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Saturday, June 6, 2026
Adaa (अदा)
Friday, June 5, 2026
Gulaab (गुलाब)
गुलाब के रंग, प्यार के संग
गुलाब की तरह महकती है तेरी हर एक बात, तेरी यादों से रोशन होती है मेरी हर रात।
गुलाब की खुशबू सा तेरा एहसास, हर लम्हा दिल में जगाए प्यार की आस।
गुलाब के फूल सा तेरा नाम, जुबां पर आए तो मिल जाए आराम।
तेरा प्यार गुलाब की खुशबू बन जाए, मेरी हर सांस में बसता चला जाए।
गुलाब की तरह तुम भी नाज़ुक हो, और ख़यालों में हमेशा ताज़ा।
हाथ में गुलाब हो और साथ तुम, इस से खूबसूरत क्या ख़्वाब हो सकता है।
गुलाब की तरह तुम्हारा प्यार भी, जितना सहेजों उतना ही महकता है।
गुलाब की खुशबू जैसा प्यार, जो बिना कहे भी सब समझा दे।
जैसे गुलाब बिना शोर के महकता है, वैसे ही सच्चा प्यार खामोश होता है।
गुलाब की पंखुड़ियों में छुपा है इश्क़, जैसे तुम्हारे दिल में मेरी जगह।
Thursday, June 4, 2026
Rukhsaar (रुख़सार)
नूर-ए-रुख़सार पर शायरी
देखूँ जब भी इसे, दिल को मिलता आराम है।
नूर-ए-मोहब्बत है, मेरी हर साँस का करार।
जैसे खुल गया हो जन्नत का कोई नया द्वार।
सावन की पहली बारिश सी, मदहोश कर जाएँ।
हर लफ्ज़ में सिमट जाए, यह है तेरा सहारा।
इक ख़ूबसूरत हकीकत, नहीं कोई ख़्वाब-ओ-दीदार।
ऐसा जलवा कहीं देखा नहीं, हर ऐब से दूर।
हर गम, हर उदासी, पल भर में मिटा जाती है।
खुशबू फैल जाए ऐसी, मैं ढूँढूँ हर मोड़ को।
इश्क़ की हर अदा में, है तेरी ही महक।
इक तेरी झलक पे, मैं कर दूँ सब कुर्बान।
हर नक़्श में है जादू, हर अंदाज़ में प्यार।
Wednesday, June 3, 2026
Deedar (दीदार)
नज़र-ए-इश्क़: दीदार पर दिलकश शायरी
आप के दीदार के लिए दिल तरसता है,
आप के इंतज़ार में दिल तड़पता है।
मेरी आँखें और दीदार आप का,
या क़यामत आ गई या ख़्वाब है।
देखने के लिए सारा आलम भी कम,
चाहने के लिए एक चेहरा और उसका दीदार बहुत।
हर पल तेरे दीदार को तरसती हैं आँखें मेरी।
दीदार की तमन्ना कल रात रख रही थी,
ख़्वाबों की रह-गुज़र में शमएँ जला जला के।
क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख कर,
जलता हूँ अपनी ताक़त-ए-दीदार देख कर।
तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना,
मेरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना।
जो और कुछ हो तेरी दीद के सिवा मंज़ूर,
तो मुझ पे ख़्वाहिश-ए-जन्नत हराम हो जाए।
इलाही क्या खुले दीदार की राह,
उधर दरवाज़े बंद आँखें इधर बंद।
ये दिल प्यार के काबिल ना रहा, कोई भी इज़हार के काबिल ना रहा,
इस दिल में बस गयी दोस्ती आपकी, अब तो चाँद भी दीदार के काबिल ना रहा!
Tuesday, June 2, 2026
Noor (नूर)
नूर (Noor) की रोशनी में डूबे ख़्याल
तुम्हारे चेहरे का हर नक्श है ऐसा, जैसे खुदा ने अपनी पूरी कला से तराशा हो, ये कैसा नूर है जो हर अंधेरे को भी रोशन कर दे.
जब तुम मुस्कुराते हो, तो हर तरफ फैल जाती है एक नई सुबह, तुम्हारा नूर चाँद-तारों से भी ज़्यादा जगमगाता है.
मेरी दुनिया में सिर्फ तुम्हारी ही रोशनी है, हर पल, हर दिशा में, तुम्हारे इश्क का नूर मेरी रूह को सुकून देता है.
