मलाल (Malaal) - दिल की गहराइयों से निकली शायरी
रूह को मेरे आज भी एक मलाल (Malaal) है,
तू क्यों बिछड़ा, यही मन में सवाल है।
तू क्यों बिछड़ा, यही मन में सवाल है।
गुज़रे लम्हों का आज भी मुझको मलाल (Malaal) है,
कांच सा टूटा दिल, बिखरा हर ख्याल है।
कांच सा टूटा दिल, बिखरा हर ख्याल है।
एक अनकही बात का अक्सर मलाल (Malaal) रहता है,
क्यों ना कह पाए हम, बस यही एक सवाल रहता है।
क्यों ना कह पाए हम, बस यही एक सवाल रहता है।
ज़िंदगी में कुछ खोने का गहरा मलाल (Malaal) है,
क्या पाया, क्या गँवाया, ये कैसा हाल है।
क्या पाया, क्या गँवाया, ये कैसा हाल है।
उनकी बेरुख़ी का क्या खूब मलाल (Malaal) है,
शायद हमारी चाहत में ही कुछ खलाल है।
शायद हमारी चाहत में ही कुछ खलाल है।
दिल में दबा है एक ऐसा मलाल (Malaal),
जिसकी वजह से हर खुशी बेहाल है।
जिसकी वजह से हर खुशी बेहाल है।
हर साँस के साथ बढ़ता जाता है मलाल (Malaal),
क्यों वो लम्हे लौटे नहीं, बस यही कमाल है।
क्यों वो लम्हे लौटे नहीं, बस यही कमाल है।
इश्क़ में जो ज़ख्म दिया, उसका मलाल (Malaal) रहेगा,
तू भूला दे भले, मुझे याद रहेगा।
तू भूला दे भले, मुझे याद रहेगा।
काँधे पर तेरे सर रखकर रो ना पाए, इस बात का मलाल (Malaal) है,
खामोशी से टूटते रहे, ये कैसी चाल है।
खामोशी से टूटते रहे, ये कैसी चाल है।
वक़्त से पहले जो खो दिया, उसका मलाल (Malaal) है,
अब बस तन्हाई है और मेरा बेहाल है।
अब बस तन्हाई है और मेरा बेहाल है।
क्यों नहीं रोए हम, क्यों छुपाया हर दर्द, इस बात का मलाल (Malaal) है,
अश्कों को आंखों में कैद रखा, ये कैसा जाल है।
अश्कों को आंखों में कैद रखा, ये कैसा जाल है।
जब वो चले गए, तब महसूस हुआ, कितना गहरा मलाल (Malaal) है,
अब तो हर पल उनकी यादों का ही जंजाल है।
अब तो हर पल उनकी यादों का ही जंजाल है।
कुछ अधूरे ख़्वाबों का मुझको मलाल (Malaal) है,
जो पूरे न हो सके, बस यही मलाल है।
जो पूरे न हो सके, बस यही मलाल है।
वादा करके जो तुम तोड़ गए, उस बात का मलाल (Malaal) है,
विश्वास मेरा टूटा, ये कैसा बवाल है।
विश्वास मेरा टूटा, ये कैसा बवाल है।
अपनी ही गलतियों का हरदम मलाल (Malaal) रहता है,
कि काश हम समझ पाते, क्या सच्चा और क्या छद्म है।
कि काश हम समझ पाते, क्या सच्चा और क्या छद्म है।
कभी-कभी यूँ ही दिल में एक मलाल (Malaal) आता है,
कि क्यों ज़िंदगी ने हमें ऐसे मोड़ पर लाया है।
कि क्यों ज़िंदगी ने हमें ऐसे मोड़ पर लाया है।
वो जो नज़रअंदाज़ कर गए, उसका मलाल (Malaal) है,
हमारी वफ़ा पर उनकी बेरुख़ी, क्या मिसाल है।
हमारी वफ़ा पर उनकी बेरुख़ी, क्या मिसाल है।
खामोशियों में भी एक गहरा मलाल (Malaal) छुपा है,
जो कहता है बहुत कुछ, पर कह नहीं पाता है।
जो कहता है बहुत कुछ, पर कह नहीं पाता है।
लबों पर हंसी और दिल में मलाल (Malaal) रखते हैं,
दुनिया को क्या पता, हम क्या-क्या सहते हैं।
दुनिया को क्या पता, हम क्या-क्या सहते हैं।
अधूरे प्रेम कहानियों का ही तो मलाल (Malaal) होता है,
वरना हर आशिक अपनी मंज़िल पा लेता है।
वरना हर आशिक अपनी मंज़िल पा लेता है।
उन बातों का अक्सर मलाल (Malaal) रहता है,
जो कहने की हिम्मत ना जुटा पाए हम।
जो कहने की हिम्मत ना जुटा पाए हम।
आज भी उन भूली हुई मुलाकातों का मलाल (Malaal) है,
काश वो पल थम जाते, ये कैसा ख्याल है।
काश वो पल थम जाते, ये कैसा ख्याल है।
क्यों ना रोका तुम्हें, इस बात का मलाल (Malaal) है,
शायद तुम रुक जाते, अगर दिल में सवाल है।
शायद तुम रुक जाते, अगर दिल में सवाल है।
हर गुज़रे दिन के साथ एक नया मलाल (Malaal) जुड़ जाता है,
लगता है ज़िंदगी ने कुछ कम दे पाया है।
लगता है ज़िंदगी ने कुछ कम दे पाया है।
कभी-कभी सोचता हूँ, क्या हासिल किया मैंने,
बस कुछ यादें और एक गहरा मलाल (Malaal) संजोया मैंने।
बस कुछ यादें और एक गहरा मलाल (Malaal) संजोया मैंने।
इस बेरुखी भरी दुनिया का क्या मलाल (Malaal) करूं,
जब अपने ही साथ ना रहे, किससे गिला करूं।
जब अपने ही साथ ना रहे, किससे गिला करूं।
वो जो ख्वाब देखे थे, उनका अधूरा रहना मलाल (Malaal) है,
हकीकत की राहों में, बस यही एक सवाल है।
हकीकत की राहों में, बस यही एक सवाल है।
दिल की गहराइयों में एक छुपा मलाल (Malaal) है,
जो लबों पर ना आए, ऐसा ये हाल है।
जो लबों पर ना आए, ऐसा ये हाल है।
जाने क्यों, कुछ पाने का नहीं, कुछ खोने का मलाल (Malaal) है,
शायद यही ज़िंदगी की सबसे बड़ी चाल है।
शायद यही ज़िंदगी की सबसे बड़ी चाल है।
हर अधूरी कहानी का अपना एक मलाल (Malaal) होता है,
जो सिर्फ पढ़ने वाले को ही महसूस होता है।
जो सिर्फ पढ़ने वाले को ही महसूस होता है।