Ranj (रंज)

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रंज-ओ-ग़म: दिल की गहराइयों से निकली शायरियां

शायरी 1

ज़िंदगी एक लंबा सफ़र है, और हम चले जा रहे हैं,
हर मोड़ पर एक नया रंज, दिल में छुपाए जा रहे हैं।

शायरी 2

वो कहते हैं, भुला दो सब ग़म,
कैसे बताएं, हर रंज ही तो है मेरा हमदम।

शायरी 3

अश्कों की बारिश में, दिल का शहर डूबा है,
तेरा दिया हर रंज, अब मेरा महबूब है।

शायरी 4

दवा भी बेअसर है, दुआ भी है खामोश,
मेरा हर रंज, बन गया है मेरा जोश।

शायरी 5

किसने कहा कि खुशियों में ही है ज़िन्दगी,
कभी-कभी तो हर रंज भी एक कहानी कहता है।

शायरी 6

गमों की आहटें अब दिल को नहीं डरातीं,
क्यूंकि हर रंज ने मुझको मजबूत बना दिया।

शायरी 7

भुला दूं कैसे वो लम्हें, वो बातें, वो वादे,
हर रंज की एक दास्तान है, मेरे अपने इरादे।

शायरी 8

अंधेरों से डर नहीं लगता अब,
हर रंज एक रौशनी की तरह जला है अब।

शायरी 9

टूटे हुए ख्वाबों की बिखरी है तस्वीर,
हर रंज ने खींच दी है, एक नई तकदीर।

शायरी 10

जो ज़ख्म तुमने दिए, वो दिल में संजोए हैं,
हर रंज को हमने अब गहना बनाए हैं।

शायरी 11

सुकून की तलाश में भटकते रहे उमर भर,
मिला तो बस हर रंज का एक नया सफर।

शायरी 12

वो कहते थे, प्यार में सब जायज़ है,
हमने हर रंज को फिर भी, दिल से लगाया है।

शायरी 13

दिल में दबाए हैं कितने ही राज़,
हर रंज की अपनी है एक नई आवाज़।

शायरी 14

चांद तारों सी चमक थी आँखों में कभी,
अब हर रंज की परछाई है आँखों में जमीं।

शायरी 15

ये जो खामोशी है मेरे होंठों पर,
हर रंज की है एक लंबी दास्तां अंदर।

शायरी 16

ज़िन्दगी ने दिए हैं कई इम्तिहान,
हर रंज ने सिखाया है नया एक पाठ।

शायरी 17

जब से तुमने छोड़ा, हर शै उदास है,
सिर्फ़ रंज ही है, जो मेरे पास है।

शायरी 18

क्या बताऊं तुम्हें दिल का हाल, ए दोस्त,
हर साँस में बसा है, एक गहरा रंज

शायरी 19

हजारों खुशिया भी अब बेमानी लगती हैं,
जब से हर रंज से दोस्ती पुरानी लगती है।

शायरी 20

बदल गया है सब, तेरी मेहरबानी से,
हर रंज भी अब लगने लगा है प्यारा सा।

शायरी 21

कभी फुर्सत मिले तो याद करना हमें,
हमारे हर रंज में सिर्फ तुम्हारी कमी है।

शायरी 22

कौन कहता है कि बस खुशियाँ ही हैं मंजिल,
हर रंज की अपनी एक कहानी है, और एक हासिल।

शायरी 23

गुज़र गए वो दिन जब हँसते थे हम दिल से,
अब तो हर रंज को छुपा लेते हैं मुश्किल से।

शायरी 24

ज़िंदगी की राहों में मिलते रहे कांटे,
हर रंज से सीखा, कैसे खुद को संभाले।

शायरी 25

वो कहते हैं, भूल जाओ जो हुआ,
पर हर रंज ने मुझमें एक नया शऊर दिया।

शायरी 26

तन्हाई की शामों में अक्सर ये ख्याल आता है,
क्या मेरा हर रंज, तुम्हें भी सताता है?

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