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Hoor (हूर)

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हूर (Hoor) पर दिलकश शायरी का संग्रह शायरी 1 वो चाल नहीं, वो तो क़यामत की अदा है, हर नज़र कह रही, वो जन्नत की हूर है। शायरी 2 तेरी आँखों में डूबकर देखा है मैंने, क्या ज़मीन पर कोई ऐसी भी हूर होती है। शायरी 3 चाँद भी शर्मिंदा हो जाए तेरे हुस्न से, ऐसी हूर देखी न किसी ने, न देखी जाएगी। शायरी 4 इतनी ख़ूबसूरती कहाँ से लाई हो तुम, क्या जन्नत से उतरी कोई हूर हो तुम? शायरी 5 नज़र उठा कर देखा, तो क़ायनात रुक गई, उसकी सूरत में दिखी, एक अनमोल हूर । शायरी 6 कदमों में जिसके जन्नत बिछी हो, ...