Muhib (मुहिब)

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मुहिब: दिल की गहराइयों से

जब से देखा है मैंने अपनी आँखों में तुम्हें,
मेरे हर ख्वाब की ताबीर हो तुम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तुमसे ही रौशन है मेरी ये दुनिया सारी,
रूह में बसे हो ऐसे, मेरे सच्चे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

हर घड़ी, हर पल, बस तुम्हें सोचता हूँ,
मेरी इबादत, मेरी चाहत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी मोहब्बत में खोकर मिली है मुझे राहत,
मेरी हर आरज़ू, मेरी हर ज़रूरत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

ज़िन्दगी की हर मुश्किल आसान हो गई,
जब से तू मिला है, मेरे प्यारे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी अदाओं पर, तेरी बातों पर मैं फ़िदा,
मेरी हर साँस में, मेरे दिल में, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

शाम-ओ-सहर तेरी यादों में गुम रहता हूँ,
मेरी हर दुआ में शामिल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी हंसी से खिलती है मेरी हर कली,
मेरे बाग़-ए-हयात के गुल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

कोई और अब नज़र को भाता नहीं,
मेरे इश्क़ की मंज़िल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरे बिना मैं एक अधूरा सा गीत हूँ,
मेरी धुन, मेरे सुर, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

दिल की गहराइयों में बसे हो तुम,
मेरी हर साँस के हमसफर, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी चाहत में क्या क्या न कर जाऊँ,
मेरी हर ख़ुशी, मेरा सुकून, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

बिन तेरे ये दुनिया सूनी सी लगती है,
मेरी हर सुबह, मेरी हर शाम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तू है तो हर लम्हा जश्न है, हर पल खुशी,
मेरी सारी दौलत, मेरी जिंदगी, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी नज़रों की गहराई में खो जाऊँ मैं,
मेरा सारा जहां, मेरी जन्नत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

मोहब्बत का दरिया, तू ही साहिल मेरा,
मेरी हर लहर, मेरी हर मौज, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

दूर रहकर भी तुम पास हो मेरे,
मेरे ख़यालों के हर पल में, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरा साथ पाकर मैं संवर गया,
मेरी रूह का आइना, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

कभी न छूटे ये दामन तेरा,
मेरी हर हसरत, मेरा मुकद्दर, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी इनायत से मिली है मुझे ज़िंदगी,
मेरी हर साँस की वजह, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

हर महफ़िल में तेरी बात करता हूँ,
मेरी हर गज़ल का उनवान, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी पनाह में मिली है मुझे हर खुशी,
मेरी सारी दुनिया का मरकज़, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

आँखों में तेरा अक्स, दिल में तेरी याद,
मेरी हर धड़कन में, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरे लबों पर जो नाम आता है,
वो मेरा है, क्योंकि मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

खुदा से माँगा था जो, वो मिल गया,
मेरी हर दुआ का फल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी मोहब्बत में रंगा है मेरा हर पल,
मेरी हर सुबह, मेरी हर शाम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

जो सुकून तेरे पहलू में मिलता है,
वो और कहीं नहीं, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

मेरी दुनिया में तुम एक रोशनी हो,
मेरे अंधेरों को दूर करने वाले, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी यादों से महक उठता है दिल मेरा,
मेरी हर साँस में बसी खुशबू, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

हर मुश्किल में जो साथ खड़ा रहा,
मेरा सच्चा हमदर्द, मेरा मुहिब (मुहिब) हो तुम।

मेरी हर तमन्ना, हर ख्वाहिश पूरी हुई,
जब से मेरी जिंदगी में आए, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी बाहों में ही मेरा घर है,
मेरी हर मंजिल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

दुनिया की हर खुशी फीकी लगे,
जब तक न हो तुम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

मेरी हर खामोशी में भी तुम हो,
मेरी हर बात का मतलब, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

इश्क़ की राह में, तू ही रहबर मेरा,
मेरी हर डगर का निशान, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी एक झलक से बिखर जाए हर गम,
मेरी हर खुशी की वजह, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

ये दिल की दास्तां तुझसे ही है,
मेरी हर कहानी का आगाज़, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

हर पल तेरा इंतजार करता हूँ,
मेरी हर साँस में शामिल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

तेरी मोहब्बत में रूहानी हो गया हूँ,
मेरे जिस्म-ओ-जान के मालिक, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम।

"हर मुहिब (मुहिब) के दिल में एक अलग कहानी होती है, उसे पहचानें।" ✨💖

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