Posts

Mitti (मिट्टी)

Image
मिट्टी (Mitti) पर दिल को छू लेने वाली शायरियां पहला नज़राना ज़िंदगी की हकीकत है, हम सब Mitti (मिट्टी) के बने हैं, आख़िर में इसी में मिल जाना है, ये कायनात के सबक हैं। रूह का सुकून जब बारिश की बूँदें गिरती हैं, Mitti (मिट्टी) की खुशबू आती है, लगता है जैसे रूह को मेरी, कोई अनमोल दावत भाती है। माँ की ममता बच्चों को खेलता देखूँ, Mitti (मिट्टी) में सने हुए, याद आती है माँ की ममता, और बचपन के खोए हुए। जड़ों से रिश्ता कितना भी उड़ लें आसमान में, पर जड़ें तो Mitti (मिट्टी) में ही हैं, अपनी पहचान वही है, जहाँ हमारे पुरखों की निशानी है। सरहद की Mitti (मिट्टी) ...

Gor (गोर)

Image
गोर (Gor) पर दिलकश शायरी संग्रह ज़िंदगी की इस राह में, एक दिन तो है जाना, आख़िरी मंज़िल है हमारी, वो गहरा गोर ठिकाना। दुनिया की रौनकें सब, पल भर की कहानी हैं, सच्ची हकीकत तो है, बस मिट्टी की गोर निशानी हैं। क्या खूब सजाया है हमने, इस फ़ानी दुनिया को, लेकिन भूल जाते हैं, असल घर है हमारा गोर । ग़म न कर ऐ दिल, इस दुनिया की बेवफ़ाई का, सुकून मिलेगा आखिर, जब सो जाएंगे गोर में जा कर। कितने आए कितने गए, सब मिट्टी में मिल गए, क्या दौलत क्या शोहरत, सब का ठिकाना गोर है। जब रूह परवाज़ करेगी, जिस्म ठंडा पड़ जाएगा, तब इस ज़मी...

Mazaar (मज़ार)

Image
इश्क़ और इबादत: मज़ार की रूहानी दास्तान सुकून की पनाह तेरी चौखट पे सुकून मिलता है, ऐ दिल की बात कौन समझे, इस फ़ानी दुनिया में कहाँ मिलती है वो राहत, जो तेरे मज़ार पे है। मरहम-ए-दिल नज़र झुकती है, दिल को करार आता है, हर ज़ख़्म-ए-दिल का मरहम है ये तेरा मज़ार । नूरानी रौशनी दुआओं का सिलसिला यहाँ खत्म नहीं होता, रोशन रहता है हमेशा ये नूरानी मज़ार । खुदा की रहमत क्या माँगू उस खुदा से, जब सब कुछ मिल जाए, तेरी रहमतों से भर जाए मेरा ये मज़ार । यादों की महक हर शाम यहाँ एक नया चिराग जलता है, तेरी यादों से महकता ये प्यारा मज़ार । दिल को करार टूटे दिल लेकर आते हैं सब तेरी पनाह में, सुकून का पैगाम देता है ये तेरा मज़ार । ...

Qabr (क़ब्र)

Image
क़ब्र (Qabr) पर बेहतरीन शायरी शायरी 1 तेरी यादों की आग अब भी बुझी नहीं, मेरी रुह को जलाती है हर पल, चाहे क़ब्र (क़ब्र) में सोये हों कहीं। शायरी 2 ज़िंदगी भर की थकान लिए अब कहाँ जाऊँ, आखिर मिल ही गई मंज़िल, ये सुकून की क़ब्र (क़ब्र) । शायरी 3 खुदा जाने क्या था उस शक्स की तकदीर में, हँसता हुआ गया, सो गया अपनी क़ब्र (क़ब्र) में। शायरी 4 मत पूछो क्या गुज़री हम पर इस दुनिया में, बेहतर है कि अब सो जाएँगे अपनी क़ब्र (क़ब्र) में। शायरी 5 मिट्टी का जिस्म मिट्टी में मिल ही जाएगा, बस रह जाएगी यादें, जब क़ब्र (क़ब्र) में समा जाएगा। शायरी 6 हर आहट पे लगता है कोई आने वाला है, अब तो इंतजार है बस, मेरी क़ब्र (क़ब्र) बनाने वाला है। ...

Kafan (कफ़न)

Image
कफ़न (Kafan): शायरी का संग्रह शायरी 1 ज़िंदगी भर साथ देने का वादा किया था तुमने हमसे, और जाते-जाते हमें एक कफ़न भी न दिया। शायरी 2 मेरी कब्र पर आकर क्यों रोते हो यारों, जब ज़िंदा था तब तो एक कफ़न भी न दिया। शायरी 3 मौत की नींद सो रहा हूँ सुकून से अब, बेशक मेरे बदन पर अब कफ़न है। शायरी 4 तेरी याद में हम आज भी जीते हैं, बस फर्क इतना है कि अब तन पर कफ़न है। शायरी 5 इश्क़ में दिल तोड़ने वालों को क्या पता, एक दिन उन्हें भी कफ़न में लिपटाया जाएगा। शायरी 6 गरीब की मोहब्बत का मज़ाक मत उड़ाओ, उसके पास देने को बस एक कफ़न ही होता है। शायरी 7 जिस दिन मेरा जनाज़ा उठेगा, तुम्हें...

Janaza (जनाज़ा)

Image
जनाज़ा (Janaza) पर दिल छू लेने वाली शायरी शायरी 1 जब उठा मेरा जनाज़ा , सबने कहा रोना नहीं, कोई पूछे उससे, जिसने खोया सब कुछ, जीना नहीं। शायरी 2 मेरी मौत पर सब हैरान थे, मेरा जनाज़ा देखकर, ज़िन्दगी भर जो खामोश रहा, वो आज बोल पड़ा। शायरी 3 आज उसके दिल में भी मेरा ख़्याल आएगा, जब मेरा जनाज़ा उसकी गली से गुज़र जाएगा। शायरी 4 बड़ी ख़ामोशी से निकला मेरा जनाज़ा यार, कोई आंसू ना बहा, कोई आहट ना सुनी। शायरी 5 शायद अब उसे मेरी याद आए, मेरी क़द्र हो, जब मेरा जनाज़ा उसके घर के सामने से गुज़रे। श...

Qaza (क़ज़ा)

Image
क़ज़ा पर बेहतरीन शायरी का संग्रह शायरी 1 इश्क़ की राह में हर मोड़ पे मिलती है ज़ुदाई, अपनी ही तक़दीर से लड़ता रहा, जब आई क़ज़ा . शायरी 2 ज़िंदगी एक सफ़र है, और मौत है आख़िरी मुक़ाम, क़ज़ा जब भी आएगी, हँस कर करेंगे सलाम. शायरी 3 हर साँस तेरी अमानत है, हर लम्हा तेरा फ़ुर्मान, कब आएगी क़ज़ा , बस यही सोचता है इंसान. शायरी 4 उम्र भर की कमाई, पल भर में लुटा दी, तेरी एक निगाह से, मेरी क़ज़ा भी सज़ा दी. शायरी 5 क्या फ़र्क पड़ता है, जी कर या मर कर, जब क़ज़ा ही लिखी हो, तेरी याद में मर कर. शायरी 6 ज़िंदगी की उलझनें, सुलझती ही नहीं, कब आएगी वो घड़ी, जब आए क़ज़ा कहीं. शायरी 7 ना कोई आसरा, ना कोई ठिकाना है, हर पल तेरी क़ज़ा का इंतज़ार पुराना है. ...