Kashish (कशिश)
कशिश: दिल से रूह तक की दास्तान कशिश का जादू तेरी आँखों की वो गहरी कशिश , आज भी मुझे बुलाती है, हर पल, हर लम्हा, तेरी यादों में खो जाने को कहती है। अनमोल एहसास दिल में इक अजीब सी कशिश है, जो तेरा नाम लेती है, बेचैन रूह मेरी, बस तुझसे ही सुकून पाती है। रुहानी बंधन तेरी मोहब्बत की ये कैसी कशिश है, जो खींचती है मुझे, हर कदम पर बस तेरी ओर मुड़ जाता है, ये दिल मेरा तुझे। हर धड़कन में हर साँस में तेरी कशिश है, हर धड़कन में तेरा नाम, मेरी सुबह भी तू, मेरी शाम भी तू, मेरा हर एक काम। यादों का साया तेरी यादों की कशिश , मुझे सोने नहीं देती, रातों की तन्हाई में, तेरी सूरत ही दिखती है। हर तरफ तू जिधर भी देखूँ, ...