Majboori (मजबूरी)
मजबूरी (Majboori) पर दिल छू लेने वाली शायरी Shayari 1 हम भी चाहें कि उड़ें आसमानों में, मगर पाँव में ज़ंजीर है, नाम जिसकी मजबूरी है। Shayari 2 इश्क़ में क्या क्या न करना पड़ा हमें, कुछ ख़्वाहिशात थीं, कुछ मजबूरी थी। Shayari 3 वो रूठ गए हमसे, शायद उनकी भी कोई छुपी हुई मजबूरी रही होगी। Shayari 4 लफ्ज़ जुबां पे आते नहीं, आंखें सब कह जाती हैं, क्या करें, ये ख़ामोशी भी एक मजबूरी बन जाती है। Shayari 5 हर रिश्ते की अपनी एक दास्तान होती है, कभी प्यार, कभी दोस्ती, कभी मजबूरी होती है। Shayari 6 दिल में दर्द, आँखों में नमी, और होठों पे हँसी, ये कैसी मजबूरी है जो जी रहे हैं हम खुशी-खुशी। ...