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Fughan (फ़ुग़ाँ)

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फ़ुग़ाँ: दर्द-ए-दिल की आवाज़ शायरी 1 दिल में दबा है दर्द, लबों पर है खामोशी, कौन समझे इस दिल की फ़ुग़ाँ , ये तन्हाई। शायरी 2 महफ़िल में भी तन्हा है मेरा दिल, ये क्या है? हर सांस में उठती है एक दर्द भरी फ़ुग़ाँ । शायरी 3 शाम ढले, जब याद तुम्हारी आती है, लबों से निकलती है एक बेबस सी फ़ुग़ाँ । शायरी 4 हर आह में छिपी है, एक कहानी अधूरी, किसको सुनाएँ हम अपनी ये फ़ुग़ाँ , ये दूरी। शायरी 5 चुपचाप सहते रहे ज़माने के सितम, पर दिल से कभी कम न हुई फ़ुग़ाँ । शायरी 6 तूफ़ान मेरे दिल में, आँखों में नमी है, ज़ुबाँ पर ना आ सकी, वो मेरी फ़ुग़ाँ है। शायरी 7 तन्हाई की रातें, अब और भी लंब...

Aah (आह)

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दिल से निकली आह : दर्द-ए-इश्क की दास्तान तेरी याद में हर पल दिल से निकलती है, यह मेरी खामोश आह , जो तुझे पुकारती है। हर रात आँखों से बहते हैं अश्क बनकर, और सुबह होते ही दिल से निकलती है एक आह । जख्मों को छिपाकर मुस्कुराना सीखा है हमने, पर अंदर ही अंदर एक दर्द भरी आह है। क्या खबर थी मोहब्बत इतनी रुलाएगी, हर साँस के साथ एक लंबी आह आएगी। वो जो कहते थे कभी बिछड़ेंगे नहीं, आज उनकी याद में बस एक आह भरते हैं। दर्द की कहानी लबों पर आ न सकी, आँखों से बही और दिल से निकली आह । ...

Soz (सोज़)

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सोज़ -ए-दिल की गहराइयाँ: शायरी संग्रह शायरी 1: ज़िंदगी भर की तन्हाई का हासिल क्या है, सिवाए इस सोज़ -ए-निहाँ के, और हासिल क्या है। शायरी 2: दिल में इक उम्र से जो दर्द का आलम है, ये सोज़ -ए-इश्क़ है या कोई गहरा ग़म है। शायरी 3: तेरी यादों का हर लम्हा, मेरी जानिब आया, साथ ले आया मेरे दिल का यह सोज़ -ए-जुदाई। शायरी 4: हर एक आँसू में छिपी है, दास्तान-ए-ग़म, कौन समझे इस दिल का, ये गहरा सोज़ -ए-पस-ए-पर्दा। शायरी 5: महफ़िलें तो सजीं, पर दिल मेरा तन्हा रहा, इस सोज़ -ए-दरूँ को कोई समझ न सका। शायरी 6: इश्क़ ने क्या-क्या न दिए, ये दाग़-ए-दिल, रह गया बस सीने में, यह सोज़ -ए-मुसलसल। श...

Jalan (जलन)

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जलन (Jalan) पर दिल को छू लेने वाली शायरी शायरी 1 उनकी कामयाबी देख कर, क्यों दिल में उठी है आग, ये कैसी है जलन , जो जला रही मेरा ही चिराग। शायरी 2 हर शख्स की तरक्की पे, क्यूँ ये दिल घबराता है, जलन की आग में खुद को, रोज वो जलाता है। शायरी 3 तेरी खुशी से मेरी आँखें, क्यों नम होने लगी हैं, क्या ये जलन ही है, जो मुझमें पलने लगी है? शायरी 4 दुआ करता हूँ रब से, ये आग बुझ जाए दिल की, बहुत बुरी है ये जलन , जो खा जाती है खुशियाँ सभी की। शायरी 5 अंधेरी रात में जुगनू को देखा, वो भी चमक रहा था, ...

Dhuan (धुआँ)

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धुआँ (Dhuan): रूह की गहराई से निकली शायरी दर्द का धुआँ ज़िंदगी की राहों में यूँ अक्सर मिलते हैं, जब दिल जलता है तो उठता है ये धुआँ . यादों का धुआँ तेरी यादें आज भी मेरे दिल को जलाती हैं, हर शाम उठता है उनकी आग से गहरा धुआँ . इश्क़ का धुआँ इश्क़ की आग जब जलती है सीने में, तो आँखों से अक्सर निकलता है मीठा धुआँ . अधूरे ख्वाबों का धुआँ कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते हैं ज़िंदगी में, बनकर धुआँ आसमान में बिखर जाते हैं. तन्हाई का धुआँ तन्हाई की शाम में अक्सर यूँ होता है, हर साँस से निकलता है एक उदास धुआँ...

Raakh (рах)

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जली हुई उम्मीदों की राख (राख) दर्द-ए-दिल की दास्तान अधूरे ख्वाबों की राख मोहब्बत की आग में जलकर, सब कुछ मिट गया, बची है बस अब अधूरे ख्वाबों की राख . यादों की राख दिल के आंगन में बिखरी है यादों की राख , हर कण में छिपी है एक अनकही दास्ताँ. दिल की राख कहने को तो बहुत कुछ था, पर अब कुछ नहीं, सिर्फ मेरे जले हुए दिल की राख है बची हुई. इश्क़ की राख इश्क़ की आग ने सब कुछ जला दिया, अब तो बस उसकी यादों की राख बची है. टूटे सपनों की राख क्या बताएँ कैसे टूट गए सब सपने, बस बची है अब टूटे सपनों की राख . ...