Firaq (फ़िराक़)
फ़िराक़: दिल की गहराइयों से निकली शायरी 1. यादों का सिलसिला हर साँस में बसता है, तेरा नाम आज भी, इस दिल पे छाया है, फ़िराक़ का ग़म आज भी। तन्हा रातों में तेरी यादें जलाती हैं शमा, कब तक सहेंगे हम, जुदाई का ये हंगामा। 2. बेताब दिल की पुकार तेरी राहों में बिछी हैं मेरी आँखें, कब होगा ख़त्म ये लंबा फ़िराक़ , मेरे साजन। बेताबियों का आलम है, हर पल बेक़रारी है, आओ कि ज़िंदगी अब, बस तुम्हारे इंतज़ार में है। 3. दर्द-ए-जुदाई नज़रों से दूर हो पर दिल से जुदा नहीं, ये फ़िराक़ भी क्या चीज़ है, कोई दवा नहीं। हर रात तड़पते हैं, हर सुबह रोते हैं, तुम्हारे बिन हम, ज़िंदगी से यूँ बिछड़ते हैं। ...