Taareek (तारीक)
तारीक (Taareek) पर शानदार शायरी ज़िन्दगी की राहों में, जब छा जाए तारीक रात, कौन जलाए उम्मीद का दिया, दे कौन सहारा साथ। मेरी आँखों में अक्स है, गुज़री हुई हर तारीक का, दर्दों की कहानी है, मेरी हर इक आह का। कुछ ऐसे लम्हे होते हैं, जो बन जाते हैं तारीक , मिटाना चाहो भी तो, रहते हैं दिल के करीब। शामें तारीक सही, पर सहर तो आएगी, गम न कर ऐ दिल, रोशनी लौट आएगी। लिख दी है किस्मत ने मेरी, हर एक पल को तारीक , खुशियों की तलाश में भटकता है यह फकीर। जब भी पलटकर देखता हूँ, अपनी तारीक को, मिलते हैं कुछ घाव गहरे, कुछ भूले हुए रिश्तों को। यह रात कितनी तारीक है, सितारों से भी पूछो, उन्हें भी नहीं दिखती राह, जो मैंने खोजी तुम बिन। इश्क़ की हर गली, हर मोड़ अब तारीक है, तेरी जुदाई का गम, दिल को बहुत बारीक है। क्या पता था कि दिन ढलते ही, सब हो...