Thursday, June 4, 2026

Rukhsaar (रुख़सार)

नूर-ए-रुख़सार पर शायरी

तेरी रुख़सार की लाली, हर सुबह का पैगाम है,
देखूँ जब भी इसे, दिल को मिलता आराम है।
शब की ज़ुल्मत में, चाँदनी सी तेरी रुख़सार,
नूर-ए-मोहब्बत है, मेरी हर साँस का करार।
वो हल्की सी मुस्कान, और उस पर तेरी रुख़सार,
जैसे खुल गया हो जन्नत का कोई नया द्वार।
तेरे रुख़सार पर बिखरी जुल्फ़ों की घटाएँ,
सावन की पहली बारिश सी, मदहोश कर जाएँ।
कागज़ पर उतारूँ क्या तेरी रुख़सार का नज़ारा,
हर लफ्ज़ में सिमट जाए, यह है तेरा सहारा।
जब जब पलकें झुकें, उभरती है तेरी रुख़सार,
इक ख़ूबसूरत हकीकत, नहीं कोई ख़्वाब-ओ-दीदार।
सूरज भी शर्मा जाए, देख तेरी रुख़सार का नूर,
ऐसा जलवा कहीं देखा नहीं, हर ऐब से दूर।
तेरी रुख़सार की मासूमियत, दिल को छू जाती है,
हर गम, हर उदासी, पल भर में मिटा जाती है।
हवा जब छू के गुज़रे, तेरी रुख़सार को,
खुशबू फैल जाए ऐसी, मैं ढूँढूँ हर मोड़ को।
फूलों से भी नाज़ुक, है तेरी रुख़सार की रौनक,
इश्क़ की हर अदा में, है तेरी ही महक।
आँखों में तेरी दुनिया, और रुख़सार पर जहान,
इक तेरी झलक पे, मैं कर दूँ सब कुर्बान।
खुदा ने तराशा होगा, फुर्सत से तेरी रुख़सार,
हर नक़्श में है जादू, हर अंदाज़ में प्यार।

Wednesday, June 3, 2026

Deedar (दीदार)

नज़र-ए-इश्क़: दीदार पर दिलकश शायरी

आप के दीदार के लिए दिल तरसता है,
आप के इंतज़ार में दिल तड़पता है।

मेरी आँखें और दीदार आप का,
या क़यामत आ गई या ख़्वाब है।

देखने के लिए सारा आलम भी कम,
चाहने के लिए एक चेहरा और उसका दीदार बहुत।

हर पल तेरे दीदार को तरसती हैं आँखें मेरी।

दीदार की तमन्ना कल रात रख रही थी,
ख़्वाबों की रह-गुज़र में शमएँ जला जला के।

क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख कर,
जलता हूँ अपनी ताक़त-ए-दीदार देख कर।

तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना,
मेरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना।

जो और कुछ हो तेरी दीद के सिवा मंज़ूर,
तो मुझ पे ख़्वाहिश-ए-जन्नत हराम हो जाए।

इलाही क्या खुले दीदार की राह,
उधर दरवाज़े बंद आँखें इधर बंद।

ये दिल प्यार के काबिल ना रहा, कोई भी इज़हार के काबिल ना रहा,
इस दिल में बस गयी दोस्ती आपकी, अब तो चाँद भी दीदार के काबिल ना रहा!

Tuesday, June 2, 2026

Noor (नूर)

नूर (Noor) की रोशनी में डूबे ख़्याल

तुम्हारे चेहरे का हर नक्श है ऐसा, जैसे खुदा ने अपनी पूरी कला से तराशा हो, ये कैसा नूर है जो हर अंधेरे को भी रोशन कर दे.

जब तुम मुस्कुराते हो, तो हर तरफ फैल जाती है एक नई सुबह, तुम्हारा नूर चाँद-तारों से भी ज़्यादा जगमगाता है.

मेरी दुनिया में सिर्फ तुम्हारी ही रोशनी है, हर पल, हर दिशा में, तुम्हारे इश्क का नूर मेरी रूह को सुकून देता है.

