Roop (रूप)
रूप (Roop) की सुंदरता पर बेहतरीन शायरी संग्रह
तेरा हँसता हुआ चेहरा, तेरी आँखों का नूर,
बेशक कायल कर गया, ये तेरा रूप हुज़ूर।
बेशक कायल कर गया, ये तेरा रूप हुज़ूर।
चाँद भी शरमा जाए, देख कर तेरी अदा,
क्या करिश्मा है खुदा का, ये तेरा रूप-ए-जाँफ़िज़ा।
क्या करिश्मा है खुदा का, ये तेरा रूप-ए-जाँफ़िज़ा।
हर नज़र थम सी जाए, जब तुम सामने आओ,
आईने में भी निखर जाए, ऐसा है तेरा रूप पाओ।
आईने में भी निखर जाए, ऐसा है तेरा रूप पाओ।
फूलों की रंगत है तुझमें, तारों की चमक,
कैसे बखान करूँ मैं, तेरे रूप की ये धमक।
कैसे बखान करूँ मैं, तेरे रूप की ये धमक।
अधरों पे मुस्कान लिए, आँखों में इंतज़ार,
हर पल बढ़ाए जाए, तेरे रूप का खुमार।
हर पल बढ़ाए जाए, तेरे रूप का खुमार।
सुबह की पहली किरण, या शाम की लाली,
सब फीके पड़ जाएँ, जब तेरा रूप सँवारी।
सब फीके पड़ जाएँ, जब तेरा रूप सँवारी।
क्या जादू है इन नज़रों में, क्या ये तेरा कमाल,
हर दिल पे छा जाता है, तेरे रूप का जमाल।
हर दिल पे छा जाता है, तेरे रूप का जमाल।
सागर की गहराई सी, तेरे रूप की माया,
जो भी देखे इसे, वो बस खो ही पाया।
जो भी देखे इसे, वो बस खो ही पाया।
काजल की धार, बिंदी का वो चमक,
और बढ़ा देता है, तेरे रूप की धमक।
और बढ़ा देता है, तेरे रूप की धमक।
महफ़िल में जब तुम आओ, छा जाती है बहार,
हर कोई करता है बातें, तेरे रूप की यार।
हर कोई करता है बातें, तेरे रूप की यार।
ख़ामोशी भी कहती है, तेरी दास्तान,
जब निखरता है तेरा रूप, लगता है तू महान।
जब निखरता है तेरा रूप, लगता है तू महान।
पत्तों में सरसराहट, हवाओं में खुश्बू,
कुछ ऐसा ही है तेरा रूप, मेरे रूबरू।
कुछ ऐसा ही है तेरा रूप, मेरे रूबरू।
रूह में बस जाए जो, ऐसा नज़ारा है तेरा,
हर पल याद आता है, ये रूप सुनहरा।
हर पल याद आता है, ये रूप सुनहरा।
चाँदनी रात में भी, तेरी चमक निराली,
दुनिया को भा जाता है, तेरे रूप की हर लाली।
दुनिया को भा जाता है, तेरे रूप की हर लाली।
तेरी चाल में नज़ाकत, हर अदा में प्यार,
क्या खूब सजाया है, कुदरत ने तेरा रूप यार।
क्या खूब सजाया है, कुदरत ने तेरा रूप यार।
सावन की बारिश सा, ये तेरा रूप सुहाना,
मन को भिगो दे ऐसा, हर पल मदहोश बनाना।
मन को भिगो दे ऐसा, हर पल मदहोश बनाना।
कोई कविता, कोई गज़ल, ना कर पाए बयाँ,
तेरे रूप की गहराई को, ओ मेरे मेहरबां।
तेरे रूप की गहराई को, ओ मेरे मेहरबां।
हर सुबह जगते ही, बस तेरी ही चाहत,
तेरे रूप के दीदार की, ये मेरी इबादत।
तेरे रूप के दीदार की, ये मेरी इबादत।
आइने में तू देखे, तो शरमा जाए खुद,
इतना मनमोहक है तेरा रूप, ऐ मेरे हमदर्द।
