Bekaar (बेकार)
दिल की गहराइयों से: बेक़ार पर ३० शायरी
शायरी 1
कुछ ख्वाब थे जो दिल में सजाये थे,
तेरी बेरुखी ने सब को बेकार कर दिया।
शायरी 2
हर कोशिश मेरी अब लगती है बेकार,
जब से छोड़ा है तूने मेरा साथ, यार।
शायरी 3
ज़िन्दगी के पन्ने पलट कर देखे हैं कई बार,
तेरे बिना हर कहानी लगती है बेकार।
शायरी 4
अकेलेपन की रातें, अब ये दिन भी क्या गिनूं,
तेरी चाहत के बिना, सब कुछ है बेकार।
शायरी 5
जो ना हो साथ तेरा, ये दुनिया भी क्या काम की,
मेरी हर खुशी, हर पल, तेरे बिना है बेकार।
शायरी 6
कहने को तो बहुत कुछ कहा है हमने,
मगर जो दिल ना समझे, वो बातें हैं बेकार।
शायरी 7
इश्क़ का ये खेल, कभी समझ ना आया,
बिछड़ के तुमसे, हर रिश्ता लगा बेकार।
शायरी 8
वो वक़्त भी क्या था, जब तुम साथ थे मेरे,
अब हर पल तुम्हारे बिना है बेकार।
शायरी 9
अंजाम-ए-इश्क़ की फिक्र अब किसे है,
जब दिल ही हो चुका है मेरा बेकार।
शायरी 10
ये दुनिया की दौलत, ये शोहरत भी क्या,
अगर दिल में ना हो प्यार, सब कुछ बेकार।
शायरी 11
नज़रों की भाषा तुम समझ ना पाए,
अब हर कोशिश लगती है बेकार।
शायरी 12
जो वादे किए थे, वो सारे टूटे,
इन टूटे वादों का हिसाब है बेकार।
शायरी 13
ख़ामोशी से हमने सब सह लिया,
शिकायतें करना भी अब है बेकार।
शायरी 14
वो राते, वो बातें, सब कुछ याद है मुझे,
पर याद करना भी अब लगता है बेकार।
शायरी 15
तेरी तस्वीर को अब भी देखता हूँ मैं,
पर ये देखना भी अब लगता है बेकार।
शायरी 16
माना कि तू नहीं है मेरी किस्मत में,
पर तेरे बिन जीना भी है बेकार।
शायरी 17
क्या फायदा ऐसी हंसी का यारों,
जो दिल से ना निकले, वो है बेकार।
शायरी 18
किताबों में ढूंढा, रिश्तों में तलाशा,
सच्ची मोहब्बत के बिना सब ज्ञान है बेकार।
शायरी 19
हर आंसू को छुपाया, हर दर्द को सहा,
जिसे कद्र ना हो, उसके लिए रोना बेकार।
शायरी 20
अब तो हर सुबह भी लगती है अँधेरी,
जब तेरे प्यार का सूरज हो गया बेकार।
शायरी 21
ख्वाहिशों के सारे महल ढह गए,
तेरे बिना हर आस है बेकार।
शायरी 22
ये दुनिया, ये महफ़िल, सब कुछ है पराया,
जब अपने ही हो जाएं बेकार।
शायरी 23
वफ़ा की कसमें, वादों के मेले,
गर टूटे दिल तो सब कुछ है बेकार।
शायरी 24
हर धड़कन, हर साँस, तेरे नाम की थी,
अब तेरे बिन ये धड़कन भी है बेकार।