Matam (मातम)
मातम: दिल की गहराई से निकले एहसास दर्द-ए-दिल की कुछ अनकही बातें ज़िंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, कि हर खुशी से नाता तोड़ लिया, अब तो बस आँखों में नमी है, दिल में हर पल तेरा मातम है। रात भर जागते रहे तारे, गवाह थे मेरे दिल के हर सहारे, टूटे जब ख्वाब सारे, छा गया हरसूँ मातम का नज़ारे। क्या बताऊँ हाल-ए-दिल अपना, हर साँस में छुपा है दर्द का सपना, तेरी यादों का साया है, मेरे वजूद में बस मातम छाया है। रूह तड़पती है तेरी जुदाई में, हर लम्हा गुज़रता है तन्हाई में, अब तो आलम ये है, कि हर ख़ुशी भी लगती है मातम में। बर्बादी के मंज़र देख लो, मेरे दिल की उजाड़ ज़मीन पर, जहाँ कभी बहारें थीं, वहाँ आज सिर्फ़ मातम है, हर डगर पर। आँसुओं की स्याही से लिखा है फ़साना अपना, हर लफ्ज़ में तेरी जुदाई का मातम है, जाना अपना। जब से तुम गए हो ज़िंदगी से, हर रंग फीका पड़ गया, खुशियों का दामन छूट गया, बस म...