Ghazala (ग़ज़ाला)
अल्फाज़-ए-हुस्न: ग़ज़ाला की रुहानी शायरी नज़्म-ए-शब उसकी चाल में वो जादू था, जैसे कोई ग़ज़ाला , दिल मेरा बहक उठा, खो बैठा हर किनारा. आशिक़ाना अंदाज़ नज़र मिली तो जैसे ठहर गया ज़माना, मेरी आँखों में बस गई, वो मेरी ग़ज़ाला . तेरी अदा हर अदा पर तेरी हम दिल लुटाए बैठे हैं, तू है मेरी ग़ज़ाला , ये ज़माना कहता है. वीरानियाँ जहाँ तू नहीं, वो जगह वीरान लगती है, मेरी रूह की राहबर है तू, मेरी ग़ज़ाला . दिल की धड़कन ...