नज़रें मिलती हैं तो दिल में एक अजीब सी हलचल होती है, ये तुम्हारे चेहरे का नूर ही तो है जो जादू कर जाता है.
रात की गहराइयों में भी तुम्हारी याद का दिया जलता है, क्योंकि उसमें तुम्हारे नूर की एक चमक है.
फूलों में खुशबू, सितारों में चमक, सब फिके पड़ जाते हैं, जब सामने आता है तुम्हारे हुस्न का नूर.
हर सुबह तेरी याद के साथ आती है, हर शाम तेरे ख्वाबों से सजी, मेरा हर लम्हा तुम्हारे नूर से ही रौशन है.
दिल के हर कोने में बस तुम ही बसे हो, मेरी हर साँस में तुम्हारा नाम है, तुम्हारी आँखों का नूर ही मेरी ज़िन्दगी का पैगाम है.
कायनात की हर खूबसूरत चीज़ तुमसे ही बनी है, ऐसा लगता है, क्योंकि तुम्हारा नूर हर चीज़ को और भी हसीन बना देता है.
जिस दिन से तुम्हें देखा है, दिल को सुकून मिल गया है, तुम्हारे चेहरे का नूर मेरी ज़िन्दगी की हर अंधेरी राह को रोशन कर गया है.
Monday, June 1, 2026
Jamal (जमाल)
जमाल (Jamal) पर शायरी
तेरे चेहरे का हर नक्श एक मुकम्मल ग़ज़ल, क्या खूब बनाया है खुदा ने तेरा जमाल।
चांद भी शर्मा जाए देखकर तेरा रूप, तूने बिखेरा है हर सू अपने जमाल का अनूप।
निगाहें ठहर जाती हैं जहां तेरा दीदार हो, ऐसा दिलकश है तेरा जमाल, हर कोई फ़िदा हो।
हर अदा में तेरी एक नई बात है, तेरा जमाल तो जैसे एक रोशन रात है।
ये जो हँसी है लबों पर, ये आंखों की चमक, यही तो है तेरे हुस्न का जमाल, जिसकी हमें है ललक।
फूलों में खुशबू, सितारों में चमक, सब फीके हैं तेरे जमाल की बनिस्बत।
जबसे देखा है तेरा जमाल, तबसे दिल बेकरार है, तेरी हर अदा पर मेरी जान निसार है।
दुनिया की हर चमक फीकी लगे मुझे, जबसे नज़र आया है तेरा जमाल।
हर लफ्ज़ में बस तेरी तारीफें हों, कोई क्या बयान करे तेरे जमाल की हदें।
तेरी सादगी में भी एक अजब जमाल है, जो हर नज़र को अपनी ओर खींचता है हर हाल है।
Sunday, May 31, 2026
Husn (हुस्न)
हुस्न (Husn) पर शायरी
तुम्हारे हुस्न की तारीफ में क्या लिखूँ, कलम भी रुक गई, अलफ़ाज़ कम पड़ गए।
नज़रों ने जब देखा तुम्हारा हुस्न, चाँद भी शर्मा के बादलों में छुप गया।
तेरा हुस्न वो जादू है जो सर चढ़ के बोलता है, जो भी देखे बस तेरा ही हो लेता है।
हर अदा में है तेरी हुस्न की झलक, हर निगाह में है तेरी चाहत की चमक।
खुदा ने बख्शा है तुम्हें कमाल का हुस्न, जो देख ले एक बार, वो फिर कहीं और ना देखे।
तेरे हुस्न का चर्चा हर ज़ुबाँ पर है, तेरी सादगी भी एक कयामत है।
ये कौन आया कि निखर गया है हुस्न-ए-जहाँ, हर शै में अब तो है रंगीनियाँ हज़ार।
हुस्न को बेपर्दा न कर, कहीं आँखे जल न जाएँ, तेरी एक झलक से कई दिल मचले हैं।
तेरा हुस्न जैसे कोई हसीं ख्वाब हो, जिसे देखते ही हर आरजू पूरी हो जाए।
कयामत है तेरा हुस्न, कमाल है तेरी अदा, हम तो फ़ना हो गए तुझे देखते-देखते।
तेरी आँखों में हुस्न का समंदर है, और हम उसमें डूबने को तैयार हैं।