो गया मजबूर।

शब-ए-हिज्र में याद आते हैं तेरे **गैसूर**,

दिल की तन्हाई में बन जाते हैं वो नूर।

हवा से खेलती जब तेरी लटें आती हैं,

खुशबू बिखेरकर दिल को मेरे महकाती हैं, ये तेरे **गैसूर**।

इन **गैसूर** की कसम, हमने वफा की है,

हर सांस तेरी यादों से हमने भरी है।

अदा से जब तू अपने **गैसूर** संवारती है,

कायनात की हर शय तुझपे वारी जाती है।

जैसे बादल घने छाए हों घटा बनकर,

वैसे ही तेरा **गैसूर** है छाया मेरे दिल पर।

तेरी **गैसूर** की छाँव में सुकून मिलता है,

इस दुनिया के हर गम से दिल को राहत मिलती है।

पलकें झुकीं, और बिखर गए **गैसूर** तेरे,

लुट गए हम, और बस हो गए तेरे।

रेशम से भी नरम हैं ये तेरे **गैसूर**,

छूकर इन्हें दिल होता है चूर-चूर।

जब भी तू अपनी लटों को झटकती है,

कयामत सी एक अदा सब पर बरसती है।

तेरी ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीर में हम कैद हुए,

इस कैद से रिहाई की ना कोई ख्वाहिश हुई, तेरे **गैसूर**।

ये बल खाती लटें, ये तेरे **गैसूर** गहरे,

इन्हीं में उलझ कर हम खो गए हैं तेरे।

शबनमी बूंदों सी चमक है तेरे **गैसूर** में,

हर बूंद में एक नशा है, एक सुकून है।

छिप जाते हैं चाँद तारे तेरे **गैसूर** में,

जब तू रात को अपनी लटें खोलती है खुले में।

काले नाग सी बल खाती हैं तेरी लटें,

इनकी छाया में हम खो जाते हैं, तेरे **गैसूर**।

तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में हम जन्नत देखते हैं,

हर धड़कन में बस तुझे ही सोचते हैं, तेरे **गैसूर** को।

जब तू अपनी ज़ुल्फ़ों को आज़ाद करती है,

सारा आलम तेरी खूबसूरती पर मरता है, तेरी **गैसूर** पर।

इन **गैसूर** के साए में हम दुनिया भूल जाते हैं,

हर पल तेरी याद में डूबे रहते हैं।

तेरे **गैसूर** का हर पेच एक कहानी कहता है,

दिल मेरा हर कहानी को सुनता रहता है।

घटा बनकर छाए हैं तेरे **गैसूर** गाल

Wednesday, June 10, 2026

Zulf (ज़ुल्फ़)

ज़ुल्फ़: काली घटा सी, रेशम सी

मोहब्बत और ज़ुल्फ़ों का गहरा रिश्ता

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन,
क्या रोज़ गरजते हो, बरस जाओ किसी दिन।

तेरी ज़ुल्फ़ों की छांव में दिल आराम पाता है,
हर लहराती लट पे दिल मेरा फिसल जाता है।

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक।

सोचा था हम ने आज सँवारेंगे वक़्त को,
अब हाथ में है ज़ुल्फ़, तो फिर ज़ुल्फ़ ही सही।

तेरी ज़ुल्फ़ें बिखर जाएं तो आफत लगती हैं,
और बांध ले तो कयामत लगती हैं।

किसने भीगे हुए बालों से ये छटका पानी,
झूम के आयी घटा टूट के बरसा पानी।

अपने सर इक बला तो लेनी थी,
मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है।

दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है,
कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है।

हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए,
उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए।

तेरी ज़ुल्फ़ों का हो यूं मिलकर सनम तुमसे,
रोने को जी चाहता है, तेरी ज़ुल्फ़ों के साए में सोने को जी चाहता है।

मुलायम हाथ, खम-ए-ज़ुल्फ़, अदा-ए-नैन और होंठ,
क़त्ल बाक़ी है, औज़ार तो सब पूरे हैं।

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई,
फिर फँसा ज़ुल्फ़ों में दिल फिर वही आफ़त आई।

तेरी ज़ुल्फ़ों की खुशबू ने हमें पागल कर दिया,
अब तो हर घड़ी बस तेरा इंतज़ार रहता है।

रुख़-ए-ताबाँ तो हुआ जाँ का ख़्वाहान पैदा,
दिल फँसाने को हुई ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ पैदा।

तेरी ज़ुल्फ़ भी सावन की घटा जैसी हैं,
बरसें ना बरसें, मगर दिल भीग जाता है।

घनी ज़ुल्फ़ों के साए में चमकता चाँद सा चेहरा,
तुझे देखूँ तो कुछ रातें सुहानी याद आती हैं।

