Taareek (तारीक)
तारीक (Taareek) पर शानदार शायरी
ज़िन्दगी की राहों में, जब छा जाए तारीक रात,
कौन जलाए उम्मीद का दिया, दे कौन सहारा साथ।
कौन जलाए उम्मीद का दिया, दे कौन सहारा साथ।
मेरी आँखों में अक्स है, गुज़री हुई हर तारीक का,
दर्दों की कहानी है, मेरी हर इक आह का।
दर्दों की कहानी है, मेरी हर इक आह का।
कुछ ऐसे लम्हे होते हैं, जो बन जाते हैं तारीक,
मिटाना चाहो भी तो, रहते हैं दिल के करीब।
मिटाना चाहो भी तो, रहते हैं दिल के करीब।
शामें तारीक सही, पर सहर तो आएगी,
गम न कर ऐ दिल, रोशनी लौट आएगी।
गम न कर ऐ दिल, रोशनी लौट आएगी।
लिख दी है किस्मत ने मेरी, हर एक पल को तारीक,
खुशियों की तलाश में भटकता है यह फकीर।
खुशियों की तलाश में भटकता है यह फकीर।
जब भी पलटकर देखता हूँ, अपनी तारीक को,
मिलते हैं कुछ घाव गहरे, कुछ भूले हुए रिश्तों को।
मिलते हैं कुछ घाव गहरे, कुछ भूले हुए रिश्तों को।
यह रात कितनी तारीक है, सितारों से भी पूछो,
उन्हें भी नहीं दिखती राह, जो मैंने खोजी तुम बिन।
उन्हें भी नहीं दिखती राह, जो मैंने खोजी तुम बिन।
इश्क़ की हर गली, हर मोड़ अब तारीक है,
तेरी जुदाई का गम, दिल को बहुत बारीक है।
तेरी जुदाई का गम, दिल को बहुत बारीक है।
क्या पता था कि दिन ढलते ही, सब हो जाएगा तारीक,
रोशनी की आस में, जलाए बैठे हैं हम दीप।
रोशनी की आस में, जलाए बैठे हैं हम दीप।
दिल के आँगन में, यादों की घटा तारीक है,
शाम-ओ-सहर बस तेरी ही, चाहत की परीक है।
शाम-ओ-सहर बस तेरी ही, चाहत की परीक है।
खामोशियाँ चीखती हैं, जब रात होती है तारीक,
हर आहट पे लगता है, कोई है मेरा शरीक।
हर आहट पे लगता है, कोई है मेरा शरीक।
मेरे शहर की गलियाँ, आज भी हैं तारीक,
जैसे मेरे दिल का कोना, तेरे बिना है बारीक।
जैसे मेरे दिल का कोना, तेरे बिना है बारीक।
वक्त की गर्दिश में खो गई, वो हर हसीन तारीक,
जो तेरी यादों में बसी थी, बनके मेरी शफीक।
जो तेरी यादों में बसी थी, बनके मेरी शफीक।