हया की रंगीन दुनिया: शायरी का अनमोल खज़ाना
नज़र में हया, दिल में पाकीज़गी
लबों पे है मुस्कान और आँखों में गहरा पानी है,
तेरी हया ही तो मेरी मोहब्बत की निशानी है।
चेहरे पे आती है तेरे जब भी थोड़ी सी लाली,
समझ लेता हूँ कि तुमने ओढ़ी है हया की चादर काली।
इश्क़ में भी रहे एक अदब, एक पर्दा सा,
यही तो सिखाती है हमें ये पाकीज़ा हया।
नज़रें झुका के चलना भी एक अदा है तेरी,
रूह को छू जाती है तेरी ये प्यारी सी हया मेरी।
दामन को अपनी हया से यूँ सँवारो तुम,
के देखने वाला भी कहे, क्या नायाब हो तुम।
जब कोई देखे तुम्हें, तो तुम शर्म से झुक जाओ,
यही तो असली हुस्न है, यही है तुम्हारी हया।
इश्क़ की राह में भी एक पर्दा ज़रूरी है,
दिल को पाक रखती है ये हुस्न-ए-हया।
खूबसूरती तो हर कोई देख लेता है,
मगर हया को हर आँख नहीं पहचानती है।
जिस दिल में हया हो, वो कभी नहीं भटकता,
नेकी की राहों पर चलता है, कभी नहीं अटकता।
तुम्हारा चेहरा जब भी देखता हूँ मैं,
हया के नूर से रोशन पाता हूँ मैं।
वो ज़माना अब कहाँ, जब आँखों में हया थी,
अब तो हर जगह बस बेपरवाही की हवा थी।
अगर हया ना हो तो हुस्न भी फीका लगे,
रूह की पाकीज़गी से ही तो हर रिश्ता जगे।
अपनी हया का दामन ना छोड़ना कभी,
यही तो है वो दौलत जो मिटती नहीं कभी।
हर बात पे शर्मा जाना, हर अदा में हया,
कुछ इस तरह से तुमने हमको दीवाना किया।
वो नज़रों की गुस्ताखी, और फिर आँखों में हया,
कुछ ऐसा ही तो होता है तेरा हर इक अदा।
कभी लबों पे हंसी, कभी आँखों में हया,
यही तो है अंदाज़-ए-मोहब्बत-ए-दिलरुबा।
हुस्न की क्या ज़रूरत, जब हया खुद कमाल हो,
हर एक नज़र में फिर एक नया सवाल हो।
वो चुप रहना तेरा, और बातों में हया,
सारा जहाँ हार जाए, ऐसी है तेरी अदा।
दिल की गहराइयों में हया को बसा लो तुम,
सच्ची मोहब्बत का दामन ना छोड़ना तुम।
एक नूर सा बिखर जाए, जब चेहरा खिलता है,
हया के पर्दे में ही तो सच्चा हुस्न मिलता है।
हया तेरी मेरे दिल में घर कर गई है,
हर सुबह अब तेरी यादों से भर गई है।
लबों पे ख़ामोशी, आँखों में थोड़ी सी हया,
तेरा अंदाज़-ए-बयाँ ही तो है सबसे जुदा।
तेरी हया की महक, फिज़ाओं में घुल जाए,
देखने वाला भी बस तुझमें ही खो जाए।
वो ज़ुल्फ़ों का हट जाना, फिर नज़र में हया,
हर अदा में तेरी, बस दिखता है खुदा।
हया है गर तुम्हारी, तो दिल भी पाक होगा,
ये इश्क़ भी तब ही तो सच्चा और बेबाक होगा।
जब तुम पास आती हो, तो दिल धड़क जाता है,
तेरी आँखों की हया, मुझे बेहद भाता है।
तेरी हया में जो जादू है, वो कहीं और नहीं,
यही तो है वो नगीना, जो मिलता हर मोड़ नहीं।
हया है गहना तेरा, हया है तेरी ज़ीनत,
इसकी हिफाज़त करना, यही तो है तेरी दौलत।
तेरी सादगी में भी एक अलग सी कशिश है,
तेरी आँखों की हया में एक गहरी रंजिश है।
नज़रें उठाना, फिर पलकों को झुका लेना,
ऐसी अदा है तेरी, कि दिल दे बैठे जमाना।
प्यार की हद से भी आगे निकल जाती है हया,
जब दिल से दिल मिलते हैं, तो बन जाती है दुआ।

