Parda (पर्दा)
पर्दा (Parda) पर शायरी का खूबसूरत संग्रह नज़र का, दिल का, या हकीकत का... हर **पर्दा** कुछ कहता है। तेरी आँखों के पीछे का राज़ क्या है, क्यों रखा है तुमने अपनी अदा पर **पर्दा** सा? उठा दो अब ये चेहरे से नज़रों का **पर्दा**, कि दीदार को बेचैन है ये दिल-ए-बर्बाद सा। मोहब्बत में कहाँ होता है कोई **पर्दा**, ये तो नज़रों का खेल है, नज़र से नज़र का। वो चुपचाप से आते हैं और चले जाते हैं, जाने कौन से **पर्दे** में छुपे रहते हैं। इश्क़ की आग में जलकर भी वो महफूज़ रहे, आँखों पर उनके हया का **पर्दा** था। रूह से रूह का मिलना तो एक बहाना था, असल ...