Bekaar (बेकार)
दिल की गहराइयों से: बेक़ार पर ३० शायरी शायरी 1 कुछ ख्वाब थे जो दिल में सजाये थे, तेरी बेरुखी ने सब को बेकार कर दिया। शायरी 2 हर कोशिश मेरी अब लगती है बेकार , जब से छोड़ा है तूने मेरा साथ, यार। शायरी 3 ज़िन्दगी के पन्ने पलट कर देखे हैं कई बार, तेरे बिना हर कहानी लगती है बेकार । शायरी 4 अकेलेपन की रातें, अब ये दिन भी क्या गिनूं, तेरी चाहत के बिना, सब कुछ है बेकार । शायरी 5 जो ना हो साथ तेरा, ये दुनिया भी क्या काम की, मेरी हर खुशी, हर पल, तेरे बिना है बेकार । शायरी 6 ...