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Kafan (कफ़न)

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कफ़न (Kafan): शायरी का संग्रह शायरी 1 ज़िंदगी भर साथ देने का वादा किया था तुमने हमसे, और जाते-जाते हमें एक कफ़न भी न दिया। शायरी 2 मेरी कब्र पर आकर क्यों रोते हो यारों, जब ज़िंदा था तब तो एक कफ़न भी न दिया। शायरी 3 मौत की नींद सो रहा हूँ सुकून से अब, बेशक मेरे बदन पर अब कफ़न है। शायरी 4 तेरी याद में हम आज भी जीते हैं, बस फर्क इतना है कि अब तन पर कफ़न है। शायरी 5 इश्क़ में दिल तोड़ने वालों को क्या पता, एक दिन उन्हें भी कफ़न में लिपटाया जाएगा। शायरी 6 गरीब की मोहब्बत का मज़ाक मत उड़ाओ, उसके पास देने को बस एक कफ़न ही होता है। शायरी 7 जिस दिन मेरा जनाज़ा उठेगा, तुम्हें...

Janaza (जनाज़ा)

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जनाज़ा (Janaza) पर दिल छू लेने वाली शायरी शायरी 1 जब उठा मेरा जनाज़ा , सबने कहा रोना नहीं, कोई पूछे उससे, जिसने खोया सब कुछ, जीना नहीं। शायरी 2 मेरी मौत पर सब हैरान थे, मेरा जनाज़ा देखकर, ज़िन्दगी भर जो खामोश रहा, वो आज बोल पड़ा। शायरी 3 आज उसके दिल में भी मेरा ख़्याल आएगा, जब मेरा जनाज़ा उसकी गली से गुज़र जाएगा। शायरी 4 बड़ी ख़ामोशी से निकला मेरा जनाज़ा यार, कोई आंसू ना बहा, कोई आहट ना सुनी। शायरी 5 शायद अब उसे मेरी याद आए, मेरी क़द्र हो, जब मेरा जनाज़ा उसके घर के सामने से गुज़रे। श...

Qaza (क़ज़ा)

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क़ज़ा पर बेहतरीन शायरी का संग्रह शायरी 1 इश्क़ की राह में हर मोड़ पे मिलती है ज़ुदाई, अपनी ही तक़दीर से लड़ता रहा, जब आई क़ज़ा . शायरी 2 ज़िंदगी एक सफ़र है, और मौत है आख़िरी मुक़ाम, क़ज़ा जब भी आएगी, हँस कर करेंगे सलाम. शायरी 3 हर साँस तेरी अमानत है, हर लम्हा तेरा फ़ुर्मान, कब आएगी क़ज़ा , बस यही सोचता है इंसान. शायरी 4 उम्र भर की कमाई, पल भर में लुटा दी, तेरी एक निगाह से, मेरी क़ज़ा भी सज़ा दी. शायरी 5 क्या फ़र्क पड़ता है, जी कर या मर कर, जब क़ज़ा ही लिखी हो, तेरी याद में मर कर. शायरी 6 ज़िंदगी की उलझनें, सुलझती ही नहीं, कब आएगी वो घड़ी, जब आए क़ज़ा कहीं. शायरी 7 ना कोई आसरा, ना कोई ठिकाना है, हर पल तेरी क़ज़ा का इंतज़ार पुराना है. ...

Moat (मौत)

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मौत पर शानदार शायरी गहरे एहसास और ज़िन्दगी का सच शायरी 1: जीवन का अंत ज़िन्दगी की धूप-छाँव में, एक दिन तो ढलना है, मौत की राह पर, हर मुसाफ़िर को चलना है। शायरी 2: खामोशी की पुकार जब खामोशी आगोश में लेती है, तब क्या होता है, कहते हैं, वो पल मौत का, हर किसी का होता है। शायरी 3: सफ़र का अंजाम हर सफ़र का अंजाम, एक दिन ठहर जाना है, आख़िरकार हमें मौत की गोद में सो जाना है। शायरी 4: सच है ये मौत वो सच है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता, क़ब्र का रास्ता, कोई टाल नहीं सकता। शायरी 5: हर ज़ी को हर ज़ी को चखनी है, एक दिन मौत की कड़वाहट, ...

Bikhre (बिखरे)

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बिखरे अरमानों की दास्तान (Bikhre Armaanon Ki Daastaan) 1. टूटे दिल के टुकड़े टूटे दिल के टुकड़े, क्या समेटे कोई, यादें तेरी आज भी, हर तरफ़ बिखरे हुई। 2. ख्वाबों के रेशे ख्वाबों के रेशे, पलकों से गिरे, उम्मीदों के मोती, कहीं दूर बिखरे । 3. हवाओं में खुशबू हवाओं में खुशबू, तेरी याद की, मेरे लम्हों में तू, हर पल बिखरे । 4. रातों की तन्हाई रातों की तन्हाई, चाँदनी सी उदास, आँखों में आँसू, कहीं आज भी बिखरे । 5. रिश्तों की डोरें रिश्तों की डोरें, जो उलझी कभी, टूटे हुए पल, अब हर सू बिखरे । 6. किताबों के पन्ने किताबों के पन्ने, खाली से लगे, अल्फ़ाज़ मेरे, आज फिर बिखरे । 7. बचपन की गलियाँ ...

Toote (टूटे)

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टूटे दिल के अल्फाज़: गहराई से भरी शायरी टूटे ख़्वाबों की दास्ताँ हर रात जो ख़्वाब देखा, सवेरे वो सब टूटे , क्या पता था, अपनी किस्मत में बस आँसू ही थे घूटे। रिश्तों का बोझ कुछ रिश्ते थे कच्चे धागे से, छूते ही वो टूटे , क्या करें शिकायत उनकी, जो वादे करके रूठे। एतबार की दरार एतबार का शीशा था वो, एक पल में टूटे हज़ार टुकड़े, अब समेटे भी तो कैसे, हर टुकड़ा चुभता है दिल में। सपनों की कसक सपनों के महल थे बनाए, कब रेत की तरह टूटे , ख़बर ही न हुई, जब अपने ही अपनों से रूठे। दिल का मुआमला ये दिल भी क्या चीज़ है, अक्सर टूटे फिर भी धड़के, उम्मीद की किरण लिए, हर बार नया ख्व...

Na-umeedi (ना-उम्मीद)

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ना-उम्मीदी (Na-umeedi): उम्मीदों के टूटने पर हर राह में अब दिखती है बस ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) , जीवन के हर मोड़ पर बस यही कहानी है। जब से खोई है मंजिल की उम्मीद, हर तरफ, छा गई है रूह पर गहरी ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) की चादर। तारों भरी रात में भी अब कोई ख्वाब नहीं, हर सुबह बस मिलती है हमको ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । दिल में अब नहीं कोई चाहत, कोई आस, हर तरफ फैली है बस गहन ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । जो कभी रंगीन थे, अब बेरंग हैं वो दिन, ले आई है ये ज़िन्दगी कैसी ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) ! हर पल एक नया इम्तिहान, हर पल एक नई हार, बढ़ती जाती है मेरे अंदर ये ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । हौसले पस्त हुए, इरादे भी डगमगाए हैं, छा गई है मेरे मन पर अब ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । ...