Tanhai (तन्हाई)
तन्हाई का सफर: दिल की आवाज़
शायरी #1
जब दिल में दर्द उठता है और कोई सुनने वाला नहीं होता,
तब वो खामोशियाँ ही हमारी सबसे बड़ी तन्हाई (तन्हाई) बन जाती हैं।
शायरी #2
रात की चादर में लिपटी, एक अजीब सी बात है,
हर आहट से पहले यहाँ मेरी तन्हाई (तन्हाई) जागती है।
शायरी #3
भीड़ में भी अक्सर खुद को अकेला पाया है,
शायद मेरी किस्मत में ही ये तन्हाई (तन्हाई) लिखाई है।
शायरी #4
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो लफ्जों में बयां नहीं होते,
बस आँखों से बह जाते हैं और बन जाती है तन्हाई (तन्हाई)।
शायरी #5
तेरे जाने के बाद ये दिल फिर से संभला नहीं,
तेरी यादों के साथ मेरी तन्हाई (तन्हाई) ने भी मुझे छोड़ा नहीं।
शायरी #6
हर तरफ बिखरे हैं टूटे हुए ख्वाब मेरे,
और इन ख्वाबों के बीच बैठी है मेरी तन्हाई (तन्हाई)।
शायरी #7
खुद से बातें करते हुए दिन गुजर जाता है,
क्या पता था कि ये तन्हाई (तन्हाई) इतनी गहरी होती है।
शायरी #8
वो कहते हैं हम अकेले नहीं, बहुतों के साथ हैं,
मगर उन्हें क्या पता, मेरी तन्हाई (तन्हाई) ही मेरी हमसफ़र है।
शायरी #9
अंधेरों से दोस्ती कर ली है मैंने अब,
क्यूंकि रोशनी में भी अब सिर्फ तन्हाई (तन्हाई) नजर आती है।
शायरी #10
जब से तू दूर गया है, हर दिन एक सा लगता है,
तेरे बिना ये जीवन अब एक अधूरी तन्हाई (तन्हाई) लगता है।
शायरी #11
ख्वाबों की दुनिया भी अब वीरान लगती है,
हर कोने में बस तेरी यादों की तन्हाई (तन्हाई) दिखती है।
शायरी #12
दिल के सारे राज अब हवाओं से कहते हैं,
क्योंकि मेरी तन्हाई (तन्हाई) के सिवा कोई सुनता नहीं है।
शायरी #13
उम्मीदों के दिए बुझ गए, जब से साथ छूटा है,
अब बस अँधेरे और तन्हाई (तन्हाई) का रिश्ता बचा है।
शायरी #14
दर्द की महफ़िल में अक्सर खुद को अकेला पाया,
खुशी में तो सभी थे, गम में सिर्फ तन्हाई (तन्हाई) आई।
शायari #15
रूह को सुकून कहाँ, जब दिल बेकरार हो,
तेरी यादों में खोया, हर पल तन्हाई (तन्हाई) का शिकार हो।
शायरी #16
सूखे पत्तों सी जिंदगी, बिखरी सी पड़ी है,
हर तरफ बस एक गहरी तन्हाई (तन्हाई) खड़ी है।
शायरी #17
कोई समझ ना पाया मेरे दिल का हाल,
सिर्फ मेरी तन्हाई (तन्हाई) ही रही मेरे साथ हर साल।
शायरी #18
चाँद तारों से बातें करना आदत सी बन गई है,
उनकी रोशनी में भी अब सिर्फ तन्हाई (तन्हाई) दिखती है।
शायरी #19
मुस्कुराना भूल गए हैं होंठ अब हमारे,
गमों ने घेर लिया है, और संग है तन्हाई (तन्हाई) के नज़ारे।
शायरी #20
हर कदम पर तेरा साथ ढूंढा था मैंने,
मगर हर कदम पर मिली सिर्फ गहरी तन्हाई (तन्हाई) मुझे।
शायरी #21
दिल में हजार बातें हैं, पर कहने वाला कोई नहीं,
इस खामोशी में ही मेरी तन्हाई (तन्हाई) सिमटी हुई है।
शायरी #22
रोने की वजह तो बहुत मिली, मगर मुस्कुराना भूल गए,
इस शहर की भीड़ में भी अपनी तन्हाई (तन्हाई) से मिल गए।
शायरी #23
वो खुशियों के दिन अब एक सपना सा लगते हैं,
जब से तेरी जुदाई ने हमें तन्हाई (तन्हाई) के हवाले किया है।
शायरी #24
रात भर जागकर सितारे गिनते हैं हम,
क्या पता था, कि तन्हाई (तन्हाई) में भी इतना सुकून होता है।
शायरी #25
हर रिश्ते को निभाते-निभाते थक गए,
आखिर में तो बस तन्हाई (तन्हाई) ही अपनी निकली।
शायरी #26
जिंदगी ने मुझे ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है,
जहाँ हर खुशी से बढ़कर मेरी तन्हाई (तन्हाई) है।
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