Sanwarna (सँवरना)
सँवरना (Sanwarna): सौंदर्य और भावनाओं की गहराई
Shayari 1
आइना क्या करेगा तेरी खूबसूरती का बयाँ,
जब तू खुद को सँवरना चाहे तो कायनात रुक जाए।
Shayari 2
पलकों में छुपाकर रखा है दीदार तेरा,
ख़ुद को सँवरना छोड़, तेरी यादों में डूबे रहते हैं।
Shayari 3
हर अदा में तेरी एक नई बात है,
तुझे देखे तो दिल चाहे और सँवरना।
Shayari 4
क्या ज़रूरत है तुझे किसी श्रृंगार की,
तेरी सादगी ही काफी है, खुद को सँवरना क्या।
Shayari 5
जब तुम पास होते हो, हर लम्हा खूबसूरत लगता है,
खुद को सँवरना तो बस एक बहाना होता है।
Shayari 6
तेरी आँखों की गहराई में खो जाएँ हम,
दुनिया की फ़िक्र छोड़ खुद को सँवरना छोड़ दें।
Shayari 7
हर सुबह तेरा इंतज़ार करते हैं,
तुझे देखने के लिए खुद को रोज़ सँवरना करते हैं।
Shayari 8
ज़िंदगी की राहों में कभी ठहरे नहीं,
हर मोड़ पर खुद को सँवरना सीखा है हमने।
Shayari 9
तेरी यादों से ही मेरी शामें रंगीन होती हैं,
क्या ज़रूरत है फिर, मुझे खुद को सँवरना?
Shayari 10
मुश्किलों में भी हमने मुस्कुराना सीखा है,
गिरकर फिर उठकर, खुद को सँवरना सीखा है।
Shayari 11
तेरा साथ हो तो हर मंज़िल आसान लगती है,
क्या करना, फिर खुद को यूँ ही सँवरना?
Shayari 12
ये चाँद, ये तारे, ये रातें और तुम,
मिल जाओ तो क्या फिर खुद को सँवरना।
Shayari 13
तेरी एक झलक के लिए दिल बेताब रहता है,
फिर किसी और के लिए क्या खुद को सँवरना।
Shayari 14
लबों पे हँसी और आँखों में चमक लिए,
हर रोज़ निकलते हैं, दुनिया को सँवरना सिखाने।
Shayari 15
तेरी सूरत से ही मेरी सुबह होती है,
तुझे देखूँ तो दिल चाहे खुद को सँवरना।
Shayari 16
ख्वाबों में भी तुमसे ही मुलाक़ात होती है,
हकीकत में क्या खुद को फिर सँवरना।
Shayari 17
दिल की गहराइयों में छुपा है प्यार तेरा,
क्या ज़रूरत है अब किसी को सँवरना।
Shayari 18
तेरी बातों में वो जादू है जो खींच लाता है,
फिर क्या खुद को दुनिया से यूँ सँवरना।
Shayari 19
नज़रों में तुम्हारी आज भी वो कशिश है,
जो हर बार कहती है, थोड़ा और सँवरना।
Shayari 20
तेरी ख़ुशी में ही मेरी दुनिया बसी है,
खुद को सँवरना तो बस एक आदत सी है।
Shayari 21
दिल को तसल्ली मिलती है जब तुम साथ होते हो,
खुद को सँवरना फिर भूल जाते हैं हम।
Shayari 22
तेरी चाहत में खुद को मिटा बैठे हैं,
क्या अब खुद को फिर से सँवरना?
Shayari 23
हर पल तेरी यादों में डूबे रहते हैं,
खुद को सँवरना अब किसे भाता है।
Shayari 24
जब से देखा है तुम्हें, होश खो बैठे हैं,
खुद को सँवरना तो अब याद भी नहीं।
Shayari 25
तेरी हँसी से ही ये दुनिया रौशन होती है,
तेरी मुस्कुराहट ही काफी है, क्या सँवरना।
Shayari 26
दिल की धड़कन में तेरा नाम रहता है,
क्या फ़ायदा खुद को अब और सँवरना।
Shayari 27
तेरी एक नज़र के लिए तरसते हैं हम,
फिर किसी और के लिए क्या सँवरना।
Shayari 28
बिखर जाएँगे तेरी यादों में एक दिन,
खुद को फिर कहाँ मौका मिलेगा सँवरना।
Shayari 29
ये दिल सिर्फ तुम्हारा है, तुम्हें सौंप दिया है,
अब तुम्हें ही है इसे सँवरना या बिखेरना।
Shayari 30
तेरी बातें ही अब मेरे श्रृंगार हैं,
बिन तुम्हारे क्या मुझे खुद को सँवरना।
Shayari 31
मौसम बदले, लोग बदलें, पर
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