Itr (इत्र)
इत्र: खुशबूदार अहसासों का गुलदस्ता
नज़र का इत्र
तेरी नज़र का जादू, क्या खूब है 'इत्र' जैसा,
जहाँ से गुज़रे, हर सू महकाए, ऐसा।
यादों का इत्र
कुछ यादें ऐसी होती हैं, जैसे खुशबूदार 'इत्र',
ज़िंदगी की किताब में, महकते हर पन्ने के मित्र।
मोहब्बत का इत्र
मोहब्बत का 'इत्र' तो ऐसा है साक़ी,
जो रूह में बस जाए, मिटे न कभी बाक़ी।
सांसों का इत्र
तेरी सांसों में घुला है वो 'इत्र' जानाँ,
जो हर पल मुझको खींचे, तेरा आशियाना।
दिल का इत्र
मेरे दिल में तुम्हारा 'इत्र' बसा है,
हर धड़कन में तुम्हारी खुशबू का पता है।
शाम का इत्र
शाम की हवाओं में घुल गया है तेरा 'इत्र',
तन्हाई में भी लगती है तू ही मेरी मित्र।
ज़िंदगी का इत्र
ज़िंदगी है एक खुशनुमा 'इत्र' की बोतल,
जितना बाँटो, उतनी ही बढ़ती है इसकी चहल-पहल।
इश्क़ का इत्र
इश्क़ का 'इत्र' लगा कर निकले वो घर से,
गलियों में महक उठी हर साँस उनके असर से।
ख़्वाबों का इत्र
ख़्वाबों में भी तेरी खुशबू का 'इत्र' है,
मेरी हर रात का तू ही हमदम, तू ही मित्र है।
रुह का इत्र
तेरी यादों का 'इत्र' जब छिड़कता है रूह पर,
तब दिल की हर कली खिल उठती है बे-खबर।
सुगंधित इत्र
जैसे फूल से 'इत्र' निकलता है चुपके से,
वैसे ही तुम समाए हो मेरे दिल में हल्के से।
खुशी का इत्र
खुशी का 'इत्र' बनकर बिखरो जहाँ में,
गमों की धूल न आए कभी तुम्हारे दरमियाँ में।
मुस्कान का इत्र
तुम्हारी मुस्कान से ऐसा 'इत्र' बहता है,
जो हर उदास चेहरे पर रौनक ले आता है।
मौसम का इत्र
ये मौसम का 'इत्र' है या तेरी जुल्फों की खुशबू,
सारा शहर महक उठा, जैसे गुलिस्ताँ हो हर सू।
मीठा इत्र
तेरी बातों में घुला है एक मीठा सा 'इत्र',
जो सुन ले एक बार, बन जाए उसका ही मित्र।
हर बात में इत्र
हर बात में तेरी खुशबू का 'इत्र' महकता है,
मेरा ज़हन तेरे ही ख्यालों में भटकता है।
इंतज़ार का इत्र
तेरे इंतज़ार में जो 'इत्र' हमने लगाया था,
तेरी आमद से वो और भी महक उठा था।
चाँदनी का इत्र
चाँदनी रातों में जब 'इत्र' छिड़कती है हवा,
लगता है जैसे छू गई हो तेरी प्यारी अदा।
मिलन का इत्र
जब मिलन होता है रूहों का, तो ऐसा 'इत्र' फैलता है,
खुदा भी जन्नत से ज़मीन पर, खुशबू लेने उतरता है।
तेरा इत्र
तेरा 'इत्र' क्या कमाल करता है जिस्म पर,
नज़रें मिलती नहीं, बस दिल हो जाता है बेताब।
जुल्फों का इत्र
तुम्हारी जुल्फों का 'इत्र' हवा में घुल जाए,
तो हर राहगीर अपनी मंज़िल भूल जाए।
सफर का इत्र
ये सफ़र ज़िंदगी का, हर मोड़ पर है एक 'इत्र',
कभी खुशबू से भर दे, कभी बना दे तेरा मित्र।
सुबह का इत्र
सुबह की पहली किरण में है 'इत्र' सा नूर,
जो हर दिल को भर दे खुशी से, कर दे गमों से दूर।
प्यार का इत्र
ये प्यार का 'इत्र' है जो मुझ पर छिड़का है तूने,
अब हर साँस में बसी है बस तेरी ही खुशबू।
फूलों का इत्र
फूलों का 'इत्र' तो पल भर की खुशबू है,
तेरी यादों की महक तो ज़िंदगी भर की आरज़ू है।
बेपनाह इत्र
बेपनाह है तेरी चाहत का 'इत्र' मुझपर,
खुशबू बन के बसी है मेरी हर नस में।
इत्र का जादू
ये 'इत्र' का जादू है या तेरी अदा का कमाल,
सारा आलम मदहोश, हर तरफ तेरा ही ख्याल।
महकता इत्र
तेरी बातें, तेरी यादें, सब हैं 'इत्र' सा महकता,
मेरा वजूद हर पल तेरे लिए ही तरसता।
नशा सा इत्र
तेरी खुशबू में है एक 'इत्र' सा नशा,
