Zulmat (ज़ुल्मत)
ज़ुल्मत (Zulmat): रोशनी की तलाश में शायरी 1 शहर की हर गली में है इक अजीब सी खामोशी, घेर लेती है हर तरफ से ये ज़ुल्मत हमारी। शायरी 2 आँखों में कैद है वो एक अधूरी ख्वाहिश, कैसे मिटाऊँ दिल से ये ज़ुल्मत की बारिश। शायरी 3 उम्मीद की एक किरण भी नज़र नहीं आती, घनेरी रात में छाई है ये कैसी ज़ुल्मत । शायरी 4 तेरे जाने से दिल में जो खालीपन आया, उसकी परछाईं बन गई है ये ज़ुल्मत । शायरी 5 सूरज की किरणें भी अब चुभने लगी हैं, हर रोशनी में दिखती है मुझे ज़ुल्मत । शायरी 6 ...