Fareb (फ़रेब)
फ़रेब (Fareb) पर बेहतरीन शायरी का संग्रह
शायरी 1: दिल की दास्तान
मुस्कुरा कर उसने हमसे कुछ यूँ बात की,
हमें लगा इश्क है, पर वो तो एक फ़रेब की रात थी।
शायरी 2: आईने का सच
आईने में देखा तो अपना ही अक्स दिखा,
पर लोगों ने बताया वो तो सिर्फ़ फ़रेब था।
शायरी 3: वादों की ज़ुबान
तेरे वादों पर यकीं करना मेरी भूल थी,
तेरी हर बात में छिपी एक फ़रेब की धूल थी।
शायरी 4: इश्क़ की राह
इश्क़ की राह में अक्सर हमने ये देखा है,
सच्ची मोहब्बत के पीछे ही फ़रेब का चेहरा है।
शायरी 5: उम्मीदों का जाल
उम्मीदों का जाल बुना था बड़े प्यार से,
पर निकली वो हर गांठ एक गहरा फ़रेब।
शायरी 6: ख्वाबों की दुनिया
ख्वाबों की दुनिया में खोए रहे हम,
जागे तो देखा, सब था बस फ़रेब का दम।
शायरी 7: दोस्ती का लिबास
दोस्ती का लिबास पहनकर आए थे वो,
अंदर से मगर सिर्फ़ फ़रेब छिपाए थे वो।
शायरी 8: मीठी बातें
उनकी मीठी बातों ने हमें बहलाया,
पलक झपकते ही सारा फ़रेब दिखाया।
शायरी 9: दिल की नगरी
दिल की नगरी में सब कुछ लुटा बैठे,
जब पता चला, वो तो फ़रेब के घर बैठे।
शायरी 10: सावन का मौसम
सावन का मौसम था, वादे थे हसीन,
पर हर बूंद में छिपा था फ़रेब का यकीन।
शायरी 11: रोशनी का धोखा
मुझे लगा कि वो रोशनी है मेरी ज़िंदगी की,
पर वो तो सिर्फ़ एक फ़रेब था हर खुशी की।
शायरी 12: सच की तलाश
सच की तलाश में भटकते रहे हम उमर भर,
हर मोड़ पर मिला एक नया फ़रेब का सफर।
शायरी 13: चेहरे पर नकाब
चेहरे पर उनके था एक प्यारा सा नकाब,
और हर लफ्ज़ में छुपा था गहरा फ़रेब।
शायरी 14: रूह की पुकार
मेरी रूह की पुकार भी तुमने ना सुनी,
तुम तो मशगूल थे अपने फ़रेब बुनाई में।
शायari 15: रिश्तों की डोर
रिश्तों की डोर को समझा था मैंने मजबूत,
पर वो तो निकली फ़रेब की एक नाजुक डोर।
शायरी 16: हर जगह धोखा
जिधर देखो उधर ही मिलता है धोखा,
इस दुनिया में हर कदम पर है फ़रेब का मौका।
शायरी 17: ज़ाहिर और बातिन
जो ज़ाहिर था, वो हकीकत नहीं थी,
जो बातिन था, वो फ़रेब की तस्वीर थी।
शायरी 18: दिल टूटा
दिल मेरा टूट गया, जब ये इल्म हुआ,
कि तेरा प्यार भी बस एक फ़रेब हुआ।
शायरी 19: वफ़ा का सौदा
वफ़ा का सौदा करने चले थे हम,
पर वो निकला फ़रेब का एक झूठा कसम।
शायरी 20: ज़िंदगी की किताब
ज़िंदगी की किताब के हर पन्ने पर,
लिखा है बस फ़रेब का एक नया असर।
शायरी 21: ख्वाबों की हकीकत
जिन ख्वाबों को हमने सजाया था रात भर,
सुबह होते ही वो निकले फ़रेब का मंजर।
शायरी 22: मीठे बोल
उनके मीठे बोलों में कुछ ऐसा जादू था,
जिसने दिल को किया फ़रेब का गुलाम।
शायरी 23: रिश्तों का रंग
रिश्तों का रंग फीका पड़ा पल भर में,
जब देखा उसके पीछे फ़रेब था हर कण में।
शायरी 24: मंज़िल की चाह
मंज़िल की चाह में निकले थे हम घर से,
हर रास्ते में मिला फ़रेब का डर से।