Dhokha (धोखा)
धोखा (Dhokha): दर्द-ए-दिल की शायरी धोखे की दास्तान हर मोड़ पर अपनों से मिला है ऐसा ज़हर, कि अब तो लगने लगा है हर रिश्ता धोखा है। तेरी आँखों में देखी थी मैंने वफ़ा की चमक, पता न था वो भी एक गहरा धोखा था। मोहब्बत के नाम पर तूने जो दिए ज़ख्म, उन्हें भर नहीं पाया यह दिल का धोखा है। जिस पर किया था भरोसा हद से ज़्यादा, उसी की चाल थी, उसी का धोखा था। खुली आँखों से देखे थे जो हसीन सपने, वो सब भी निकले महज एक धोखा । ज़िंदगी ने सिखा दिया है यह नया सबक, खुशी के लिबास में भी छुपा होता है धोखा । वो वादा, वो कसमें, सब झूठी निकली, तेरी हर बात में था बस एक बड़ा धोखा । दिल में लेकर दर्द, फिर भी मुस्कुराते हैं हम, क्योंकि हँसना भी आजकल एक धोखा है। ...