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Na-umeedi (ना-उम्मीद)

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ना-उम्मीदी (Na-umeedi): उम्मीदों के टूटने पर हर राह में अब दिखती है बस ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) , जीवन के हर मोड़ पर बस यही कहानी है। जब से खोई है मंजिल की उम्मीद, हर तरफ, छा गई है रूह पर गहरी ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) की चादर। तारों भरी रात में भी अब कोई ख्वाब नहीं, हर सुबह बस मिलती है हमको ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । दिल में अब नहीं कोई चाहत, कोई आस, हर तरफ फैली है बस गहन ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । जो कभी रंगीन थे, अब बेरंग हैं वो दिन, ले आई है ये ज़िन्दगी कैसी ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) ! हर पल एक नया इम्तिहान, हर पल एक नई हार, बढ़ती जाती है मेरे अंदर ये ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । हौसले पस्त हुए, इरादे भी डगमगाए हैं, छा गई है मेरे मन पर अब ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । ...

Mayusi (मायूसी)

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मायूसी (Mayusi): दिलों की गहराइयों से निकलीं 30 शायरियां शायरी 1 ज़िंदगी की राहों में कभी-कभी ऐसा भी होता है, हर तरफ छा जाती है गहरी सी मायूसी । शायरी 2 हर खुशी से रूठ कर बैठी है मेरी तकदीर, दिलों में घर कर गई है ये मायूसी की ज़ंजीर। शायरी 3 उम्मीदों के दीपक बुझ से गए हैं सारे, हर तरफ पसरी है अब बस मायूसी के नज़ारे। शायरी 4 हँसते हुए चेहरे के पीछे, एक दर्द गहरा है, ये मायूसी ही तो है, जिसने मुझको घेरा है। शायरी 5 रात की तन्हाई में, अक्सर वो दस्तक देती है, मेरी आँखों से टपकती हुई ये मायूसी । शायरी 6 ...

Zulmat (ज़ुल्मत)

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ज़ुल्मत (Zulmat): रोशनी की तलाश में शायरी 1 शहर की हर गली में है इक अजीब सी खामोशी, घेर लेती है हर तरफ से ये ज़ुल्मत हमारी। शायरी 2 आँखों में कैद है वो एक अधूरी ख्वाहिश, कैसे मिटाऊँ दिल से ये ज़ुल्मत की बारिश। शायरी 3 उम्मीद की एक किरण भी नज़र नहीं आती, घनेरी रात में छाई है ये कैसी ज़ुल्मत । शायरी 4 तेरे जाने से दिल में जो खालीपन आया, उसकी परछाईं बन गई है ये ज़ुल्मत । शायरी 5 सूरज की किरणें भी अब चुभने लगी हैं, हर रोशनी में दिखती है मुझे ज़ुल्मत । शायरी 6 ...

Andhera (अंधेरा)

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अंधेरे पर अनमोल शायरी का संग्रह शायरी #1: आशा की किरण जब घिर जाए ज़िंदगी में घना अंधेरा , छोटी सी उम्मीद ही बन जाती है सवेरा। शायरी #2: खामोशी की ज़ुबान खामोशी में भी कितना कुछ कह जाता है अंधेरा , हर दर्द, हर राज़ को छुपा जाता है गहरा। शायरी #3: रात का साथी सितारों की महफ़िल में भी छाया है अंधेरा , रात की खामोशी का है ये गहरा बसेरा। शायरी #4: डर और शांति कभी डर लगता है इस घने अंधेरे से, कभी सुकून भी मिलता है इसके घेरे से। शायरी #5: आत्मा का सफर दिल की गहराइयों में भी एक अंधेरा रहता है, जहाँ हर इंसान अपनी रूह से मिलता है। ...

Taareek (तारीक)

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तारीक (Taareek) पर शानदार शायरी ज़िन्दगी की राहों में, जब छा जाए तारीक रात, कौन जलाए उम्मीद का दिया, दे कौन सहारा साथ। मेरी आँखों में अक्स है, गुज़री हुई हर तारीक का, दर्दों की कहानी है, मेरी हर इक आह का। कुछ ऐसे लम्हे होते हैं, जो बन जाते हैं तारीक , मिटाना चाहो भी तो, रहते हैं दिल के करीब। शामें तारीक सही, पर सहर तो आएगी, गम न कर ऐ दिल, रोशनी लौट आएगी। लिख दी है किस्मत ने मेरी, हर एक पल को तारीक , खुशियों की तलाश में भटकता है यह फकीर। जब भी पलटकर देखता हूँ, अपनी तारीक को, मिलते हैं कुछ घाव गहरे, कुछ भूले हुए रिश्तों को। यह रात कितनी तारीक है, सितारों से भी पूछो, उन्हें भी नहीं दिखती राह, जो मैंने खोजी तुम बिन। इश्क़ की हर गली, हर मोड़ अब तारीक है, तेरी जुदाई का गम, दिल को बहुत बारीक है। क्या पता था कि दिन ढलते ही, सब हो...

Dhund (धुंध)

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धुंध (Dhund) पर बेमिसाल शायरी धुंध की चादर आज फिर शहर में छाई है धुंध गहरी, तेरी यादों ने भी कर दी है कुछ ऐसी पहरी। नज़रों की धुंध आँखों में छाई है कैसी ये धुंध , जो नज़र आए तुम, तो मिट जाए हर बंद। राहों की धुंध रास्ते गुम हुए, हर सू है धुंध का साया, मन में फिर क्यों तेरी यादों का बसेरा आया। दिल की धुंध ये दिल में कैसी धुंध है, जो छाई हुई है, ख़ामोशी की चादर में कुछ आवाज़ दबी हुई है। सुबह की धुंध सु...

Fareb (फ़रेब)

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फ़रेब (Fareb) पर बेहतरीन शायरी का संग्रह शायरी 1: दिल की दास्तान मुस्कुरा कर उसने हमसे कुछ यूँ बात की, हमें लगा इश्क है, पर वो तो एक फ़रेब की रात थी। शायरी 2: आईने का सच आईने में देखा तो अपना ही अक्स दिखा, पर लोगों ने बताया वो तो सिर्फ़ फ़रेब था। शायरी 3: वादों की ज़ुबान तेरे वादों पर यकीं करना मेरी भूल थी, तेरी हर बात में छिपी एक फ़रेब की धूल थी। शायरी 4: इश्क़ की राह इश्क़ की राह में अक्सर हमने ये देखा है, सच्ची मोहब्बत के पीछे ही फ़रेब का चेहरा है। ...