Dhund (धुंध)
धुंध (Dhund) पर बेमिसाल शायरी धुंध की चादर आज फिर शहर में छाई है धुंध गहरी, तेरी यादों ने भी कर दी है कुछ ऐसी पहरी। नज़रों की धुंध आँखों में छाई है कैसी ये धुंध , जो नज़र आए तुम, तो मिट जाए हर बंद। राहों की धुंध रास्ते गुम हुए, हर सू है धुंध का साया, मन में फिर क्यों तेरी यादों का बसेरा आया। दिल की धुंध ये दिल में कैसी धुंध है, जो छाई हुई है, ख़ामोशी की चादर में कुछ आवाज़ दबी हुई है। सुबह की धुंध सु...