Pachtava (पछતાવા)
पछतावा (Pachtava): दिल से निकली हर आवाज़ कुछ फैसले गलत थे, कुछ राहें थीं अंजाने, अब उम्र भर दिल में रहा, बस पछतावा पुराने। वो वक्त जो हाथ से फिसला, वो बातें जो कही नहीं, हर शाम दिल में उठता है, एक गहरा पछतावा कहीं। तेरी हर बात को हमने अनसुना कर दिया था, अब तेरे जाने पर, बस पछतावा ही रह गया था। क्यों ना सुनी दिल की आवाज़, क्यों दिमाग की मानी हर बात, आज तन्हाई में घेरे है, एक कड़वा पछतावा दिन-रात। वो लम्हे जो यूँ ही खो गए, वो रिश्ते जो टूट गए, बस उन्हीं की याद में है, ये दिल पछतावा में डूबे। काश! कह देते वो बातें जो दिल में दबी थीं, आज ना होता इतना गहरा पछतावा , ना ये आंखें नम थीं। हर गलती का दामन थामे, चलता रहा ...