Malaal (मलाल)
मलाल (Malaal) - दिल की गहराइयों से निकली शायरी रूह को मेरे आज भी एक मलाल (Malaal) है, तू क्यों बिछड़ा, यही मन में सवाल है। गुज़रे लम्हों का आज भी मुझको मलाल (Malaal) है, कांच सा टूटा दिल, बिखरा हर ख्याल है। एक अनकही बात का अक्सर मलाल (Malaal) रहता है, क्यों ना कह पाए हम, बस यही एक सवाल रहता है। ज़िंदगी में कुछ खोने का गहरा मलाल (Malaal) है, क्या पाया, क्या गँवाया, ये कैसा हाल है। उनकी बेरुख़ी का क्या खूब मलाल (Malaal) है, शायद हमारी चाहत में ही कुछ खलाल है। दिल में दबा है एक ऐसा मलाल (Malaal) , जिसकी वजह से हर खुशी बेहाल है। हर साँस के साथ बढ़ता जाता है मलाल (Malaal) , क्यों वो लम्हे लौटे नहीं, बस यही कमाल है। इश्क़ में जो ज़ख्म दिया, उसका मलाल (Malaal) रहेगा, तू भूला दे भले, मुझे याद रहेगा। काँधे पर तेरे सर रखकर रो ना पा...