Bindiya (बिंदिया)
बिंदिया: माथे का चाँद, सौंदर्य का अनुपम साज शायरी 1 माथे पर सजी तेरी, क्या खूब लगती है, तेरी यह बिंदिया (बिंदिया) , चाँद सी चमकती है। शायरी 2 एक छोटा सा नन्हा तारा, माथे पे जगमगाए, तेरी काली बिंदिया (बिंदिया) , हर दिल को भाए। शायरी 3 लाल रंग की बिंदिया (बिंदिया) , तेरी अदा निराली है, लगता है जैसे चाँद ने अपनी जगह बदली है। शायरी 4 तेरी बिंदिया (बिंदिया) की रोशनी, दिल में समा गई, जैसे अँधेरी रात में कोई लौ जल गई। शायरी 5 सादगी में भी छुपा, एक अनोखा जादू है, तेरी माथे की बिंदिया (बिंदिया) , हर अदा पर काबू है। ...