Khwaab (ख़्वाब)
ख़्वाबों की दुनिया: एक शायरी संग्रह रात की गहराई में, एक नया ख़्वाब जगा, सुबह की किरणों सा, उम्मीदों का रंग भरा। पलकों तले छुपा है, एक अनमोल ख़्वाब मेरा, जीने की हर वजह है, यही तो संसार मेरा। टूटे हुए तारों सा, बिखर गया वो ख़्वाब , फिर भी दिल में है आस, लौट आएगा वो आफताब। हर रात आँखों में, सजता है तेरा ख़्वाब , कैसे कहूँ तुझसे, क्या है मेरा जवाब। कभी सच न हो पाया, वो प्यारा सा ख़्वाब , फिर भी आँखों में बसा है, वो अधूरा नक़ाब। तेरी यादों के भंवर में, डूबा मेरा ख़्वाब , हर पल तेरी चाहत, यही मेरा अज़ाब। ...