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Jadoo (जादू)

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जादूगरनी दुनिया: जादू भरी शायरी का संग्रह शायरी 1: तेरी आँखों का क्या कहूँ, हर अदा में एक जादू है, जो देख ले एक बार, वो हो जाए बेकाबू है। शायरी 2: मोहब्बत का ये कैसा जादू है, जो सब पर छा जाता है, जो भी इससे मिलता है, बस उसका होकर रह जाता है। शायरी 3: लबों पे मुस्कान, आँखों में शरारत, ये कैसा जादू है, हर बात में तेरी, दिल मेरा तुझपे मरता है। शायरी 4: तेरी यादों का जादू कुछ ऐसा है, जो मिटता नहीं, चाहे कितनी भी दूरियाँ हों, तेरा साथ छूटता नहीं। शायरी 5: हर रात तेरे ख्वाबों का, मेरे दिल पे जादू चलता है, सुबह होते ही फिर तेरी ही ध...

Afsoon (अफ़सून)

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अफ़सून (Afsoon): जादू भरी शायरी शायरी 1 तेरी आँखों का क्या कहूँ, ये कैसा अफ़सून (अफ़सून) है, जो देखे एक बार, वो फिर कहाँ सुकून है। शायरी 2 हर लफ्ज़ में तेरे जादू का अफ़सून (अफ़सून) है, तेरी बातें सुनकर दिल को मिलता सुकून है। शायरी 3 इश्क़ का ये कैसा अफ़सून (अफ़सून) मुझ पर छा गया, हर लम्हा अब तो तेरे ख्यालों में खो गया। शायरी 4 तेरी यादों का हर पल एक अफ़सून (अफ़सून) है, जो दिल को मेरे हर घड़ी करता मजबूर है। शायरी 5 जब से देखा है तुम्हें, ये दुनिया कैसी बदल गई, तेरी चाहत का अफ़सून (अफ़सून) है, जो हर पल मुझमें समा गई। ...

Hoor (हूर)

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हूर (Hoor) पर दिलकश शायरी का संग्रह शायरी 1 वो चाल नहीं, वो तो क़यामत की अदा है, हर नज़र कह रही, वो जन्नत की हूर है। शायरी 2 तेरी आँखों में डूबकर देखा है मैंने, क्या ज़मीन पर कोई ऐसी भी हूर होती है। शायरी 3 चाँद भी शर्मिंदा हो जाए तेरे हुस्न से, ऐसी हूर देखी न किसी ने, न देखी जाएगी। शायरी 4 इतनी ख़ूबसूरती कहाँ से लाई हो तुम, क्या जन्नत से उतरी कोई हूर हो तुम? शायरी 5 नज़र उठा कर देखा, तो क़ायनात रुक गई, उसकी सूरत में दिखी, एक अनमोल हूर । शायरी 6 कदमों में जिसके जन्नत बिछी हो, ...

Parizaad (परीઝાદ)

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परीज़़ाद (Parizaad) पर दिलकश शायरी नूरानी जलवों की दास्तान उसकी ज़ुल्फ़ों में खो जाए चाँदनी रातें, ऐसी है मेरे दिल की परीज़़ाद (परीझ़ाद) की बातें। नज़र भर देखने को तरसते हैं नज़ारे, वो मेरी दुनिया की है अनमोल परीज़़ाद (परीझ़ाद) । जब वो मुस्कुराती है, फ़िज़ा महक उठती है, लगता है जैसे उतर आई हो कोई परीज़़ाद (परीझ़ाद) । खुदा ने बनाया होगा बड़ी फुर्सत से उसे, हर अदा में है झलक उसकी, मेरी परीज़़ाद (परीझ़ाद) । सपनों में आती है, ख्यालों में रहती है, हर पल मेरे संग है मेरी परीज़़ाद (परीझ़ाद) की हस्ती। सितारों ...

Nazneen (नाज़नीन)

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नाज़नीन (Nazneen): एक खूबसूरत एहसास शायरी 1 तेरी आँखें, नाज़नीन , एक गहरा समंदर हैं, जिनमें डूब कर खो जाने को जी चाहता है। शायरी 2 हुस्न तेरा, नाज़नीन , चाँदनी से भी हसीं, हर अदा में तेरी एक अलग ही नूर है। शायरी 3 तेरी बातों में वो जादू है, ऐ नाज़नीन , जो हर दिल को अपनी ओर खींच लेता है। शायरी 4 जब तुम मुस्कुराती हो, नाज़नीन , तो लगता है, जैसे फ़िज़ा में भी खुशबू घुल जाती है। शायरी 5 तेरे हर अंदाज़ में है इक नयापन, नाज़नीन , कोई कैसे ना हो तेरे हुस्न का दीवाना। शायरी 6 ...

Dilruba (दिलरुबा)

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दिलरुबा (Dilruba): मोहब्बत के अल्फ़ाज़ शायरी 1 तेरी अदाओं का क्या कहना, हर अदा में जादू है, मेरी रूह में बसी है तू, मेरी सच्ची दिलरुबा है। शायरी 2 जब से देखा है तुम्हें, होश ओ हवाश खो बैठे, इश्क़ की राहों में तुम ही हो मेरी दिलरुबा । शायरी 3 तेरी निगाहों की गहराई में खोया रहता हूँ, हर साँस में बस तेरा नाम, ओ मेरी दिलरुबा । शायरी 4 चाँद सी सूरत, सितारों सी चमक है तेरी, जन्नत की हूर है तू, मेरी प्यारी दिलरुबा । शायरी 5 मेरा हर ख्वाब, मेरी हर चाहत है तू, ज़िन्दगी का हसीन लम्हा, मेरी दिलरुबा । शायरी 6 तेरी जुल्फों के साए में सुकून मिलता है, हर मुश्किल में सहारा, मेरी दिलरुबा । शायरी 7 सुबह की पहली किरण, शाम का ढलता सूरज, हर पल याद आती है तू, मेरी दिलरुबा । शायरी 8 तेरी बातों में वो जादू है, जो दिल को छू जाए, अल्फाजों में बयाँ न हो, मेरी दिलरुबा । शायरी 9 जब भी देखता हूँ तुझे, दिल को मिलता है करार, मेरी धड़कनों की आवाज़, मेरी दिलरुबा । शायरी 10 इश्क़ की हर मंज़िल, हर डगर है तू ही तू, मेरे सफर का हमसफ़र, मेरी दि...

Muhib (मुहिब)

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मुहिब: दिल की गहराइयों से जब से देखा है मैंने अपनी आँखों में तुम्हें, मेरे हर ख्वाब की ताबीर हो तुम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तुमसे ही रौशन है मेरी ये दुनिया सारी, रूह में बसे हो ऐसे, मेरे सच्चे मुहिब (मुहिब) हो तुम। हर घड़ी, हर पल, बस तुम्हें सोचता हूँ, मेरी इबादत, मेरी चाहत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी मोहब्बत में खोकर मिली है मुझे राहत, मेरी हर आरज़ू, मेरी हर ज़रूरत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। ज़िन्दगी की हर मुश्किल आसान हो गई, जब से तू मिला है, मेरे प्यारे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी अदाओं पर, तेरी बातों पर मैं फ़िदा, मेरी हर साँस में, मेरे दिल में, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। शाम-ओ-सहर तेरी यादों में गुम रहता हूँ, मेरी हर दुआ में शामिल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी हंसी से खिलती है मेरी हर कली, मेरे बाग़-ए-हयात के गुल, मेरे मुहिब (मु...