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Khwaab (ख़्वाब)

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ख़्वाबों की दुनिया: एक शायरी संग्रह रात की गहराई में, एक नया ख़्वाब जगा, सुबह की किरणों सा, उम्मीदों का रंग भरा। पलकों तले छुपा है, एक अनमोल ख़्वाब मेरा, जीने की हर वजह है, यही तो संसार मेरा। टूटे हुए तारों सा, बिखर गया वो ख़्वाब , फिर भी दिल में है आस, लौट आएगा वो आफताब। हर रात आँखों में, सजता है तेरा ख़्वाब , कैसे कहूँ तुझसे, क्या है मेरा जवाब। कभी सच न हो पाया, वो प्यारा सा ख़्वाब , फिर भी आँखों में बसा है, वो अधूरा नक़ाब। तेरी यादों के भंवर में, डूबा मेरा ख़्वाब , हर पल तेरी चाहत, यही मेरा अज़ाब। ...

Reza (रेज़ा)

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रेज़ा रेज़ा इश्क़: बिखरते एहसासों का सफर तेरी यादों के टुकड़े आज भी बिखरे हैं, दिल के हर रेज़ा में, तुम ही तो ठहरे हैं। मोहब्बत काँच सी थी, टूटी जब ज़माने में, हर एक रेज़ा चुभता है, अब इस फ़साने में। खामोशी जब दिल में शोर मचाती है, तो हर रेज़ा जुदा होकर बिखर जाता है। ख्वाबों की दुनिया थी, पल भर में ढह गई, हर इक रेज़ा में सिर्फ़ तेरी कमी रह गई। टूटे हुए तारों से मांगी थी दुआ कभी, आज दिल का हर रेज़ा वही कहानी कहता है। जब बिखरे जज़्बात, तो संभाले नहीं संभले, हर एक रेज़ा ने एक नया ग़म उछाला है। ...

Tukde (टुकड़े)

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ज़िंदगी के टुकड़े : दर्द, इश्क़ और उम्मीदें 1. दिल के टुकड़े मेरे दिल के हुए टुकड़े हजार, हर टुकड़ा याद दिलाता है तेरा प्यार। 2. शीशे से टूटे शीशे सा दिल मेरा, जो पल भर में टूट गया, बिखरे पड़े हैं टुकड़े , हर कहीं अब लूट गया। 3. यादों के टुकड़े तेरी यादों के टुकड़े समेटता फिरता हूँ मैं, हर टुकड़े में तुझे ही तो ढूँढ़ता फिरता हूँ मैं। 4. खवाबों के टुकड़े मेरे खवाबों के टुकड़े बिखर गए कुछ इस तरह, जैसे टूटे हुए तारे, अब नहीं मिलती कोई राह। 5. बिखरे अरमान टूटे अरमानों के टुकड़े लेकर, जी रहे हैं हम, क्या कहें इस ज़िंदगी से, बस यही है गम। 6. वफ़ा के टुकड़े वफ़ा के टुकड़े भी क्या कमाल के थे, जो तुम चले गए, तो हर...

Toatna (टूटना)

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टूटना: दिल के टुकड़े और रिश्तों की दास्तान हृदय का दर्पण दिल का आईना जब कभी टूटना चाहे, समझ लेना कि अब कुछ नया है लिखने को। नाज़ुक डोर रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है, एक ज़रा सी खरोंच से भी वो टूटना चाहे। ख़्वाबों का महल ख़्वाबों का महल पल भर में गिर जाता है, जब हकीकत से सामना हो और दिल टूटना चाहे। ख़ामोशी की दीवारें ख़ामोशी की दीवारें भी कभी-कभी गिर जाती हैं, जब अंदर का शोर हद से ज़्यादा टूटना चाहे। भरोसे का कांच भरोसा एक कांच की तरह होता है, एक बार जो टूटना शुरू हो, फिर जुड़ता नहीं। रेत के वादे ...

Manana (मनाना)

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मनाना (Manana): दिल की गहराइयों से शायरी 1 रूठे हुए दिल को, हम रोज़ मनाना (मनाना) चाहते हैं, जो ख़फ़ा है हमसे, उसे प्यार से बुलाना चाहते हैं। शायरी 2 ज़िंदगी की उलझनों में, खुद को कभी मनाना (मनाना) भी ज़रूरी है, कुछ पल अपने लिए, खुशियों से सजाना भी ज़रूरी है। शायरी 3 हर छोटी बात पर, तुम रूठ जाते हो हमसे, कितनी मुश्किल है हर बार, तुम्हें मनाना (मनाना) । शायरी 4 कोई रूठा है अगर, तो उसे जा कर मनाना (मनाना) सीखो, रिश्ते अनमोल होते हैं, ये बात तुम जानना सीखो। शायरी 5 जब रूठ जाए किस्मत भी, तो खुद को मनाना (मनाना) पड़ता है, गिर कर उठना पड़ता है, फिर से मुस्कुराना पड़ता है। शायरी 6 कभी-कभी अपनों को, थोड़ा सा मनाना (मनाना) पड़ता है, प्यार के धागे कमज़ोर न पड़ें, इसलिए झुकाना पड़ता है। शायरी 7 रूठने का हक़ है तुम्हे...

Roothna (रूठना)

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रूठना-मनाना: दिल के एहसास एक ख़ूबसूरत शायरी संग्रह शायरी 1 तेरा यूँ बेवजह रूठना , हमें अच्छा नहीं लगता, कभी सोचो तो सही, दिल कितना सहता है। शायरी 2 माना कि रूठना हक है तेरा हम पर, मगर हर बार मनाना, कब तक मुमकिन है? शायरी 3 तेरा रूठना भी एक अदा है, क्या करें, हम तो इस अदा पर भी जान छिड़कते हैं। शायरी 4 कितना मुश्किल है तुझे मनाना, जब तू रूठना चाहे, पर तेरे बिना जीना, उससे भी ज़्यादा मुश्किल है। शायरी 5 कभी तो समझो हमारी भी चाहत को, मेरे हमदम, हर बार तुम्हारा रूठना , दिल तोड़ जाता है। ...

Khafgi (ख़फ़गी)

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ख़फ़गी (Khafgi): दिल की गहराइयों से निकलीं शायरियां कुछ अनकही सी बातों में, है तेरी आज भी ख़फ़गी , लबों पर हँसी मगर, आँखों में है आज भी उदासी। मेरी हर बात पे वो, रूठ जाते हैं अक्सर, कहाँ जाए ये दिल, जब प्यार में हो इतनी ख़फ़गी । इश्क़ में इतना भी, खुदगर्ज ना बनो यारों, के टूट जाए रिश्ते, बस एक छोटी सी ख़फ़गी से। तेरी आँखों की गहराई में, एक अजीब सी बात है, प्यार भी दिखता है, और छुपी है तेरी ख़फ़गी भी साथ है। माना कि थोड़ी सी, नाराज़गी है तुमको हमसे, मगर दूर ना जाना, इस छोटी सी ख़फ़गी के वास्ते। किस बात की है ये, इतनी लंबी ख़फ़गी , ...