Khichav (खिंचाव)
खिंचाव (Khichav): दिल की गहराइयों से... शायरी 1 कभी दूरियों का होता है, कभी नज़दीकियों का. अजब सा है ये खिंचाव , रिश्तों की गहराइयों का. शायरी 2 उसकी आँखों में वो गहरा खिंचाव था, जो हर बार मुझे अपनी ओर ले आता था. शायरी 3 दिल में रहता है एक अजीब सा खिंचाव , जैसे कोई डोर खींचे, बिन बताए, बिन पूछे. शायरी 4 क़िस्मत की डोर में कैसा ये खिंचाव है, जिसे चाहा वो दूर, जो नहीं, वो पास है. शायरी 5 मुश्किलों में भी एक उम्मीद का खिंचाव है, टूटते तारों में भी एक नया एहसास है. शायरी 6 ...