Saathi (साथी)
साथी (Saathi) पर दिल छू लेने वाली शायरी
शायरी 1
जीवन की हर डगर पर, एक ऐसा साथी हो,जो बिन कहे हर बात समझे, वो दिल का राही हो।
शायरी 2
धूप में जब भी चला मैं, तेरी छाँव मिली,ऐ मेरे साथी, तेरी दोस्ती अनमोल खिली।
शायरी 3
खुशी हो या गम का लम्हा, तू ही मेरा हमदम है,क्या करूँ तारीफ तेरी, तू मेरा सच्चा साथी है।
शायरी 4
रास्तों पर चलते-चलते, जब मैं कभी लड़खड़ाया,तेरा हाथ थामकर साथी, मैं फिर से संभल पाया।
शायरी 5
अंधेरी रात में भी, तू जुगनू सा चमका है,मेरे प्यारे साथी, तू ही तो मेरा मरहम है।
शायरी 6
ख्वाबों की दुनिया में, तू संग-संग चलता है,हर मुश्किल में साथी, तू हौसला देता है।
शायरी 7
रिश्तों की डोर में, तू सबसे प्यारा बंधन है,ऐ मेरे साथी, तुझसे ही मेरा जीवन गुलशन है।
शायरी 8
जब भी लगे अकेला, तू यादों में आ जाता है,सच कहूँ साथी, तू बहुत याद आता है।
शायरी 9
हर मोड़ पर खड़े, हर राह पर संग चलना,यही है मेरे साथी, तेरी दोस्ती का फना।
शायरी 10
मुस्कुराहटें मेरी, तेरी वज़ह से हैं साथी,तेरी दोस्ती ने ही दी है, जीवन को नई गति।
शायरी 11
दूर होकर भी तू पास है, हर पल का एहसास है,मेरे प्यारे साथी, तू ही तो मेरा विश्वास है।
शायरी 12
सागर की गहराई में, मोती सा तू छुपा है,मेरे दिल के कोने में, तू ही तो बसा है, मेरे साथी।
शायरी 13
पतझड़ में भी बहार है, जब तू मेरे पास है,ऐ मेरे साथी, तेरी दोस्ती सबसे खास है।
शायरी 14
बिन बोले समझे जो, वो सच्चा हमराज़ है,मेरा साथी तू ही तो, मेरी हर बात का आगाज़ है।
शायरी 15
जीवन की इस किताब में, तू एक सुंदर अध्याय है,मेरे प्यारे साथी, तू ही मेरी सच्ची राह है।
शायरी 16
कभी न हो जुदा हम, यही मेरी आरज़ू है,हर जन्म में मिले तू, मेरा प्यारा साथी तू है।
शायरी 17
अँधेरे में रोशनी, तू ही मेरी उम्मीद है,मेरे साथी, तेरी दोस्ती, हर मुश्किल की ढाल है।
शायरी 18
हवाओं में खुशबू, तेरी दोस्ती की लहराती है,हर साँस में साथी, तेरी याद मुझे सताती है।
शायरी 19
दिल से दिल का रिश्ता, जुड़ा है कुछ इस तरह,कि मेरे साथी, तू है मेरी हर सुबह, हर शाम की तरह।