Gham (ग़म)

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ग़म-ए-ज़िंदगी: दिल छू लेने वाली शायरियाँ

शायरी 1

हर साँस में है दर्द, हर दिल में है ग़म,
क्या कहें इस ज़माने से, क्या खोया क्या पाया हम।

शायरी 2

ज़िंदगी की राहों में, ग़म का सफ़र है जारी,
खुशियों की तलाश में, हर शब है हमारी भारी।

शायरी 3

जब रात गहराए, और तनहाई का साया हो,
तब हर एक पल में बस, तेरे ग़म का एहसास हो।

शायरी 4

आँखों में नमी है, लबों पे खामोशी है,
दिल में छुपाए बैठे हैं, ये कैसा ग़म है।

शायरी 5

बदलते मौसमों में भी, ये दिल ना बदला,
हर साँस के साथ है, मेरा ये ग़म का सिलसिला।

शायरी 6

कभी तो ढलेगी रात, कभी तो सहर होगी,
कब तक रहेगा दिल में, ये ग़म की लहर होगी।

शायरी 7

फ़ुर्सत में याद आए, तो मुस्कुरा लेना,
हम तो ग़म में भी हँसते हैं, तुम भी सीख लेना।

शायरी 8

किस बात का करें शिकवा, किससे करें गिला,
हर मोड़ पर मिला हमें, बस ग़म का सिला।

शायरी 9

दिलों को जोड़ कर, फिर तोड़ देने वाले,
तुम्हें क्या ख़बर, कितना है गहरा ये ग़म

शायरी 10

तेरे जाने के बाद, हर चीज़ बेजान है,
बस रह गया है एक, तेरा दिया हुआ ग़म

शायरी 11

सितारों से पूछो, मेरी रात का फ़साना,
कैसे सहते हैं हम, हर रात ये ग़म का तराना।

शायरी 12

आँखों से बरसता पानी, दिल में है तड़प,
खुशियों से दूर है, ये ग़म की है पकड़।

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