जो चढ़ जाए तो फिर कभी न उतरे, ये कैसा हादसा।
अल्फ़ाज़ का इत्र
तेरे अल्फ़ाज़ में भी है एक अनोखा 'इत्र',
जो कानों से दिल में उतर जाए बनके मित्र।
तन्हाई का इत्र
तन्हाई में भी तेरी खुशबू का 'इत्र' है पास,
यही तो है मेरा सुकून, यही तो है मेरा एहसास।
रूहानी इत्र
ये रूहानी 'इत्र' है जो मुझ पर बरसा है,
तेरी चाहत का रंग मुझ पर यूँ चढ़ा है।
हर जगह इत्र
जिधर देखता हूँ, उधर तेरा 'इत्र' महकता है,
जैसे हर हवा के झोंके में तू ही रहता है।
खुशबूदार इत्र
तेरा ज़िक्र भी है जैसे खुशबूदार 'इत्र' कोई,
ज़ुबाँ पर आते ही, महका दे रूह को मेरी।
बहारों का इत्र
बहारों का 'इत्र' और तेरी खुशबू का आलम,
दोनों मिलकर छीन लेते हैं मेरा ये सब्र और दम।
महफिल का इत्र
जब तुम आते हो महफ़िल में, महकता है 'इत्र' तुम्हारा,
हर निगाह तुम्हारी तरफ, हर दिल है तुम्हारा।
धड़कन का इत्र
हर धड़कन में तेरी खुशबू का 'इत्र' है बसा,
मेरे दिल का हर कोना, तेरे प्यार से है सज़ा।
ख्यालों का इत्र
मेरे ख्यालों में भी है तेरी खुशबू का 'इत्र',
जैसे तू हर पल मेरे साथ हो, बनकर मेरा मित्र।
शाइरी का इत्र
मेरी शाइरी में भी तेरी यादों का 'इत्र' है,
हर लफ्ज़ में तेरी खुशबू, हर शेर में तेरा चित्र है।
रंगों का इत्र
जैसे रंगों में घुला है खुशबू का 'इत्र' हसीन,
वैसे ही तुम समाए हो मेरी हर साँस में।
जुदाई का इत्र
जुदाई का 'इत्र' भी अजीब होता है,
आँखों में नमी और दिल में तेरी खुशबू बसा होता है।
इबादत का इत्र
मेरी इबादत में भी 'इत्र' है तेरी खुशबू का,
हर दुआ में ज़िक्र है तेरा, हर पल ये ही आरज़ू का।
नज़रबट्टू इत्र
कहीं नज़र न लग जाए, लगा लो 'इत्र' मोहब्बत का,
ये खुशबू ही तो है, जो महकाती है हर रिश्ते का।
आशिक़ का इत्र
आशिक़ के दिल से जो खुशबू आती है,
वो 'इत्र' से भी ज़्यादा महकदार होती है।
महबूब का इत्र
महबूब के कपड़ों से जो 'इत्र' आता है,
वो हर दिल को अपनी ओर खींचे चला जाता है।
लवों का इत्र
तेरे लबों से जो 'इत्र' बहता है, वो कुछ और ही है,
ज़िंदगी भर की प्यास बुझाने का सबब है।
पुरानी यादों का इत्र
पुरानी यादों का 'इत्र' जब भी आता है,
दिल में एक अजीब सा सुकून दे जाता है।
शर्मीला इत्र
तेरी शरम में भी है एक 'इत्र' का एहसास,
जो चुपके से आकर दिल में कर जाता है वास।
अल्फ़त का इत्र
अल्फ़त का 'इत्र' यूँ ही नहीं फैलता हर तरफ,
इसे पाने को दिल को, रूह को तड़पना पड़ता है।
बर्बादी का इत्र
कुछ 'इत्र' ऐसे होते हैं जो बर्बादी लाते हैं,
अपनी खुशबू में सब कुछ मिटा कर जाते हैं।
तसल्ली का इत्र
तेरी आवाज़ में है एक 'इत्र' सी तसल्ली,
जो हर गम को भुला दे, हर दर्द को कर दे ढीली।
मदहोश इत्र
तेरी अदाओं में है ऐसा मदहोश 'इत्र',
जिसे सूंघ ले वो बन जाए तेरा ही मित्र।
रूह का इत्र
रूह का 'इत्र' सिर्फ वही समझता है,
जो किसी की चाहत में बेपनाह जलता है।
इश्क की खुशबू का इत्र
इश्क की खुशबू का 'इत्र' हर दिल में बसा होता है,
ये तो बस चाहत है जो हर किसी को मिल जाती है।
तपिश का इत्र
तेरी तपिश में भी है एक 'इत्र' सा सुकून,
जो मुझे हर पल तेरी यादों में डूबाए रखता है।
"खुशबू बनकर बिखर जाओ ज़िंदगी के हर मोड़ पर,
हर एहसास को महकाओ, जैसे 'इत्र' हर एक मोड़ पर।"
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