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Nazneen (नाज़नीन)

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नाज़नीन (Nazneen): एक खूबसूरत एहसास शायरी 1 तेरी आँखें, नाज़नीन , एक गहरा समंदर हैं, जिनमें डूब कर खो जाने को जी चाहता है। शायरी 2 हुस्न तेरा, नाज़नीन , चाँदनी से भी हसीं, हर अदा में तेरी एक अलग ही नूर है। शायरी 3 तेरी बातों में वो जादू है, ऐ नाज़नीन , जो हर दिल को अपनी ओर खींच लेता है। शायरी 4 जब तुम मुस्कुराती हो, नाज़नीन , तो लगता है, जैसे फ़िज़ा में भी खुशबू घुल जाती है। शायरी 5 तेरे हर अंदाज़ में है इक नयापन, नाज़नीन , कोई कैसे ना हो तेरे हुस्न का दीवाना। शायरी 6 ...

Dilruba (दिलरुबा)

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दिलरुबा (Dilruba): मोहब्बत के अल्फ़ाज़ शायरी 1 तेरी अदाओं का क्या कहना, हर अदा में जादू है, मेरी रूह में बसी है तू, मेरी सच्ची दिलरुबा है। शायरी 2 जब से देखा है तुम्हें, होश ओ हवाश खो बैठे, इश्क़ की राहों में तुम ही हो मेरी दिलरुबा । शायरी 3 तेरी निगाहों की गहराई में खोया रहता हूँ, हर साँस में बस तेरा नाम, ओ मेरी दिलरुबा । शायरी 4 चाँद सी सूरत, सितारों सी चमक है तेरी, जन्नत की हूर है तू, मेरी प्यारी दिलरुबा । शायरी 5 मेरा हर ख्वाब, मेरी हर चाहत है तू, ज़िन्दगी का हसीन लम्हा, मेरी दिलरुबा । शायरी 6 तेरी जुल्फों के साए में सुकून मिलता है, हर मुश्किल में सहारा, मेरी दिलरुबा । शायरी 7 सुबह की पहली किरण, शाम का ढलता सूरज, हर पल याद आती है तू, मेरी दिलरुबा । शायरी 8 तेरी बातों में वो जादू है, जो दिल को छू जाए, अल्फाजों में बयाँ न हो, मेरी दिलरुबा । शायरी 9 जब भी देखता हूँ तुझे, दिल को मिलता है करार, मेरी धड़कनों की आवाज़, मेरी दिलरुबा । शायरी 10 इश्क़ की हर मंज़िल, हर डगर है तू ही तू, मेरे सफर का हमसफ़र, मेरी दि...

Muhib (मुहिब)

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मुहिब: दिल की गहराइयों से जब से देखा है मैंने अपनी आँखों में तुम्हें, मेरे हर ख्वाब की ताबीर हो तुम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तुमसे ही रौशन है मेरी ये दुनिया सारी, रूह में बसे हो ऐसे, मेरे सच्चे मुहिब (मुहिब) हो तुम। हर घड़ी, हर पल, बस तुम्हें सोचता हूँ, मेरी इबादत, मेरी चाहत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी मोहब्बत में खोकर मिली है मुझे राहत, मेरी हर आरज़ू, मेरी हर ज़रूरत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। ज़िन्दगी की हर मुश्किल आसान हो गई, जब से तू मिला है, मेरे प्यारे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी अदाओं पर, तेरी बातों पर मैं फ़िदा, मेरी हर साँस में, मेरे दिल में, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। शाम-ओ-सहर तेरी यादों में गुम रहता हूँ, मेरी हर दुआ में शामिल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी हंसी से खिलती है मेरी हर कली, मेरे बाग़-ए-हयात के गुल, मेरे मुहिब (मु...

Aashiq (आशिक़)

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आशिक़ों की दुनिया: मोहब्बत के रंगीन अल्फाज़ इश्क़ का पैमाना मोहब्बत की गलियों में भटकता है हर आशिक़ , पाने को दिलबर, जलता है वो जैसे कोई दीया बारीक। दीदार की प्यास हर रात आँखों में लिए फिरता है वो दीदार की प्यास, सुबह की पहली किरण में ढूँढता है अपना खास आशिक़ । गम का साथी गम में भी मुस्कराता है, वो सच्चा आशिक़ , दर्द को सहता है, पर ज़ुबां पर नहीं लाता कोई शिक़। वफ़ा की मिसाल वफ़ा की मिसाल बनता है हर एक आशिक़ , नज़रें मिलती नहीं, फिर भी दिल करता है हर पल शिक़। ...

Aashiqui (आशिक़ी)

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ख़ूबसूरत लम्हे: आशिक़ी की दुनिया नज़रें मिलती हैं जहाँ... नज़रें मिलती हैं जहाँ, वहीं से शुरू होती है दास्ताँ, दिल में जब उतर जाए कोई, तब पनपती है आशिक़ी की ज़ुबाँ। तेरी यादों में खोया... तेरी यादों में खोया रहता है मेरा हर पल, हर शाम, यही तो है मेरी आशिक़ी का सबसे हसीं अंजाम। दिल का ये अफसाना... दिल का ये अफसाना, निगाहों की ये प्यास, कुछ और नहीं बस तेरी आशिक़ी है मेरे पास। इश्क़ की राहों में... इश्क़ की राहों में हर कदम पर मिले तन्हाई, फिर भी मेरी आशिक़ी ...

Shama (शमा)

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शमा और परवाने: मोहब्बत के अलफ़ाज़ 1. रोशनी का आगाज़ रात के अँधेरे में जब कोई सहारा न हो, तब जलती है एक शमा , रौशनी का किनारा बन कर। 2. इश्क़ की तपिश परवाना जलता है शमा की लौ पर, इश्क़ में, क्या खूब अदा है, इस मोहब्बत की कहानी में। 3. दिल की आग जलते हैं दिल भी कभी-कभी, शमा की तरह, खामोश रहकर भी कितना कुछ कह जाते हैं। 4. उम्मीद की किरण हर रात के बाद एक सवेरा आता है, हर आँधी के बाद जलती है एक शमा । 5. तन्हाई का साथी ...

Parwana (परवाना)

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इश्क़ की लौ में जलता परवाना : हिंदी शायरी शमा का दीवाना शमा से इश्क़ में जलता है परवाना , फिर भी उसकी लौ में पाता है ठिकाना। अधूरा साफ़र रात भर जला शमा के लिए परवाना , सुबह होते ही बुझ गया, अधूरा साफ़र। मिटने की आरज़ू किस क़दर है मिटने की आरज़ू उसे, लौ में जलता फिरता है हर परवाना । इश्क़ की इंतिहा इश्क़ की इंतिहा है क्या, कोई समझाए, जब से देखा है शमा को, जलता है परवाना । मंज़िल का पता खुद को मिटाकर ही पाता है मंज़िल का पता, शमा के गिर्द घूमता ये बेख़बर परवाना । जुनून-ए-शौक़ ...