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Showing posts from 2026

Narazgi (नाराज़गी)

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दिल की गहराइयों से: नाराज़गी पर 30+ दिल छू लेने वाली शायरियाँ नाराज़गी की धुन कुछ बातों पर उनकी हमसे हुई नाराज़गी , कम नहीं थी, पर फिर भी उन्हें प्यार करते हैं हम आज भी। खामोश जुबां उनकी खामोशी में भी एक नाराज़गी छिपी थी, जो जुबां से ना सही, आँखों से बयां होती थी। इश्क की राह इश्क की राह में अक्सर ये नाराज़गी आती है, कभी मुस्कुराती, कभी दिल को बहुत सताती है। दर्द का एहसास जब उनकी नाराज़गी का एहसास होता है, मेरा ये बेकरार दिल बहुत उदास होता है। छोटी सी बात एक छोटी सी बात पर इतनी नाराज़गी क्यों? क्या मेरा प्यार उनके लिए इतना कम...

Berukhi (बेरुख़ी)

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बेरुख़ी (Berukhi): दर्द और अल्फाज़ का संगम तेरी खामोशी में भी वो बात थी, जो छुपाए थी तेरी बेरुख़ी की रात थी। हर लफ्ज़ में तेरी बेरुख़ी का असर था, मेरे दिल में बस यही एक डर था। इश्क़ में मिली बस यही बेरुख़ी , ज़िंदगी भर का अब यही है दुख़ी। क्या बताऊँ तेरी बेरुख़ी का आलम, हम तो तेरे बिना बेहाल हैं सनम। उसकी एक निगाह में थी लाखों बेरुख़ी , और हम थे कि बस प्यार ही देखते रहे। हर रात जाग कर तेरी यादों में गुम, तेरी बेरुख़ी ने कर दिया है ये सितम। तेरी बेरुख़ी का अंदाज़ बदल ...

Sangdil (संगदिल)

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अल्फ़ाज़-ए-दर्द: संगदिल की कैफ़ियत पर दिलकश शायरी शायरी 1 तेरी महफ़िल में अब कोई जगह नहीं मेरी, जब से जाना तू कितना संगदिल है। शायरी 2 अश्कों की बारिश भी उसे पिघला न सकी, वो तो फ़ितरत से ही निकला संगदिल । शायरी 3 हर ज़ख़्म पे मुस्कुराना सीख लिया हमने, जब से जाना तू कितना संगदिल है। शायरी 4 इश्क़ की राहों में धोखे ही मिले हैं हमें, शायद दिल मेरा ही निकला संगदिल के क़ाबिल। शायरी 5 मोहब्बत का दामन छोड़ दिया हमने, जब देखा यार अपना कितना संगदिल है। शायरी 6 ...

Bedard (बेदर्द)

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बेदर्द (Bedard) शायरी का संग्रह 1. दिल का दर्द तेरी यादों का बोझ लिए, यह दिल आज भी भटकता है, तूने जो ज़ख्म दिए, उनका हिसाब कौन रखता है, तू तो बेदर्द (बेदर्द) है। 2. वफा की कीमत वफा की राह में हम तो लुटे हैं बार-बार, तुम्हारी बेदर्द (बेदर्द) निगाहों ने, हर ख्वाब तोड़ दिया। 3. यादों का सिला रात भर जलते रहे, तेरी यादों के दिए, क्या पता था तुम इतने बेदर्द (बेदर्द) निकलोगे। 4. खामोशी का शोर मेरी खामोशी को तुमने कभी समझा ही नहीं, तुम्हारी बेदर्द (बेदर्द) नज़रें, बस तमाशा देखती रहीं। 5. इल्जाम इल्जाम लगा रहे हो, मेरी मोहब्बत पर आज, ये बेदर्द (बेदर्द) दुनिया, क्या जाने कैसा है मेरा मिजाज। 6. तन्हाई तन्हाई के आलम में, ...

Zaalim (ज़ालिम)

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ज़ालिम की दुनिया: दर्द, मोहब्बत और इंतज़ार ज़ालिम इश्क़ के अफ़साने तेरी बेरुखी ने हमें इतना बेबस कर दिया, कि हर सांस में तेरा ज़ालिम नाम लेते रहे। कब तक सहें हम ये ज़ालिम दुनिया के सितम, एक तेरी मोहब्बत ही थी, वो भी बेवफ़ा निकली। उसकी आँखों में ज़ालिम सा नशा था ऐसा, कि होश खो बैठे और खुद को लुटा बैठे। मौसम बदल गए, पर तेरा लहजा वही रहा ज़ालिम , हम आज भी तेरे इंतजार में बैठे हैं, वहीं के वहीं। हर रात चाँद से कहते हैं हम अपनी दास्ताँ, कैसे एक ज़ालिम ने हमारी दुनिया उजाड़ दी। तेरे इश्क़ में हमने क्या-क्या न सहा ज़ालिम , खुद को मिटा दिया तेरी हर खुशी के लिए। अब तो आदत सी हो गई है इन ज़ख्मों की, तेरा हर वार ज़ालिम अब मुस्कुरा कर सहते हैं। हमने सोचा था तू बदलेगा एक दिन, पर तू तो और भी ज़ालिम होता गया। ये कैसी मोहब्बत है...

Zulm (ज़ुल्म)

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ज़ुल्म (Zulm) पर शानदार शायरी का संग्रह ज़ुल्म की दास्तान जब हर तरफ़ फैला हो अँधेरा, और ना हो कोई सवेरा, तब जान लो कि ये है ज़ुल्म , जिसने घेरा. दर्द-ए-इंसानियत इंसानियत का चेहरा भी दागदार हो जाता है, जब बेज़ुबानों पर ज़ुल्म का वार हो जाता है. आँसू और ज़ुल्म आँखों से गिरे आँसू, दरिया बन जाते हैं, जब ज़ुल्म की हदें सारी पार कर जाते हैं. ज़ुल्म की पुकार हर रात ये दिल किसी से पुकारता है, कब थमेगा ये ज़ुल्म , जो हमें मारता है. खामोशी का बोझ खामोशी भी एक ज़ुल्म है, जो सह रहे हैं हम, अपनी आहों को अंदर ही दबा रहे हैं हम. ज़ुल्म की आग कब तक जलेगी ये आग ज़ुल्म की, बताओ तो सही, ...

Sitam (सितम)

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सितम (Sitam) पर दिल छू लेने वाली शायरी मेरे दिल पर ये कैसा सितम ढा दिया तुमने, हंसते हुए लबों पर आँसू सजा दिया तुमने। हर रात आँखों में यादों का सितम होता है, तुम्हारा शहर अब मेरे लिए मातम होता है। खुदा करे तुझपे कभी वो सितम न आए, जो दिल सह रहा है और ज़ुबां पर न आए। तेरे प्यार में ये कैसा सितम हुआ है, हम तो डूबे थे, अब किनारा गुम हुआ है। ज़िंदगी भर सहते रहे हम उनका हर सितम , और वो कहते रहे, "तुमने प्यार ही कब किया हम से?" ये बेवफ़ाई का सितम हम पे भारी पड़ा, जीने की चाहत ने मरने का इरादा करा। ...