Jameel (जमील)
ज़िंदगी के रंग और जमील लम्हे
तेरी आँखों का नूर, तेरी बातों का वो असर,
हर अदा है तेरी जमील, मुझ पर हुआ है यूँ असर।
वो सुबह की किरणें, वो शबनमी रात,
हर मंज़र लगता है जमील, जब हो तेरा साथ।
खुदा ने तराशा है तुझको बड़ी फुरसत से,
हर एक नक्श है तेरा जमील, क्या कहें तेरी खूबसूरती से।
दिल की गहराइयों में, बसा है तेरा नाम,
तेरा हर रूप है जमील, सुबह-ओ-शाम।
बागों में फूलों सी महक है तेरी,
अदा तेरी सबसे जमील, हर नज़र में तेरी।
चाँद भी शर्मा जाए, सूरज भी थम जाए,
जब तू सामने आए, हर शय लगे जमील।
तेरी मुस्कान में छिपी है, दुनिया की हर खुशी,
तेरा हर अंदाज़ है जमील, करती है तू हर दिलकशी।
नज़र उठा के देखा तो, दुनिया बदल गई,
तेरी सूरत जो देखी, हर चीज़ जमील हो गई।
हर धड़कन में शामिल है, तेरा ही नाम,
तेरी खूबसूरती है जमील, हर पल, हर दाम।
सागर की लहरों सा है, तेरा अंदाज़,
हर पल, हर लम्हा जमील, मेरा ये राज़।
खुशियों का पैगाम है, तेरी हर बात,
तू है ऐसी जमील, क्या कहें तेरी सौगात।
हर ख्वाब में तू आती है, हकीकत बन के,
तेरा वजूद है जमील, दिल में मेरे रूह बन के।
जिंदगी की राहों में, तेरी रोशनी है,
हर कदम पर तू है जमील, मेरी हर खुशी है।
फिज़ाओं में घुली है, तेरी ही खुशबू,
तू है इतनी जमील, क्या कहें तेरी आरज़ू।
तेरी नज़रों का जादू, दिल पे चल गया,
तेरा हर रूप है जमील, हर पल बदल गया।
हर शायरी में तेरी, दास्तान लिखते हैं,
तू इतनी है जमील, हर लफ्ज़ में दिखते हैं।
तेरा साथ पा कर, दुनिया मिल गई,
तेरी हर बात है जमील, जिंदगी खिल गई।
जैसे सुबह की पहली किरण हो तुम,
इतनी जमील हो कि दिल को भा जाए हर दम तुम।
तेरी हँसी में छुपी है, बहारों की रौनक,
तेरा चेहरा है जमील, बिखेरता है हर दम चमक।
खुदा की बनाई हुई सबसे हसीन चीज़ हो तुम,
तेरा हर अंदाज़ है जमील, दिल के करीब हो तुम।
रात के तारों में, तेरी छवि दिखती है,
तेरी जमील सी सूरत, हर पल दिल में बसती है।
तेरी बातों का मीठा रस, कानों में घुलता है,
हर अंदाज़ है तेरा जमील, दिल हरदम झूलता है।
हर फूल में जैसे खुशबू छिपी हो,
तू वैसी ही जमील, दिल में बसी हो।
तेरी सादगी में भी, एक खास बात है,
तेरा हर पहलू है जमील, हर पल तेरा साथ है।
अम्बर में जैसे तारे चमकते हैं,
तू भी वैसे ही जमील, हर दिल में महकती है।
तेरी यादों के सहारे, दिन कटते हैं मेरे,
तेरा नाम ही है जमील, हर पल में मेरे।
जब भी कलम उठाता हूँ, तेरा ज़िक्र होता है,
तेरी जमील सी सूरत, हर लफ्ज़ में पिरोता है।
तेरी हसरत लिए फिरते हैं, हम दर-ब-दर,
तेरी जमील चाहत, हर पल है मुसलसल।
हर महफ़िल में तेरी चर्चा, हर ज़बान पर तेरा नाम,
तेरी जमील शख्सियत, करती है हर दिल गुलाम।
तेरी खामोशी में भी, एक गहराई है,
तेरी जमील रूहानी, हर दिल को भाई है।
तेरा वजूद है इबादत, तेरा नाम है ज़िक्र,
तेरा हर रूप है जमील, ना कोई शक, ना कोई फिक्र।
तेरी आंखों का समंदर, जिसमें हम खो गए,
तेरी जमील खूबसूरती के, हमेशा के हो गए।
तेरी धुन में मगन, ये दिल मेरा रहता है,
तेरा ही नाम जमील, हर पल ये कहता है।
तेरे आने से ज़िंदगी में, खुशियाँ बिखर गईं,
तेरी जमील मौजूदगी से, सारी कमी पूरी हो गईं।
हर पल, हर लम्हा, तेरी याद आती है,
तेरी जमील सूरत, दिल को बह
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