Na-umeedi (ना-उम्मीद)
ना-उम्मीदी (Na-umeedi): उम्मीदों के टूटने पर हर राह में अब दिखती है बस ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) , जीवन के हर मोड़ पर बस यही कहानी है। जब से खोई है मंजिल की उम्मीद, हर तरफ, छा गई है रूह पर गहरी ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) की चादर। तारों भरी रात में भी अब कोई ख्वाब नहीं, हर सुबह बस मिलती है हमको ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । दिल में अब नहीं कोई चाहत, कोई आस, हर तरफ फैली है बस गहन ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । जो कभी रंगीन थे, अब बेरंग हैं वो दिन, ले आई है ये ज़िन्दगी कैसी ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) ! हर पल एक नया इम्तिहान, हर पल एक नई हार, बढ़ती जाती है मेरे अंदर ये ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । हौसले पस्त हुए, इरादे भी डगमगाए हैं, छा गई है मेरे मन पर अब ना-उम्मीदी (ना-उम्मीद) । ...