Fughan (फ़ुग़ाँ)
फ़ुग़ाँ: दर्द-ए-दिल की आवाज़ शायरी 1 दिल में दबा है दर्द, लबों पर है खामोशी, कौन समझे इस दिल की फ़ुग़ाँ , ये तन्हाई। शायरी 2 महफ़िल में भी तन्हा है मेरा दिल, ये क्या है? हर सांस में उठती है एक दर्द भरी फ़ुग़ाँ । शायरी 3 शाम ढले, जब याद तुम्हारी आती है, लबों से निकलती है एक बेबस सी फ़ुग़ाँ । शायरी 4 हर आह में छिपी है, एक कहानी अधूरी, किसको सुनाएँ हम अपनी ये फ़ुग़ाँ , ये दूरी। शायरी 5 चुपचाप सहते रहे ज़माने के सितम, पर दिल से कभी कम न हुई फ़ुग़ाँ । शायरी 6 तूफ़ान मेरे दिल में, आँखों में नमी है, ज़ुबाँ पर ना आ सकी, वो मेरी फ़ुग़ाँ है। शायरी 7 तन्हाई की रातें, अब और भी लंब...