Dilkash (दिलकश)
दिलकश नज़्मों का ख़ज़ाना: एक ख़ूबसूरत सफ़र
शायरी 1
हर अदा तेरी क्या खूब, क्या निराली है,
तेरे हुस्न की दुनिया, बड़ी दिलकश प्याली है।
शायरी 2
तेरी आँखों का जादू कुछ ऐसा छाया,
हर नज़ारा मुझको दिलकश नज़र आया।
शायरी 3
शामें तेरी बातों से सज जाती हैं,
तेरी मौजूदगी से हर घड़ी दिलकश हो जाती है।
शायरी 4
फूलों की ख़ुशबू सी तेरी बातें,
जीवन को बनाती हैं कितनी दिलकश रातें।
शायरी 5
तेरी हंसी में छिपी है वो रौनक,
जो हर लम्हे को करती है दिलकश ज़ीनत।
शायरी 6
मोहब्बत का सफ़र तुझसे शुरू होता है,
हर मोड़ पर तेरा साथ, कितना दिलकश होता है।
शायरी 7
सपनों में भी अब तेरा ही दीदार है,
तेरा हर ख्वाब, कितना दिलकश गुलज़ार है।
शायरी 8
चाँद तारों की महफ़िल सी सजी है,
तेरी यादों से हर रात दिलकश हुई है।
शायरी 9
तेरी आवाज़ में वो जादू भरा है,
जो हर खामोशी को दिलकश करता है।
शायरी 10
जीवन के हर पल को तूने सजाया,
तेरी चाहत से हर दिन दिलकश बनाया।
शायरी 11
तेरी सादगी में भी एक अजब सी बात है,
तेरा हर अंदाज़, कितना दिलकश साथ है।
शायरी 12
दिल में बस गई है तेरी सूरत,
तेरा हर नज़ारा, कितना दिलकश खूबसूरत।
शायरी 13
खुदा ने नवाज़ा है तुझे बेमिसाल,
तेरा वजूद ही है इतना दिलकश कमाल।
शायरी 14
नज़रें मिलीं तो दिल खो ही गया,
तेरा चेहरा, सच में, कितना दिलकश हो गया।
शायरी 15
तेरी यादों के सहारे जी रहे हैं हम,
तेरा ख़याल ही है, कितना दिलकश हर दम।