Kafan (कफ़न)
कफ़न (Kafan): शायरी का संग्रह शायरी 1 ज़िंदगी भर साथ देने का वादा किया था तुमने हमसे, और जाते-जाते हमें एक कफ़न भी न दिया। शायरी 2 मेरी कब्र पर आकर क्यों रोते हो यारों, जब ज़िंदा था तब तो एक कफ़न भी न दिया। शायरी 3 मौत की नींद सो रहा हूँ सुकून से अब, बेशक मेरे बदन पर अब कफ़न है। शायरी 4 तेरी याद में हम आज भी जीते हैं, बस फर्क इतना है कि अब तन पर कफ़न है। शायरी 5 इश्क़ में दिल तोड़ने वालों को क्या पता, एक दिन उन्हें भी कफ़न में लिपटाया जाएगा। शायरी 6 गरीब की मोहब्बत का मज़ाक मत उड़ाओ, उसके पास देने को बस एक कफ़न ही होता है। शायरी 7 जिस दिन मेरा जनाज़ा उठेगा, तुम्हें...