Mehndi (मेहंदी)
मेहंदी के रंग: प्रेम और जज़्बात की शायरी
शायरी 1
हाथों में रची है जबसे तुम्हारी मोहब्बत की मेहंदी,
हर धड़कन, हर साँस बन गई है जैसे कोई बंदगी।
शायरी 2
खुशबू तेरी मेहंदी की मेरे साँसों में बसी है,
जैसे तेरी चाहत मेरे दिल में रची है।
शायरी 3
रंगत तेरी मेहंदी की देख के दिल मेरा बहका,
हर धड़कन में बस तू ही तू, और कुछ नहीं चमका।
शायरी 4
इंतज़ार की घड़ी में मेहंदी का रंग गहराया,
तेरी यादों ने फिर से इस दिल को बहलाया।
शायरी 5
सजी हैं हथेली पर जब तेरी मोहब्बत की मेहंदी,
हर ख्वाइश, हर दुआ बस तेरी बन के है रहती।
शायरी 6
प्यार का हर निशान तेरी मेहंदी में देखा मैंने,
हर नक्श में, हर रंग में, बस तेरा अक्स पहचाना मैंने।
शायरी 7
जब-जब निहारूँ अपनी हथेली पर मेहंदी का रंग,
हर पल महसूस होता है, जैसे तू है मेरे संग।
शायरी 8
तेरी मेहंदी की लाली में देखा है मैंने प्यार अपना,
हर एक बून्द में चमक रहा है, मेरा हसीन सपना।
शायरी 9
मेहंदी के बहाने ही सही, तेरा नाम तो आया,
मेरे सूखे हुए दिल में, जैसे फिर से सावन छाया।
शायरी 10
रस्मों की बेड़ियों में बँधकर भी, मेहंदी ने जो रंग दिखाया,
उस रंग में भी मैंने, बस तेरा ही प्यार पाया।
शायरी 11
मेहंदी तो बस एक बहाना है, तेरे करीब आने का,
वरना कौन समझेगा, इस दिल के बहकाने का।
शायरी 12
तेरी यादों की मेहंदी रची है मेरे हाथों में,
खुशबू इसकी घुल गई है, मेरी हर बातों में।