Shabaab (शबाब)
नज़रें मिलाओ, दिल में छुपा लो - शबाब की बातें
उम्र-ए-रवाँ में ये कैसा नया मोड़ आया है,
लबों पर हँसी, आँखों में शबाब छाया है।
गुलाबों सी ताज़गी, चाँद सा नूर,
तेरा हर अंदाज़ है शबाब से भरपूर।
ये मस्तियाँ, ये शरारतें, ये खुमारियाँ,
बेशक तेरे शबाब की हैं ये निशानियाँ।
नज़रों से कत्ल, अदाओं से घायल,
तेरे शबाब की ये कैसी है महफ़िल।
जो देखा कभी तेरे चेहरे का जलवा,
समझा फिर क्या है असल में शबाब का मतलब।
हर क़दम पर बिखरी है ख़ुशबू तुम्हारी,
शबाब की मस्ती में डूबी है दुनिया सारी।
क्या हसीं मंज़र है, क्या हसीं फ़ज़ा,
जब तेरे शबाब ने ली अंगड़ाई।
हर सुबह तेरी आँखों से जगती है दुनिया,
तेरा शबाब हर शाम को रंगीन बनाता है।
ये सुर्ख़ होंठ, ये गहरी आँखें,
तेरे शबाब की क़सम, जान ले गईं।
फूलों में रंग, सितारों में चमक,
सब तेरे शबाब की है हल्की झलक।
क्या करें तारीफ़ तेरे हुस्न-ए-बेमिसाल की,
क़यामत ढा रहा है तेरा ये शबाब।
हसीन चेहरा, मदहोश अदाएँ,
तेरा शबाब हर दिल को बहकाए।
ये जो बिखरी हुई हैं ज़ुल्फ़ें तेरी,
शबाब की घटाएँ हैं घेरें तेरी।
चाँद भी शर्मा जाए तेरा दीदार करके,
जब तू निकले अपने शबाब का इज़हार करके।
तेरा हुस्न, तेरी अदा, तेरा शबाब,
हर बात है लाजवाब, हर बात है कमाल।
दिल की धड़कन, रूह का करार,
तेरा शबाब ही तो है मेरा प्यार।
तेरा हर अंदाज़ है कुछ ख़ास,
शबाब की खुशबू तेरे आस-पास।
सजा लो महफ़िल, कर लो दीदार,
देखो कैसे आया है शबाब का खुमार।
मौसम-ए-गुल है या तेरा शबाब,
हर तरफ है छाई बस ख़ुशगवार आब।
लबों पर तबस्सुम, निगाहों में मस्ती,
तेरा शबाब है एक हसीन हस्ती।
जवानी का आलम है, हुस्न की घटा,
हर तरफ है फैला तेरा शबाब।
तेरी आँखें हैं गहरी झील सी,
जिनमें डूबा है मेरा शबाब।
खिलते फूलों की सी है ताज़गी,
हर लम्हा बढ़ रहा है तेरा शबाब।
जोश-ए-जवानी, हुस्न-ए-बहार,
तेरे शबाब से है रौनक-ए-संसार।
छलकता है जाम, बहकती है शाम,
जब तेरे शबाब का होता है सलाम।
काजल की धार, बिंदी का कमाल,
शबाब तेरा है बेमिसाल।
हर अदा में है तेरी एक जादू,
छलकता है तुझसे तेरा शबाब।
तेरी चाल में है एक मदहोशी,
तेरा शबाब है दिलकश, ऐ होशवालों!
बहारों ने भी ओढ़ी है चादर तेरी,
जब से देखा है तेरा हसीं शबाब।
हर सांस में बसी है तेरी खुशबू,
तेरा शबाब है मेरी आरज़ू।
तेरी एक झलक से रौशन जहां है मेरा,
शबाब की दौलत है हुस्न-ए-यार तेरा।
तेरी हर बात में, हर अदा में, है कुछ तो ख़ास,
क़यामत ढाए तेरा ये महकता शबाब।
गुलशन की हर कली तुझसे है शरमाई,
तेरी जवानी का शबाब है हर तरफ़ छाई।