माथे को चूम लूँ मैं ज़ुल्फ़ें बिखर ना जाएं,
इन लम्हों के इंतज़ार में ज़िंदगी ना गुज़र जाए।

तेरी खुली खुली सी ज़ुल्फ़ें इन्हें लाख तुम सँवारो,
इन्हें हम सँवारते तो कुछ और बात होती।

ज़ुल्फ़ों को दिया है रुख-ए-ज़ेबा ने अजब रंग,
जल्वों से तेरे और भी रौशन हुए साए।

मुखालिफ़ बाद-ए-सरसर में ज़रा लहराने दो ज़ुल्फ़ें,
इसी में हम वतन का अपने परचम देख लेते हैं।

निगाह से आसमान को देखना भी क्या ज़रूरी है,
तेरी ज़ुल्फ़ों में जानम कहकशां हम देख लेते हैं।

जम्अ' हुए रात की ख़ामोशी में यार सब,
कोई रो कर तो कोई ज़ुल्फ़ बना कर आया।

तेरी ज़ुल्फ़ों के अंधियारे में अपना शहर भूल आया मैं,
मैं वही शख्स हूँ जो तेरे दिल में अपना घर भूल आया।

हम ख़ाक तेरी ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ सँवारते,
हम से तो अपना हाल भी अच्छा नहीं हुआ।

ज़ाहिद ने मेरा हासिल-ए-ईमान नहीं देखा,
रुख़ पर तेरी ज़ुल्फ़ों को परेशां नहीं देखा।

ज़ुल्फ़ों की तो फितरत है लेकिन मेरे प्यारे,
ज़ुल्फ़ों से भी ज़्यादा बलखाए चलो हो।

तेरी ज़ुल्फ़ क्या सँवारी मेरी किस्मत निखर गई,
उलझनें तमाम मेरी दौलत में संवर गई।

तेरी ज़ुल्फ़ें जब हवा से उड़ती हैं,
कसम से दिल दीवाना हो जाता है।

वो राही हूँ पलभर के लिए, जो ज़ुल्फ़ के साए में ठहरा,
अब ले के चल दूर कहीं, ऐ इश्क़ मेरे बेदाग मुझे।

तेरी ज़ुल्फ़ों के साए में जीने का मज़ा कुछ और है,
तेरे बालों की खुशबू में बहने का नशा कुछ और है।

शब का मानज़र भी कयामत का हसीं है,
है तकिया कहीं, ज़ुल्फ़ कहीं, खुद वो कहीं हैं।

रुख़-ए-यार पे ये ज़ुल्फ़ें यूँ फिसल रही हैं,
कभी दिन निकल रहा है, कभी रात ढल रही है।

बेमौत हमको हुस्न से मारा ना कीजिए,
सरेआम यूं ज़ुल्फ़ सवारा न कीजिए।

बिजली ने सीख ली उनके तबस्सुम की अदा,
रंग ज़ुल्फ़ों की चुरा लाई है बरसात की घटा।

तेरा चेहरा चूम लेते हैं तुमने भी जालिम,
ज़ुल्फ़ों को सर पे चढ़ा रखा है।

ज़ुल्फ़ों से यूँ चेहरे को छुपाते क्यों हो,
शर्माते हो तो सामने आते क्यों हो।

छेड़ी है कभी लब को कभी रुखसारों को तुमने,
ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पर चढ़ा रखा।

रंज खुशी में बदल कर देख लो,
ज़ुल्फ़ यार में थोड़ा उलझ कर देख लो।

तेरी ज़ुल्फ़ों का साया जो चेहरे पे गिरता है,
दिल नहीं अब तो रुख तक महकता है।

तराशा है उनको बड़ी फुर्सत से,
ज़ुल्फ़ें जो उनकी बादल की याद दिला दे।

रात ढली, सुब्ह का मंजर भी क़यामत का हसीं है,
ज़ुल्फ़ कहीं, तकिया कहीं, और वो कहीं है।

Nigaah (निगाह)

