Marham (मरहम)
मरहम (Marham): घावों पर प्यार की तासीर शायरी 1 ज़ख्म गहरे थे बहुत, दर्द भी था बेशुमार, तेरी मोहब्बत मिली, बन गई मेरा Marham (मरहम) यार। शायरी 2 टूटे हुए दिल को बस तेरी याद ही सहलाती है, हर दर्द का जैसे तू ही तो Marham (मरहम) बन जाती है। शायरी 3 लफ्ज़ नहीं मिलते, दर्द बयां कैसे करें, तेरी चुप्पी ही मेरे ज़ख्मों का Marham (मरहम) बन गई। शायरी 4 इश्क़ में जो चोट लगी, उसका निशां गहरा था, फिर तेरी एक झलक ही मेरा Marham (मरहम) ठहरा था। शायरी 5 दुनिया के सारे गम एक तरफ रख दो, तेरी हंसी ही मेरा सबसे बड़ा Marham (मरहम) है सुनो। ...