Veeran (वीरان)
वीरान (Veeran) शायरी संग्रह दर्द-ए-वीरानी शहर की गलियों में भटकते हुए, हर मंज़र को देखा, पर दिल के अंदर झाँका तो, एक वीरान सा खंडहर देखा। घर का सूनापन जब से तुम गए हो, यह घर सूना हो गया है, हर कोना, हर चौखट, अब तो वीरान हो गया है। आँखों का समंदर मेरी आँखों में अश्कों का समंदर लहराता है, जब भी देखता हूँ, दिल का शहर वीरान नज़र आता है। महक भी उदास फूलों की महक भी अब चुभने लगी है, बाग़ तो हैं कई, पर रूह वीरान रहने लगी है। अफ़सोस की बात क्या खबर थी कि एक दिन ऐसा भी आएगा, महफिलें सजेंगी, पर दिल वीरान रह जाएगा। भीतर का खालीप...