Suna (सूना)
सूनापन दिल की गहराइयों से: शायरी का अद्भुत संग्रह दिल की बस्ती आज भी दिल की बस्ती, यूँ ही सूना पड़ा है, कोई आए तो सही, यहाँ इंतज़ार खड़ा है। तेरी याद में तेरी याद में हर शाम, महफ़िल भी सूना लगता है, अब तो चाँद भी बिना तेरे, अधूरा सा लगता है। शहर की गलियाँ शहर की गलियाँ भी आज, कितनी सूना लगती हैं, बिना तेरे ए हमदम, सारी फ़िज़ाएँ रोती हैं। ख़ुशियों का रंग खुशियों का रंग भी अब, बे-रंग और सूना है, ज़िन्दगी का हर पल, जैसे कोई अधूरा अफ़साना है। मौस...