Khafgi (ख़फ़गी)
ख़फ़गी (Khafgi): दिल की गहराइयों से निकलीं शायरियां कुछ अनकही सी बातों में, है तेरी आज भी ख़फ़गी , लबों पर हँसी मगर, आँखों में है आज भी उदासी। मेरी हर बात पे वो, रूठ जाते हैं अक्सर, कहाँ जाए ये दिल, जब प्यार में हो इतनी ख़फ़गी । इश्क़ में इतना भी, खुदगर्ज ना बनो यारों, के टूट जाए रिश्ते, बस एक छोटी सी ख़फ़गी से। तेरी आँखों की गहराई में, एक अजीब सी बात है, प्यार भी दिखता है, और छुपी है तेरी ख़फ़गी भी साथ है। माना कि थोड़ी सी, नाराज़गी है तुमको हमसे, मगर दूर ना जाना, इस छोटी सी ख़फ़गी के वास्ते। किस बात की है ये, इतनी लंबी ख़फ़गी , ...