Sukoot (सुकूत)
सुकूत (Sukoot): खामोशी का अफ़साना खामोशी की जुबां लबों पे आई बात अक्सर बदल जाती है, मगर दिल की सदा, सुकूत में पल जाती है। गहराई का राज़ सागर की गहराईयाँ अक्सर शांत होती हैं, कुछ ऐसी ही गहराइयाँ सुकूत में होती हैं। दर्द की परछाईं जब दिल में दर्द उठता है, तो शोर नहीं होता, बस एक गहरा सुकूत हर तरफ़ फैल जाता है। तन्हाई का साथी तन्हाई में अक्सर वो मेरा हमदम बनता है, ये गहरा सुकूत ही मेरा सच्चा साथी रहता है। आँखों में ठहरा आँखों में ठहरा है, लबों पर आया नहीं, मेरे हर दर्द का सुकूत अभी तक गया नहीं। ...