Khichav (खिंचाव)

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खिंचाव (Khichav): दिल की गहराइयों से...

शायरी 1

कभी दूरियों का होता है, कभी नज़दीकियों का.
अजब सा है ये खिंचाव, रिश्तों की गहराइयों का.

शायरी 2

उसकी आँखों में वो गहरा खिंचाव था,
जो हर बार मुझे अपनी ओर ले आता था.

शायरी 3

दिल में रहता है एक अजीब सा खिंचाव,
जैसे कोई डोर खींचे, बिन बताए, बिन पूछे.

शायरी 4

क़िस्मत की डोर में कैसा ये खिंचाव है,
जिसे चाहा वो दूर, जो नहीं, वो पास है.

शायरी 5

मुश्किलों में भी एक उम्मीद का खिंचाव है,
टूटते तारों में भी एक नया एहसास है.

शायरी 6

तेरे वादों में वो जादूई खिंचाव था,
जो हर दफ़ा मुझे तेरी ओर खींच लाता था.

शायरी 7

समंदर की लहरों सा ये दिल का खिंचाव है,
किनारे से दूर होकर भी उसी की ओर भागता है.

शायरी 8

हर साँस में तेरा नाम, हर धड़कन में तेरा खिंचाव,
ये कैसा प्यार है, जिसका नहीं कोई जवाब.

शायरी 9

रात की ख़ामोशी में चाँद का खिंचाव है,
उसी तरह मेरे दिल में तेरी यादों का बहाव है.

शायरी 10

जब तक रूह में जान है, ये खिंचाव रहेगा,
तेरी चाहत का मुझ पर हमेशा असर रहेगा.

शायरी 11

अल्फाज़ में कहाँ वो खिंचाव जो आँखों में है,
तेरी चुप्पी में भी एक गहरी कहानी है.

शायरी 12

मोहब्बत में अक्सर ऐसा खिंचाव होता है,
जितना दूर जाओ, उतना ही करीब आने को मन करता है.

शायरी 13

वक़्त की रेत पर पैरों के निशान सा खिंचाव,
मिट जाते हैं पल में, पर यादों में रहते हैं.

शायरी 14

रिश्तों की नाज़ुक डोर में रहता है एक खिंचाव,
ज़्यादा कस लो तो टूट जाती, ढीली छोड़ो तो छूट जाती.

शायरी 15

हर सुबह तेरी यादों का मुझ पर होता है खिंचाव,
दिन भर फिर उसी तसव्वुर में गुज़र जाता है मेरा हर भाव.

शायरी 16

क्या करें इस दिल का, जिसमें है इतना खिंचाव,
हर बार टूटकर भी, फिर से जोड़ने का सुझाव.

शायरी 17

अधूरी सी मुलाकातों में भी एक खिंचाव था,
बिछड़ने के बाद भी तेरा ही तो भाव था.

शायरी 18

चाहे कितनी भी हो दूरियाँ, ये खिंचाव नहीं मिटता,
रूह से रूह का रिश्ता, यूँ ही नहीं कटता.

शायरी 19

तेरी यादों का वो मीठा सा खिंचाव है,
हर पल महसूस होता, जैसे तू मेरे पास है.

शायरी 20

जीवन के हर मोड़ पर मिलता है एक खिंचाव,
कभी सही राह दिखाता, कभी देता उलझाव.

शायरी 21

ख़्वाबों में भी होता है तेरा खिंचाव,
नींद खुलते ही ढूँढते हैं तुम्हें ये मेरे भाव.

शायरी 22

ये कैसा बंधन है, कैसा है ये खिंचाव,
बिना मिले भी लगता है, जैसे जन्मों का है लगाव.

शायरी 23

तेरी धुन में रहता है दिल में खिंचाव सा,
हर तार छेड़ने पर तेरी ही आवाज़ का प्रभाव सा.

शायरी 24

हवाओं में भी महसूस होता है तेरा खिंचाव,
जैसे ख़ुशबू बनकर तू आस-पास है, हर ओर तेरा फैलाव.

शायरी 25

कुछ अनकहे वादों का, कुछ अनसुनी बातों का,
दिल में रहता है हमेशा एक गहरा खिंचाव.

शायरी 26

तारों भरी रात में, दूर गगन का खिंचाव,
जैसे कोई अनजानी पुकार, मन में भर जाता है प्रभाव.

शायरी 27

हर लफ़्ज़ में तेरी मौजूदगी का खिंचाव है,
मेरी शायरी का तू ही तो पहला और आख़िरी भाव है.

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