Parwana (परवाना)
इश्क़ की लौ में जलता परवाना: हिंदी शायरी
शमा का दीवाना
शमा से इश्क़ में जलता है परवाना,
फिर भी उसकी लौ में पाता है ठिकाना।
अधूरा साफ़र
रात भर जला शमा के लिए परवाना,
सुबह होते ही बुझ गया, अधूरा साफ़र।
मिटने की आरज़ू
किस क़दर है मिटने की आरज़ू उसे,
लौ में जलता फिरता है हर परवाना।
इश्क़ की इंतिहा
इश्क़ की इंतिहा है क्या, कोई समझाए,
जब से देखा है शमा को, जलता है परवाना।
मंज़िल का पता
खुद को मिटाकर ही पाता है मंज़िल का पता,
शमा के गिर्द घूमता ये बेख़बर परवाना।
जुनून-ए-शौक़
जुनून-ए-शौक़ ने उसे खींच लिया है ऐसा,
कि आग से डरता नहीं, बेचैन परवाना।
ज़िंदगी का फ़साना
क्या खूब है तेरी ज़िंदगी का ये फ़साना,
जलकर भी मुस्कुराता है ए परवाना।
शमा की कहानी
शमा की हर बात में छुपा है ये राज़ गहरा,
कि कैसे दीवाना हुआ एक छोटा सा परवाना।
वफ़ा का पैग़ाम
अंजाम-ए-इश्क़ की उसे परवाह नहीं,
बस वफ़ा का पैग़ाम है, ये परवाना।
खुद को मिटा दे
कहती है शमा कि खुद को मिटा दे तू,
पर ख़ुद में ही जलता है ये परवाना।
इंतिज़ार की आग
कब तक जलेगा इंतिज़ार की आग में,
आख़िर बुझ जाएगा ये बेचारा परवाना।
मशाल-ए-मोहब्बत
हर रात जलाता है मशाल-ए-मोहब्बत,
और ख़ुद ही जलता है ये दीवाना परवाना।
मौत से बेख़ौफ़
इश्क़ में मौत से भी बेख़ौफ़ हो जाता है,
शमा की क़ुर्बत में जलता है परवाना।
तन्हाई का साथी
तन्हाई की रातों में शमा ही है साथी,
और उसकी रौशनी में जी रहा परवाना।
दीवानगी का आलम
दीवानगी का आलम है ये, शमा भी हैरान है,
कैसे मिटने पे तुला है एक छोटा सा परवाना।
इश्क़ का पैग़ाम
हर रात लेकर आता है इश्क़ का पैग़ाम,
जलकर भी कहता है, "हाँ, मैं हूँ परवाना।"
अंतिम विदाई
जब तक साँस है, शमा पे जान लुटाएगा,
अंतिम साँस तक है वो सच्चा परवाना।
आँखों में रौशनी
उसकी आँखों में है शमा की ही रौशनी,
ख़ाक होकर भी चमकता है परवाना।
अटूट बंधन
अटूट बंधन है शमा और परवाना का,
दोनों एक दूजे के बिन हैं बेगाना।
इश्क़ का मोल
मोल क्या जाने वो दुनिया, इश्क़ का,
जो नहीं समझा शमा-ओ-परवाना।
धुएं में भी आस
धुएं में भी उसे शमा की आस दिखती है,
ये कैसा है उसका तड़पता परवाना।
क़ुर्बानी का राज़
क़ुर्बानी में छुपा है इश्क़ का हर राज़,
शमा के लिए जीता है ये परवाना।
इश्क़ का आग़ाज़
जहां इश्क़ का आग़ाज़ होता है,
वहीं से उड़ता है ये परवाना।
दर्द-ए-दिल
दर्द-ए-दिल की हर आह में है उसका ज़िक्र,
जिसकी याद में जलता है ये परवाना।
हर रात का वादा
शमा से हर रात करता है ये वादा,
कि सुबह तक जला रहेगा परवाना।
इश्क़ का सफ़र
रूह का ये इश्क़ का सफ़र है अनोखा,
शमा के बिना अधूरा है परवाना।
अस्तित्व का सार
क्या है उसके अस्तित्व का सार,
जो शमा पे मिटता है, वो है परवाना।