Dhund (धुंध)

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धुंध (Dhund) पर बेमिसाल शायरी

धुंध की चादर

आज फिर शहर में छाई है धुंध गहरी,
तेरी यादों ने भी कर दी है कुछ ऐसी पहरी।

नज़रों की धुंध

आँखों में छाई है कैसी ये धुंध,
जो नज़र आए तुम, तो मिट जाए हर बंद।

राहों की धुंध

रास्ते गुम हुए, हर सू है धुंध का साया,
मन में फिर क्यों तेरी यादों का बसेरा आया।

दिल की धुंध

ये दिल में कैसी धुंध है, जो छाई हुई है,
ख़ामोशी की चादर में कुछ आवाज़ दबी हुई है।

सुबह की धुंध

सुबह की धुंध में लिपटे हुए अरमान,
इक किरण की आस में ये मेरा सारा जहान।

यादों की धुंध

यादों की धुंध कभी छटती नहीं,
तस्वीरें ज़ेहन से कभी हटती नहीं।

शाम की धुंध

शाम ढली तो छाई फिर से धुंध,
तेरी यादों में खोकर, हुए हम फिर से बंद।

उदासी की धुंध

हर तरफ फैली है उदासी की धुंध,
ज़िंदगी में है जैसे कोई गहरी गुंथी।

आशा की धुंध

आशा की किरण भी कहीं खो सी गई,
ज़िंदगी धुंध में लिपटी हुई सी रह गई।

अल्फाज़ों की धुंध

अल्फाज़ों पर छाई है धुंध सी कोई,
जो कहनी थी बातें, अनकही रह गई।

एहसासों की धुंध

एहसासों पर छाई है गहरी धुंध,
ख़ामोशी में दिल ने कितने दर्द चुने।

रात की धुंध

रात की धुंध में तारों की चमक गुम है,
कैसे कहें कि दिल में अब भी क्या गम है।

मौसम की धुंध

मौसम में छाई है ये कैसी धुंध,
हर तरफ बस सन्नाटा और अनसुनी गुंथी।

सपनों की धुंध

सपनों पर छाई है ऐसी धुंध,
जो हकीकत में बदलें, कब होगी वो सुबह।

बिखरी सी धुंध

बिखरी हुई है हर तरफ ये धुंध,
कैसे ढूंढूँ तुझको, जब रास्ते भी हैं बंद।

खामोश धुंध

खामोशी की धुंध में लिपटा है हर सवेरा,
तन्हाई का साथी है बस, ये मेरा अंधेरा।

मिलन की धुंध

मिलन की राहों में कैसी धुंध है छाई,
क़दमों को मेरे बस अब तेरी ही आस है आई।

ज़िंदगी की धुंध

ज़िंदगी में छाई है ये कैसी धुंध,
हर पल में है जैसे कोई अनकही गुंथी।

गुज़रती धुंध

गुज़रती रही ये धुंध, और हम देखते रहे,
ख़ामोश लबों से न जाने क्या कहते रहे।

तन्हाई की धुंध

तन्हाई की धुंध ने घेरा है मुझको,
तेरी यादों से ही है अब रोशन ये मुझको।

उम्मीद की धुंध

उम्मीदों पर छाई है कैसी ये धुंध,
नज़र आए न राह, न मंज़िल का कोई कुंद।

जुदाई की धुंध

जुदाई की धुंध में खो गई है राहें,
तड़प उठती हैं अब ये मेरी निगाहें।

विचारों की धुंध

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