Parwana (परवाना)
इश्क़ की लौ में जलता परवाना : हिंदी शायरी शमा का दीवाना शमा से इश्क़ में जलता है परवाना , फिर भी उसकी लौ में पाता है ठिकाना। अधूरा साफ़र रात भर जला शमा के लिए परवाना , सुबह होते ही बुझ गया, अधूरा साफ़र। मिटने की आरज़ू किस क़दर है मिटने की आरज़ू उसे, लौ में जलता फिरता है हर परवाना । इश्क़ की इंतिहा इश्क़ की इंतिहा है क्या, कोई समझाए, जब से देखा है शमा को, जलता है परवाना । मंज़िल का पता खुद को मिटाकर ही पाता है मंज़िल का पता, शमा के गिर्द घूमता ये बेख़बर परवाना । जुनून-ए-शौक़ ...