नज़रें मिलती हैं तो दिल में एक अजीब सी हलचल होती है, ये तुम्हारे चेहरे का नूर ही तो है जो जादू कर जाता है.

रात की गहराइयों में भी तुम्हारी याद का दिया जलता है, क्योंकि उसमें तुम्हारे नूर की एक चमक है.

फूलों में खुशबू, सितारों में चमक, सब फिके पड़ जाते हैं, जब सामने आता है तुम्हारे हुस्न का नूर.

हर सुबह तेरी याद के साथ आती है, हर शाम तेरे ख्वाबों से सजी, मेरा हर लम्हा तुम्हारे नूर से ही रौशन है.

दिल के हर कोने में बस तुम ही बसे हो, मेरी हर साँस में तुम्हारा नाम है, तुम्हारी आँखों का नूर ही मेरी ज़िन्दगी का पैगाम है.

कायनात की हर खूबसूरत चीज़ तुमसे ही बनी है, ऐसा लगता है, क्योंकि तुम्हारा नूर हर चीज़ को और भी हसीन बना देता है.

जिस दिन से तुम्हें देखा है, दिल को सुकून मिल गया है, तुम्हारे चेहरे का नूर मेरी ज़िन्दगी की हर अंधेरी राह को रोशन कर गया है.

Monday, June 1, 2026

Jamal (जमाल)

जमाल (Jamal) पर शायरी

तेरे चेहरे का हर नक्श एक मुकम्मल ग़ज़ल, क्या खूब बनाया है खुदा ने तेरा जमाल

चांद भी शर्मा जाए देखकर तेरा रूप, तूने बिखेरा है हर सू अपने जमाल का अनूप।

निगाहें ठहर जाती हैं जहां तेरा दीदार हो, ऐसा दिलकश है तेरा जमाल, हर कोई फ़िदा हो।

हर अदा में तेरी एक नई बात है, तेरा जमाल तो जैसे एक रोशन रात है।

ये जो हँसी है लबों पर, ये आंखों की चमक, यही तो है तेरे हुस्न का जमाल, जिसकी हमें है ललक।

फूलों में खुशबू, सितारों में चमक, सब फीके हैं तेरे जमाल की बनिस्बत।

जबसे देखा है तेरा जमाल, तबसे दिल बेकरार है, तेरी हर अदा पर मेरी जान निसार है।

दुनिया की हर चमक फीकी लगे मुझे, जबसे नज़र आया है तेरा जमाल

हर लफ्ज़ में बस तेरी तारीफें हों, कोई क्या बयान करे तेरे जमाल की हदें।

तेरी सादगी में भी एक अजब जमाल है, जो हर नज़र को अपनी ओर खींचता है हर हाल है।

Sunday, May 31, 2026

Husn (हुस्न)

हुस्न (Husn) पर शायरी

तुम्हारे हुस्न की तारीफ में क्या लिखूँ, कलम भी रुक गई, अलफ़ाज़ कम पड़ गए।

नज़रों ने जब देखा तुम्हारा हुस्न, चाँद भी शर्मा के बादलों में छुप गया।

तेरा हुस्न वो जादू है जो सर चढ़ के बोलता है, जो भी देखे बस तेरा ही हो लेता है।

हर अदा में है तेरी हुस्न की झलक, हर निगाह में है तेरी चाहत की चमक।

खुदा ने बख्शा है तुम्हें कमाल का हुस्न, जो देख ले एक बार, वो फिर कहीं और ना देखे।

तेरे हुस्न का चर्चा हर ज़ुबाँ पर है, तेरी सादगी भी एक कयामत है।

ये कौन आया कि निखर गया है हुस्न-ए-जहाँ, हर शै में अब तो है रंगीनियाँ हज़ार।

हुस्न को बेपर्दा न कर, कहीं आँखे जल न जाएँ, तेरी एक झलक से कई दिल मचले हैं।

तेरा हुस्न जैसे कोई हसीं ख्वाब हो, जिसे देखते ही हर आरजू पूरी हो जाए।

कयामत है तेरा हुस्न, कमाल है तेरी अदा, हम तो फ़ना हो गए तुझे देखते-देखते।

तेरी आँखों में हुस्न का समंदर है, और हम उसमें डूबने को तैयार हैं।

Chahat (चाहत)