Nigaah (निगाह): An Ode to Gaze

Capturing Emotions Through the Lens of Nigaah

उसकी पहली निगाह ने ही दिल चुरा लिया।

तेरी निगाहों से ही शुरू हुई कहानी मेरी।

क्या खूब अदा थी, तेरी निगाह का जादू।

एक पल की निगाह ने उम्र भर का दर्द दे दिया।

जब से मिली निगाह तुझसे, चैन-ओ-करार गया।

ये निगाहें बोलती हैं, वो लब क्या बोल पाएंगे।

तेरी निगाहों में देखा है, मैंने सारा जहां।

बड़ी गहरी हैं तेरी निगाहें, डूब जाने को जी चाहे।

बस एक निगाह काफी है, हाल-ए-दिल बताने को।

निगाहों से घायल करके, तुम कहां चले गए।

उसकी निगाह में वो कशिश थी, जो कहीं और न थी।

तेरी निगाह का ये तीर, सीधा दिल में उतरा।

हर निगाह में छुपा है एक राज गहरा।

निगाहें मिलीं तो क्या हुआ, प्यार तो दिल से होता है।

निगाहें झुका के तूने, कमाल कर दिया।

कौन समझेगा निगाहों की जुबां, जब लब खामोश हों।

तेरी निगाह का असर, मेरे हर ख्वाब पर है।

वो निगाह जो हमें देखे, वो निगाह चाहिए।

क्या गजब की निगाह थी, जो हमें दीवाना कर गई।

मेरी हर निगाह तेरी निगाह का इंतजार करती है।

निगाहों से कह दो, थोड़ा संभल के देखें।

उसकी निगाह में एक सुकून था, एक अपनापन।

पहली निगाह में ही सब कुछ हार बैठे।

ये निगाहें ही तो हैं, जो दिल का आईना हैं।

जब-जब उठी तेरी निगाह, दिल बेकरार हुआ।

निगाहों की बातें निगाहें ही जानें।

Nazar (नज़र)

नज़र की बातें

दिल से निकली हर नज़र

झुकी झुकी नज़र तेरी कमाल कर जाती है, उठती है एक बार और सौ सवाल कर जाती है !!

ओ आँख चुरा के जाने वाले, हम भी थे कभी तेरी नज़रों में !!

हर नजर में मुमकिन नहीं है बे-गुनाह रहना, वादा ये करें कि खुद की नजर में बेदाग रहें।

जलने दे चिराग मुझे अँधेरे से डर लगता हैं, आँखे बंद भी करू तो उसका चेहरा नज़र आता है।

अल्फ़ाजो में ढूंढ़ता हूं तुम्हें, हकीकत में कहाँ तुम नज़र आते हो।

कुछ यूँ मिली नज़र उनसे बाकी सब नज़र अंदाज़ हो गए।

तेरी नज़र ने दिल में एक नई दुनिया बसा दी, मेरे हर ख्वाब को सच बना दिया।

तेरी नज़र से प्यार की महक आई, अब दिल में बस तेरा ही राग समाई।

तेरी नज़र से जो रोशनी मिली, मेरे अंधेरे दिल में तू ही तो समाई।

तेरी नज़र का असर अब सिर चढ़कर बोला, दिल ने कहा अब तुझे ही अपना बनाना है।

तेरी नज़र का जादू दिल पे छा गया, देखते-देखते ये दिल तेरा हो गया।

तेरी नज़र से जो नज़रें मिली, ज़िंदगी की राहें आसान सी लगीं।

तेरी नज़र का जादू दिल में उतर गया, हर ख्वाब तेरा मेरे ख्वाबों में बिखर गया।

तेरी नज़र ने ऐसा करिश्मा दिखा दिया, दिल ने तुझे खुदा से भी बढ़कर चाह लिया।

तेरी नज़र ने इश्क़ का पैगाम लिख दिया, मेरे दिल ने तेरा ही नाम लिख दिया।

नज़र से शुरू हुई थी जो कहानी, अब रूह तक उतर गई है वो रवानी।

वो पहली नज़र थी या कोई ख्वाब, दिल को यूं छू गया जैसे मीठा सा हिसाब।

तेरी नज़र से मिली जो ये पहचान, अब हर आइना भी तेरा दीदार मांगे जान।

झुकी नज़र में तेरा प्यार दिखा, दिल ने समझा, अब यह सफ़र तेरे साथ है।

झुकी नज़र में वो जादू था, जिसे दिल से चाहा, वो हासिल था।

झुकी नज़र ने जो किया असर, वो सदा दिल के अंदर रहेगा।

झुकी नज़र में एक राज़ था, जिसे दिल में छिपाने का साहस था।

तेरी एक नज़र ने दिल चुरा लिया, मैं देखता ही रह गया।

कहीं न उन की नज़र से नज़र किसी की लड़े, वो इस लिहाज़ से आँखें झुकाए बैठे हैं।

वो नज़र आता है मुझ को मैं नज़र आता नहीं, ख़ूब करता हूँ अँधेरे में नज़ारे रात को।

बे-तरह पड़ती है नज़र उन की, ख़ैर दिल की नज़र नहीं आती।

अच्छा तिरी नज़र में बहुत मुख़्तलिफ़ हूँ मैं, यानी तिरी नज़र में कोई दूसरा भी है।

नज़र चुरा के वो गुज़रा क़रीब से लेकिन, नज़र बचा के मुझे देखता भी जाता था।

हर चेहरे में आता है नज़र एक ही चेहरा, लगता है कोई मेरी नज़र बाँधे हुए है।

जिस सम्त नज़र जाए मेला नज़र आता है, हर आदमी इस पर भी तन्हा नज़र आता है।

नज़र नज़र से मिलाना कोई मज़ाक़ नहीं, मिला के आँख चुराना कोई मज़ाक़ नहीं।

तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते, इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते।

नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं, जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं।

नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही, नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही।

लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे, अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे।

गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए, हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है।

तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन नज़र दीवार पर जाती रहेगी।

एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर 'ताबिश', और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं।

मुझे ये नज़र आया के वो एक बला है, कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज-ए-अदा है।

तुझे देख कर ये जहाँ रंगीन नज़र आता है, तेरे बिना दिल को चैन कहां आता है।

नज़र भर देख ले जो वोह किसी को, नेकदिल इंसान की भी नियत हिला दे।

नज़रों को तेरे प्यार से इंकार नहीं है, अब मुझे किसी और का इंतज़ार नहीं है।

Nayan (नयन)

नयन: दिलकश शायरी का संगम

तेरे नयन जैसे गहरे समंदर, जिनमें डूब जाने को जी चाहता है।

पलकें झुकीं तो रात हुई, पलकें उठीं तो सुबह, क्या कहें इन नयन की अदा पर।

तेरे नयन की हर एक भाषा, मेरे दिल का हर राज़ जानती है।

इन मदहोश नयन ने, जाने कितनों को दीवाना बनाया है।

जब से देखा है तेरे नयन को, हर चेहरा बेगाना लगता है।

क्या जादू है तेरे नयन में, कि हर बार उन्हीं में खो जाता हूँ।

तेरी नयन की गहराई में, एक पूरा जहान छुपा है।

बिन कहे सब कह जाते हैं, ये खामोश नयन तेरे।

एक झलक तेरे नयन की, और दिल में इश्क़ की बारिश हो जाती है।

काश इन नयन का दामन, उम्र भर मेरे दामन में रहता।

तेरे नयन की गहराई, हर राज़ को बयान करती है, बिन बोले ही सब कहती है।

Tuesday, June 9, 2026

Chashm (चश्म)

चश्म: इश्क की ज़ुबान

तुम्हारी चश्म (चश्म) का हर नज़ारा, मेरे दिल में उतर जाता है,
हर बार जब तुम मुस्कुराती हो, मेरा हर गम बिखर जाता है।

इन गहरी चश्म (चश्म) में छुपा है एक समंदर गहरा,
मैं डूबना चाहता हूँ इसमें, पाकर तुम्हारा चेहरा।

जब से देखा है तुम्हारी चश्म (चश्म) का नूर,
हर शय बेनूर लगती है, हर शय बेकसूर।

तेरी चश्म (चश्म)-ए-मयगूं का हर इशारा, दीवाना बना देता है,
कौन कहता है शराब ज़रूरी है, जब ये जाम पिला देता है।

वो चश्म (चश्म)-ए-हया जो झुकती है, कमाल कर जाती है,
हज़ार बातें बिन बोले, वो बयान कर जाती है।

फ़लक भी हैरान है, चाँद भी परेशान है,
जब से देखा है तेरी चश्म (चश्म) में मेरा जहान है।

मेरी हर सुबह, मेरी हर शाम है, तेरी चश्म (चश्m),
इनमें ही अब मेरा आराम है, इनमें ही मेरा मुकाम है।

ये कौन सी कशिश है तेरी चश्म (चश्म) में,
हर पल खींचती है मुझे अपनी रूह की रस्म में।

अगर मेरी चश्म (चश्म) से देख सको तुम खुद को,
तो जान जाओगे कितना हसीन है तुम्हारा वजूद।

तेरी चश्म (चश्म) की हकीकत से कौन वाकिफ होगा,
इसमें तो मेरी हर खुशी, हर आरज़ू समाई है।

Monday, June 8, 2026

Aankhein (आँखें)

आँखें: दिल की ज़ुबान

तेरी आँखें समुंदर से गहरी, इनमें डूब जाने को दिल करता है।

एक नज़र जो उठाई तुमने, सारी दुनिया ठहर गई इन आँखों में।

तेरी आँखें नहीं, ये तो मेरे इश्क़ का आईना हैं।

खामोश रहती हैं ये आँखें, पर दिल की हर बात कह जाती हैं।

तेरी नशीली आँखें, हर रात ख्वाबों में आती हैं।

इन आँखों की चमक में ही, मेरी दुनिया रौशन है।

जब से देखा है तेरी आँखों को, कोई और नज़ारा भाता नहीं।

तेरी आँखों में डूबकर जाना, मोहब्बत लफ्ज़ों से ज़्यादा है।

कितनी मासूम हैं ये आँखें, पल भर में दिल जीत लेती हैं।

तेरी आँखों का जादू, हर मुलाकात को खास बना देता है।

ये आँखें जो कभी झुके नहीं, आज तेरे इंतज़ार में पलकें बिछाए बैठी हैं।