Shabaab (शबाब)
नज़रें मिलाओ, दिल में छुपा लो - शबाब की बातें उम्र-ए-रवाँ में ये कैसा नया मोड़ आया है, लबों पर हँसी, आँखों में शबाब छाया है। गुलाबों सी ताज़गी, चाँद सा नूर, तेरा हर अंदाज़ है शबाब से भरपूर। ये मस्तियाँ, ये शरारतें, ये खुमारियाँ, बेशक तेरे शबाब की हैं ये निशानियाँ। नज़रों से कत्ल, अदाओं से घायल, तेरे शबाब की ये कैसी है महफ़िल। जो देखा कभी तेरे चेहरे का जलवा, समझा फिर क्या है असल में शबाब का मतलब। हर क़दम पर बिखरी है ख़ुशबू तुम्हारी, शबाब की मस्ती में डूबी है दुनिया सारी। ...