Ghaisu (गैसूर)
हुस्न-ए-गैसूर: एक काव्यात्मक सफर केसुलों की मदहोश कर देने वाली खूबसूरती पर 30 से अधिक शायरियां तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा जब भी लहराती है, दिल में मेरे एक तूफानी सी हलचल मचाती है, ऐ मेरे गैसूर। रुख पर जो बिखरे हैं तेरे काले गैसूर, देखकर उन्हें हर दिल हो गया मजबूर। शब-ए-हिज्र में याद आते हैं तेरे गैसूर, दिल की तन्हाई में बन जाते हैं वो नूर। हवा से खेलती जब तेरी लटें आती हैं, खुशबू बिखेरकर दिल को मेरे महकाती हैं, ये तेरे गैसूर। इन गैसूर की कसम, हमने वफा की है, हर सांस तेरी यादों से हमने भरी है। अदा से जब तू अपने गैसूर संवारती है, ...