💖 चाहत (Chahat) - दिल की गहराइयों से 💖

तुम्हें पा लेने के सिवा एक और चाहत (चाहत) है मेरी,
मैं जब भी जन्म लूँ बस तुमसे ही प्यार करूँ।

हमारी चाहत (चाहत) और आपकी मोहब्बत में सिर्फ इतना ही अंतर है,
आपके कुछ हिस्से में हम हैं और हमारी रूह रूह में सिर्फ आप।

ना तोल मेरी मोहब्बत अपनी दिल्लगी से,
देखकर मेरी चाहत (चाहत) को अक्सर तराजू टूट जाते है।

हमने तो एक ही शख्स पर चाहत (चाहत) ख़त्म कर दी,
अब मोहब्बत किसे कहते है मालूम नहीं।

मेरी चाहत (चाहत) का ये अंजाम हुआ,
दिल मेरा फिर से नाकाम हुआ।

तेरी चाहत (चाहत) ने मुझे बदल दिया,
हर सोच को तेरे रंग में रंग दिया।

दिल की धड़कन को तेरी चाहत (चाहत) समझा है,
दर्द को आंखों से झलकता पानी समझा है।

तेरी चाहत (चाहत) की है इतनी शिद्दत,
पा लिया तुझ को तो मर जाऊँगा।

मुझ को तेरी चाहत (चाहत) ज़िंदा रखती है,
वरना कब के मिट गए होते हम।

एक दिन जब मेरी साँस बंद हो जाएगी,
मत सोचना की चाहत (चाहत) कम हो जाएगी।

किसी को चाहने का कोई कमाल नहीं,
पर मेरी चाहत (चाहत) सबसे जुदा है।

तुमसे मिली तो चाहत (चाहत) का मतलब समझा,
वरना ये दिल तो बस भटकता रहता था।

Saturday, May 30, 2026

Ulfat (उल्फ़त)

उल्फ़त के रंग

यह सिलसिला उल्फ़त (उल्फ़त) का चलता ही रह गया, दिल की चाह में दिलबर मचलता ही रह गया।

खुदा करे, मेरी उल्फ़त (उल्फ़त) में तुम कुछ यूँ उलझ जाओ, मैं तुमको दिल में भी सोचूँ तो तुम समझ जाओ।

होंठों पे उल्फ़त (उल्फ़त) का नाम होता है, आँखों में छलकता जाम होता है।

राज़-ए-उल्फ़त (उल्फ़त), सीने में हम, लिए फिरते हैं, वो बयाँ अगर कर दें तो ज़िन्दगी ही संवर जाए।

इश्क़ में हर कदम है इक मंज़िल, राह-ए-उल्फ़त (उल्फ़त) की मुश्किलात न पूछ।

तुमसे उल्फ़त (उल्फ़त) के ये तकाज़े न निभाए जाते, वरना तमन्ना हमें भी खूब थी कि चाहे जाते।

दिल में कुछ टूटने लगता है तिरे ज़िक्र के साथ, चंद आँसू तिरी उल्फ़त (उल्फ़त) के बहाने निकले।

है ये उल्फ़त (उल्फ़त) भी क्या बला साहब, इस में झुकते नवाब देखे हैं।

जगा दिया सुबह तेरी याद-ए-उल्फ़त (उल्फ़त) ने वरना, आज इतवार था बहुत देर तक सोते हम।

कम निगाही की हमें खुद भी कहाँ थी तौफीक, कम निगाही के लिए उस ना उल्फ़त (उल्फ़त) चाहे जाते।

मेरी उल्फ़त (उल्फ़त) ने मोहब्बत मेरी आदत कर दी, मुझ को दुश्मन के इरादों पे भी प्यार आता है।