Nazneen (नाज़नीन)
नाज़नीन (Nazneen): एक खूबसूरत एहसास
शायरी 1
तेरी आँखें, नाज़नीन, एक गहरा समंदर हैं,
जिनमें डूब कर खो जाने को जी चाहता है।
शायरी 2
हुस्न तेरा, नाज़नीन, चाँदनी से भी हसीं,
हर अदा में तेरी एक अलग ही नूर है।
शायरी 3
तेरी बातों में वो जादू है, ऐ नाज़नीन,
जो हर दिल को अपनी ओर खींच लेता है।
शायरी 4
जब तुम मुस्कुराती हो, नाज़नीन, तो लगता है,
जैसे फ़िज़ा में भी खुशबू घुल जाती है।
शायरी 5
तेरे हर अंदाज़ में है इक नयापन, नाज़नीन,
कोई कैसे ना हो तेरे हुस्न का दीवाना।
शायरी 6
तेरी चाल में है नज़ाकत, तेरी बातों में है मिठास,
तू है मेरी नाज़नीन, हर पल मेरे आस-पास।
शायरी 7
जब से देखा है तुझे, ऐ मेरी नाज़नीन,
दिल ने चैन गँवा दिया, तेरी यादों में खो गया।
शायरी 8
तेरी ज़ुल्फ़ों की घटाएँ, तेरा चेहरा जैसे चाँद,
क्या कहूँ, ऐ नाज़नीन, तू है खुद एक मिसाल।