Shringar (शृंगार)

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सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक: शृंगार पर दिल छू लेने वाली शायरियाँ

शायरी 1

तेरी आँखों का ये काजल, होंठों पे वो लाली है,
हर अदा में छुपा तेरा, हर लम्हा शृंगार है।

शायरी 2

चाँद भी शरमाए देख के तेरा मुखड़ा हसीन,
हर साँस में बसता तेरे, रूह का शृंगार है।

शायरी 3

फूलों सी नाज़ुक तेरी काया, खुशबू में डूबा हर अंग,
प्रेम की धुन में सजा तेरा, जीवन का शृंगार है।

शायरी 4

जुल्फें जब बिखेरती हो, घटाएँ भी थम जाती हैं,
ये अदा भी तो तेरी, कमाल का शृंगार है।

शायरी 5

बिंदी माथे पे सजे, जैसे सितारा कोई चमके,
तेरी सादगी में भी छुपा, अद्भुत शृंगार है।

शायरी 6

हाथों में मेंहदी की रंगत, पायल की झंकार मधुर,
हर गहना तेरा जैसे, इकरार का शृंगार है।

शायरी 7

नज़रें जब मिलती हैं तुझसे, दिल में हलचल होती है,
तेरा ये रूप सलोना, प्यार का शृंगार है।

शायरी 8

ओस की बूँदों सा पावन, तेरा ये यौवन निखरा,
कुदरत ने किया जैसे, अनुपम शृंगार है।

शायरी 9

आईने में जब देखे खुद को, तू भी हैरान रह जाए,
खुदा ने बनाया तुझको, ऐसा शृंगार है।

शायरी 10

महफ़िल में जब आती हो तुम, रोशन हर शमा होती है,
तेरी मौजूदगी ही जैसे, सबसे बड़ा शृंगार है।

शायरी 11

रंगों से भरी ये दुनिया, पर तेरी खूबसूरती है अलग,
ईश्वर ने बनाया तुझे, खुद करके शृंगार है।

शायरी 12

खुले गेसू, झुकी पलकें, मदहोश करे तेरा ये रूप,
हर अंग पे तेरे जँचता, हर प्यारा शृंगार है।

शायरी 13

तेरी हँसी में छिपी है, दुनिया भर की रौनकें,
ये मुस्कुराहट भी तो तेरी, अनमोल शृंगार है।

शायरी 14

पायल की रुनझुन, कंगन की खनक, मीठी आवाज़,
हर धुन में तेरा ही तो, है ये प्यारा शृंगार

शायरी 15

तेरी चोली का हर धागा, तेरी चूड़ी की हर खनक,
प्रेम में लिपटा तेरा, सारा ये शृंगार है।

शायरी 16

साड़ी का आँचल लहराए, बिखरे जब ये केस तेरे,
तेरा हर रूप सलोना, एक नया शृंगार है।

शायरी 17

तेरी ज़ुल्फ़ों की घटाएँ, तेरी पलकों के पर्दे,
ये सब मिलकर ही तो करते हैं, तेरा अनोखा शृंगार

शायरी 18

रंगों से भरी पिचकारी, होली का ये त्यौहार,
तेरे चेहरे पे बिखरा रंग, वही मेरा शृंगार

शायरी 19

खुशबू सी महकी, हर बात तेरी, हर अदा में जादू,
ये तेरी मोहक छवि, मेरा सच्चा शृंगार है।

शायरी 20

बिना किसी साज़-ओ-सामान के भी, तू लगती है रानी,
तेरी सादगी ही तो है, सबसे बड़ा शृंगार

शायरी 21

वो मांग में सिंदूर की लाली, हर सुहागन का अभिमान,
शृंगार में सबसे पावन, ये है पवित्र दान।

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