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Marham (मरहम)

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मरहम (Marham): घावों पर प्यार की तासीर शायरी 1 ज़ख्म गहरे थे बहुत, दर्द भी था बेशुमार, तेरी मोहब्बत मिली, बन गई मेरा Marham (मरहम) यार। शायरी 2 टूटे हुए दिल को बस तेरी याद ही सहलाती है, हर दर्द का जैसे तू ही तो Marham (मरहम) बन जाती है। शायरी 3 लफ्ज़ नहीं मिलते, दर्द बयां कैसे करें, तेरी चुप्पी ही मेरे ज़ख्मों का Marham (मरहम) बन गई। शायरी 4 इश्क़ में जो चोट लगी, उसका निशां गहरा था, फिर तेरी एक झलक ही मेरा Marham (मरहम) ठहरा था। शायरी 5 दुनिया के सारे गम एक तरफ रख दो, तेरी हंसी ही मेरा सबसे बड़ा Marham (मरहम) है सुनो। ...

Naasoor (नासूर)

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नासूर: दर्द जो गहराता रहे शायरी 1 दिल में छुपा दर्द अब गहरा गया है, बनकर एक नासूर मुझे सता गया है। शायरी 2 यादों का ये ज़हर, हर पल बढ़ता जा रहा है, रूह का नासूर बनकर, जान ले रहा है। शायरी 3 ज़ख्मों पे नमक छिड़कते रहे लोग, और ये दर्द बन गया रूह का नासूर एक रोग। शायरी 4 भूले नहीं वो वादे, जो तुमने किए थे, हर एक वादा, एक नासूर बन गया है। शायरी 5 कहाँ तक सहें ये सितम ज़िंदगी के, हर साँस में बसता है एक नासूर । शायरी 6 रिश्तों की डोर यूँ उलझी पड़ी है, ...

Ghaav (घाव)

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घाव (Ghaav): दिलों के गहरे ज़ख्म और उनकी दास्तान शायरी 1: दर्दों का सिलसिला वो कहते हैं वक्त भर देता है हर घाव , पर कुछ निशान ऐसे होते हैं जो कभी नहीं जाते। शायरी 2: खामोशी की ज़ुबान ज़ुबान से न सही, आँखों से बयां होते हैं, ये दिल के गहरे घाव , जो सहते हैं। शायरी 3: अश्कों की कहानी हर अश्क में छिपी है एक अनकही दास्तान, हर घाव का अपना एक गहरा निशान। शायरी 4: यादों की चुभन वो यादें ही तो हैं, जो देती हैं हर पल चुभन, भरते नहीं ये घाव , चाहे बदल जाए जीवन। शायरी 5: वफ़ा का सिला वफ़ा का सिला हमें कुछ यूं मिला है, हर मोड़ पर दिल को एक नया घाव मिला है। शायरी 6: तन्हाई का साया तन्हाई में जब दिल रोता है चुपचाप, ...

Zakhm (ज़ख़्म)

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ज़ख़्म: दिल की गहराइयों से निकली आवाज़ ज़ख़्म शायरी #1 दिल के हर कोने में, है एक गहरा ज़ख़्म , कौन जाने, क्या छिपा है इस दर्द के पीछे, हम? ज़ख़्म शायरी #2 तेरी यादों से मिले हैं ये कितने गहरे ज़ख़्म , मरहम भी अब बेअसर है, बस यही है गम। ज़ख़्म शायरी #3 कुछ ज़ख़्म भरते नहीं, बस निशान छोड़ जाते हैं, कुछ रिश्ते ऐसे ही खामोशी से टूट जाते हैं। ज़ख़्म शायरी #4 हर हँसी के पीछे छुपा है, कोई पुराना ज़ख़्म , बस ज़माना समझता है, हम खुश हैं हर दम। ज़ख़्म शायरी #5 वक्त ने दिए हैं जो, ये अनमोल ज़ख़्म , इन्हीं से तो सीखा है, जीने का ये क्रम। ज़ख़्म शायरी #6 जब भी छूता हूँ उन यादों को, उभर आता है ज़ख़्म , लगता है जैसे द...

Chubhan (चुभन)

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दिल की चुभन : एहसासों की गहराई दर्द की आहट कभी लफ़्ज़ों की होती है, कभी खामोशी की, दिल में एक गहरी चुभन महसूस होती है। यादों का सिलसिला तेरी यादों की हर एक किरन, आज भी दिल में दे जाती है गहरी चुभन । खामोश दर्द न कहा कुछ, न सुने कुछ, पर एहसास है, खामोशी में भी एक अजीब सी चुभन है। अधूरी बातें कुछ बातें जो अनकही रह गईं, आज भी सीने में बन के चुभन रह गईं। अफ़सोस की आग हर अफसोस एक नया ज़ख्म देता है, ...

Kasak (कसक)

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कसक (Kasak) - दिल को छू लेने वाली शायरी कसक का हर पल दिल में अब भी है वो पहली मुलाकात की कसक , भूल पाया न उसे, चाहे गुज़रे कितने भी पल। अधूरी बात की कसक कह न पाए जो बातें, वो अधूरी रह गईं, आज भी दिल में एक मीठी सी कसक है। इंतज़ार की कसक कब आओगे तुम, इसी आस में बीत रही है ज़िन्दगी, आँखों में है इंतजार की और दिल में कसक । यादों की कसक तेरी यादों की कसक हर पल सताती है मुझको, कैसे कह दूँ कि अब तुम याद नहीं आते मुझको। बिछड़न की कसक वो बिछड़न का मंज़र, वो तेरी आखिरी नजर, आज भी दिल में है उस पल की गहरी कसक । अ...

Tadap (तड़प)

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तड़प (Tadap) - दिलकश शायरियों का संग्रह तड़प की गहराई जो दिल में है वो आँखों से झलक जाती है, तेरी यादों में हर पल ये रूह तड़प जाती है। इंतज़ार की तड़प हर रात करवटें बदलती है, नींद नहीं आती, तेरे दीदार को ये आँखें कैसे ना तड़प जाती। जुदाई की तड़प जुदाई का ज़हर अब और सहा नहीं जाता, तेरी बाहों में आने को ये दिल तड़प रहा है। मोहब्बत की तड़प मोहब्बत की आग में हम ऐसे जलने लगे, तेरी चाहत में हर साँस तड़प ने लगे। ...