Qaza (क़ज़ा)
क़ज़ा पर बेहतरीन शायरी का संग्रह शायरी 1 इश्क़ की राह में हर मोड़ पे मिलती है ज़ुदाई, अपनी ही तक़दीर से लड़ता रहा, जब आई क़ज़ा . शायरी 2 ज़िंदगी एक सफ़र है, और मौत है आख़िरी मुक़ाम, क़ज़ा जब भी आएगी, हँस कर करेंगे सलाम. शायरी 3 हर साँस तेरी अमानत है, हर लम्हा तेरा फ़ुर्मान, कब आएगी क़ज़ा , बस यही सोचता है इंसान. शायरी 4 उम्र भर की कमाई, पल भर में लुटा दी, तेरी एक निगाह से, मेरी क़ज़ा भी सज़ा दी. शायरी 5 क्या फ़र्क पड़ता है, जी कर या मर कर, जब क़ज़ा ही लिखी हो, तेरी याद में मर कर. शायरी 6 ज़िंदगी की उलझनें, सुलझती ही नहीं, कब आएगी वो घड़ी, जब आए क़ज़ा कहीं. शायरी 7 ना कोई आसरा, ना कोई ठिकाना है, हर पल तेरी क़ज़ा का इंतज़ार पुराना है. ...