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Sukoot (सुकूत)

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सुकूत (Sukoot): खामोशी का अफ़साना खामोशी की जुबां लबों पे आई बात अक्सर बदल जाती है, मगर दिल की सदा, सुकूत में पल जाती है। गहराई का राज़ सागर की गहराईयाँ अक्सर शांत होती हैं, कुछ ऐसी ही गहराइयाँ सुकूत में होती हैं। दर्द की परछाईं जब दिल में दर्द उठता है, तो शोर नहीं होता, बस एक गहरा सुकूत हर तरफ़ फैल जाता है। तन्हाई का साथी तन्हाई में अक्सर वो मेरा हमदम बनता है, ये गहरा सुकूत ही मेरा सच्चा साथी रहता है। आँखों में ठहरा आँखों में ठहरा है, लबों पर आया नहीं, मेरे हर दर्द का सुकूत अभी तक गया नहीं। ...

Khamoshi (ख़ामोशी)

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ख़ामोशी (Khamoshi): दिल की अनकही दास्तान तेरी यादों की गहरी रात में, लिपटी है मेरी ख़ामोशी हर बात में। लबों पर है कुछ अनकही दास्तान, आँखों में तैरती है दिल की ख़ामोशी की पहचान। जब जुबां से कुछ कह न पाए, तो मेरी ख़ामोशी ही सब कुछ बता जाए। शिकायतों का दौर अब खत्म हुआ, मेरी ख़ामोशी ने सारा शहर जीत लिया। इश्क के रास्ते में अक्सर, ख़ामोशी ही सबसे गहरी बात कह जाती है। रात की तन्हाई में चाँदनी सी, मेरी ख़ामोशी भी कितनी अफसोसनाक है। कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बय...

Sannaata (सन्नाटा)

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खामोशी का अफ़साना: सन्नाटा (Sannaata) पर दिलकश शायरी खामोशी की गहराइयाँ रात की चादर में लिपटी खामोशी, दिल में गहराता है हर पल सन्नाटा । हर आहट से दूर शहर की भीड़ में भी वो महसूस होता है, अजीब सा ये दिल का सन्नाटा । अकेलेपन का साथी जब कोई नहीं होता साथ देने को, तब मेरा हमदम बनता है ये सन्नाटा । शब्दों के परे कुछ बातें अनकही रह जाती हैं, उन्हीं में घुल जाता है मेरा सन्नाटा । टूटे ख्वाबों की दास्तान टूटे हु...

Khaali (ख़ाली)

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ख़ालीपन की गहराइयाँ: Khaali (ख़ाली) पर विशेष शायरी संग्रह दिल की हर आरज़ू अब ख़ाली रह गई है, ज़िंदगी भी जैसे एक पहेली रह गई है। तेरी यादों से मेरा दामन ख़ाली नहीं, बस तेरी मौजूदगी की कमी अब भी सताती है। जब से तुम गए हो, ये घर ख़ाली सा लगता है, हर कोने में बस तेरी कमी का एहसास रहता है। पन्नों पर लिखे हर लफ़्ज़ ख़ाली से लगे, तेरी दास्ताँ के बिना सारे क़िस्से अधूर से रहे। हाथों की लकीरें भी अब ख़ाली सी हैं, क़िस्मत ने भी जैसे साथ छोड़ दिया है। कभी सोचे न थे ये पल भी आएँगे, जब दिल के हर कोने ख़ाली से रह जाएँगे। नज़रों में है इंतज़ार, मगर पलकें ख़ाली हैं, अश्कों की बारिश भी अब सूखी सी लगती है। ये दुनिया की महफ़िल भी अब ख़ाली लगती है, तेरे बिना हर खुशी अब अधूरी सी लगती है। दुआओं में भी अब वो असर नहीं रहा, हर मन्नत ...

Suna (सूना)

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सूनापन दिल की गहराइयों से: शायरी का अद्भुत संग्रह दिल की बस्ती आज भी दिल की बस्ती, यूँ ही सूना पड़ा है, कोई आए तो सही, यहाँ इंतज़ार खड़ा है। तेरी याद में तेरी याद में हर शाम, महफ़िल भी सूना लगता है, अब तो चाँद भी बिना तेरे, अधूरा सा लगता है। शहर की गलियाँ शहर की गलियाँ भी आज, कितनी सूना लगती हैं, बिना तेरे ए हमदम, सारी फ़िज़ाएँ रोती हैं। ख़ुशियों का रंग खुशियों का रंग भी अब, बे-रंग और सूना है, ज़िन्दगी का हर पल, जैसे कोई अधूरा अफ़साना है। मौस...

Ujaad (उजाड़)

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उजाड़ (Ujaad) पर दिल को छू लेने वाली शायरियां 1. वीरान बस्ती किसी ने पूछा मुझसे, क्यों तुम्हारी आंखें नम हैं, मैंने कहा, मेरे शहर को तुमने क्यों उजाड़ दिया है। 2. दिल का आलम दिल का आलम अब कुछ ऐसा है, कह नहीं पाते, तेरी यादों ने हर तरफ से मुझे उजाड़ रखा है। 3. ख्वाबों का सफर ख्वाबों का सफर अब कहाँ ले जाए हमें, जहाँ से चले थे, वो भी अब उजाड़ सा लगता है। 4. रिश्तों का टूटना रिश्तों की डोर जब कमजोर पड़ जाती है, सारा चमन फिर एक पल में उजाड़ हो जाता है। 5. यादों का शहर यादों का शहर आज भी मेरे दिल में बसा है, मगर तेरे जाने के बाद सब कुछ उजाड़ गया है। ...