इतना मनमोहक है तेरा रूप, ऐ मेरे हमदर्द।
तेरा ज़िक्र हो तो, महफ़िलें सज जाती हैं,
तेरे रूप की बातें, दिल में बस जाती हैं।
तेरे रूप की बातें, दिल में बस जाती हैं।
खुदा ने तराशा है, बड़ी फुर्सत से तुम्हें,
तभी तो इतना हसीन है, ये तेरा रूप हमें।
तभी तो इतना हसीन है, ये तेरा रूप हमें।
घटाओं में बिजली सी, तेरी आँखों की चमक,
और बढ़ा देती है, तेरे रूप की धमक।
और बढ़ा देती है, तेरे रूप की धमक।
तेरे रूप की तारीफ में, शब्द भी कम पड़ें,
तू तो इक ऐसी कहानी है, जो पढ़ता ही रहे।
तू तो इक ऐसी कहानी है, जो पढ़ता ही रहे।
जो देखा तेरा रूप, तो सब भूल गए,
हम तो बस तेरे दीवाने, बन के रह गए।
हम तो बस तेरे दीवाने, बन के रह गए।
तेरी मुस्कान पे फिदा, तेरी सादगी पे जान,
तेरा हर एक अंदाज़, तेरे रूप की पहचान।
तेरा हर एक अंदाज़, तेरे रूप की पहचान।
कोई जादूगर नहीं, पर जादू है तेरी अदा,
हर दिल पे छा जाता है, तेरे रूप का नशा।
हर दिल पे छा जाता है, तेरे रूप का नशा।
सूरज भी थक जाए, तेरी रोशनी से हार,
ऐसा दिव्य है तेरा रूप, जैसे हो कोई गुलज़ार।
ऐसा दिव्य है तेरा रूप, जैसे हो कोई गुलज़ार।
हर कली खिल जाती है, जब तू पास आती है,
तेरे रूप की महक से, ये दुनिया महक जाती है।
तेरे रूप की महक से, ये दुनिया महक जाती है।
ये होंठ, ये आँखें, ये जुल्फें बेकरार,
सब मिलकर सजाते हैं, तेरे रूप का संसार।
सब मिलकर सजाते हैं, तेरे रूप का संसार।
तू अगर न हो सामने, तो रंगत ना जमे,
तेरे रूप के बिना, ये ज़िंदगी ना सँभले।
तेरे रूप के बिना, ये ज़िंदगी ना सँभले।
तेरा हर अँग है जैसे, कोई खुबसूरत साज़,
तेरे रूप की धुन सुन के, मन हो जाए आज़ाद।
तेरे रूप की धुन सुन के, मन हो जाए आज़ाद।
काली घटाओं सी जुल्फें, और चाँद सा माथा,
क्या कहने तेरे रूप के, तू तो खुदा की गाथा।
क्या कहने तेरे रूप के, तू तो खुदा की गाथा।
सुबह-शाम तेरी ही बातें, तेरी ही ज़िक्र हर पल,
तेरे रूप की दिवानगी, ये है मेरे दिल का हल।
तेरे रूप की दिवानगी, ये है मेरे दिल का हल।
जो देखता है एक बार, खो जाता है दुनिया से,
तेरे रूप का ये जादू, ना छूटे किसी से।
तेरे रूप का ये जादू, ना छूटे किसी से।
नज़रों को सुकून मिलता है, जब तुझे देखता हूँ,
तेरे रूप की खूबसूरती में, मैं खोया रहता हूँ।
तेरे रूप की खूबसूरती में, मैं खोया रहता हूँ।
कभी खिलती धूप सी, कभी चाँदनी रात,
हर पल मनमोहक लगे, ये तेरे रूप की बात।
हर पल मनमोहक लगे, ये तेरे रूप की बात।
तेरी हर अदा में है, एक अनोखा सा एहसास,
दुनिया में नहीं कोई, तेरे रूप जैसा ख़ास।
दुनिया में नहीं कोई, तेरे रूप जैसा ख़ास।