Deedar (दीदार)
नज़र-ए-इश्क़: दीदार पर दिलकश शायरी आप के दीदार के लिए दिल तरसता है, आप के इंतज़ार में दिल तड़पता है। मेरी आँखें और दीदार आप का, या क़यामत आ गई या ख़्वाब है। देखने के लिए सारा आलम भी कम, चाहने के लिए एक चेहरा और उसका दीदार बहुत। हर पल तेरे दीदार को तरसती हैं आँखें मेरी। दीदार की तमन्ना कल रात रख रही थी, ख़्वाबों की रह-गुज़र में शमएँ जला जला के। क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख कर, जलता हूँ अपनी ताक़त-ए- दीदार देख कर। तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना, मेरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना। जो और कुछ हो तेरी दीद के सिवा मंज़ूर, तो मुझ पे ख़्वाहिश-ए-जन्नत हराम हो जाए। इलाही क्या खुले दीदार की राह, ...