Ranjha (राँझा)
राँझा की धुन में खोए दिल की बात
शायरी 1
इश्क़ की राह में भटकता मेरा दिल,
बन गया है आज फिर एक नया राँझा (राँझा)।
शायरी 2
तेरी धुन में मगन, मेरा हर पल
जैसे बजता हो कोई राँझा (राँझा) की बांसुरी का सरगम।
शायरी 3
हीड़ के बिना राँझा (राँझा) अधूरा है,
तेरे बिना मेरा जीवन भी इतना ही सूना है।
शायरी 4
दर्द-ए-जुदाई में जलते रहे, हर पल तेरी याद में राँझा (राँझा) बने रहे।
शायरी 5
मोहब्बत में तेरी, सब कुछ लुटा दिया,
तेरा ही बन के, राँझा (राँझा) नाम कमा लिया।
शायरी 6
दीवानगी का आलम कुछ ऐसा है,
हर अदा में तेरा राँझा (राँझा) ही बसता है।
शायरी 7
इश्क़ की अग्नि में जल कर, आज खुद को राँझा (राँझा) पाया है।
शायरी 8
दुनिया की परवाह नहीं करता,
जब से तेरा राँझा (राँझा) बना हूँ मैं।
शायरी 9
बांसुरी की धुन में, तेरा नाम पुकारता,
तेरा दीवाना, तेरा राँझा (राँझा) हर पल तुझे चाहता।
शायरी 10
यादों के जंगल में खोया है,
तेरे प्यार में राँझा (राँझा) सोया है।
शायरी 11
हर रात तेरी ख्वाबों में गुजरती है,
यह ज़िन्दगी राँझा (राँझा) की तरह भटकती है।
शायरी 12
जब से देखा है तुझे, होश खो बैठा,
तेरा ही बन गया हूँ, तेरा राँझा (राँझा) हो बैठा।
शायरी 13
इश्क़ की कसौटी पर खरा उतरा है,
तेरी हीर का राँझा (राँझा) कितना प्यारा है।
शायरी 14
दुनिया वाले लाख करें बातें,
मैं तो हूँ तेरा राँझा (राँझा), दिल में तेरी यादें।
शायरी 15
बिरहा की आग में तपते रहे,
तेरी चाहत में राँझा (राँझा) बने रहे।
शायरी 16
हर साँस में तेरा नाम, हर धड़कन में तेरी याद,
मैं हूँ तेरा राँझा (राँझा), तू है मेरी फरियाद।
शायरी 17
प्यार का ऐसा रोग लगा, कि बन गया मैं तेरा राँझा (राँझा)।
शायरी 18
इश्क़ का पैगाम, दिलों का संगम,
मैं तेरा राँझा (राँझा), तू मेरी हमदम।
शायरी 19
हर सू बस तेरी ही तलाश है,
तेरा यह राँझा (राँझा) कब से बेकरार है।
शायरी 20
सपनों की दुनिया में खोया रहता हूँ,
तेरा राँझा (राँझा) बन के जीता रहता हूँ।
शायरी 21
दिल की हर गली में, तू ही तू है,
मेरा यह राँझा (राँझा) सिर्फ तेरा ही है।
शायरी 22
जब तक साँसें चलेंगी, तुझे ही चाहूँगा,
तेरा ही राँझा (राँझा) बनकर, हर जन्म आऊँगा।
शायरी 23
तेरे इश्क़ में पागल हुए हैं,
आज हम सच्चे राँझा (राँझा) हुए हैं।
शायरी 24
दिल की गहराई में, बस तेरा बसेरा,
हर पल तेरी याद में, जीता है राँझा (राँझा) तेरा।