Ghungroo (घुँघरू)
घुँघरू की मदहोश धुनें: शायरी संग्रह
शायरी 1
तेरी चाल में वो जादू, कि हर कदम पर,
बज उठते हैं मेरे दिल के सारे घुँघरू।
शायरी 2
खामोशी में भी एक शोर है तेरा, जानां,
जब भी बजते हैं तेरे पैरों के घुँघरू।
शायरी 3
नाचती हैं अदाएं तेरी, जब भी तुम चलती हो,
और हर ताल पर बजते हैं घुँघरू तेरे।
शायरी 4
तेरी आहट से ही महक उठती है फिज़ा,
और गूंजते हैं हवाओं में तेरे घुँघरू।
शायरी 5
रात की तन्हाई में तेरी याद जब आती है,
कानों में बजते हैं बस तेरे घुँघरू।
शायरी 6
क्या खबर थी हमें, कि धड़कनों में बस जाओगे तुम,
और दिल में बजने लगेंगे तेरे घुँघरू।
शायरी 7
हर कदम पर नई कहानी है तेरी चाल में,
जैसे कोई गीत सुनाते हों तेरे घुँघरू।
शायरी 8
तेरा आना भी किसी उत्सव से कम नहीं,
क्योंकि संग बजते हैं तेरी खुशी के घुँघरू।
शायरी 9
मेरी दुनिया में जब तुम आई हो सजन,
हर ओर बजने लगे हैं मधुर घुँघरू।
शायरी 10
हर धुन में तेरी याद, हर ताल में तेरा प्यार,
ऐसे बजते हैं मेरी साँसों के घुँघरू।
शायरी 11
तेरी चाल की वो खनक, तेरी हर अदा की रौनक,
मेरे दिल में बजाती है प्यार के घुँघरू।
शायरी 12
जब भी उठती है हवा, तेरा पैगाम लाती है,
और संग में सुनाई देते हैं तेरे घुँघरू।
शायरी 13
तेरी पायल की खनक में एक अनकहा सा राज है,
जो हर पल मेरे दिल में बजाते हैं घुँघरू।
शायरी 14
नज़रों से दूर हो, पर दिल में बसी हो तुम,
तेरी यादों के बजते रहते हैं घुँघरू।
शायरी 15
वो बेताबियाँ, वो बेचैनियाँ, सब तेरे नाम हैं,
जब भी सुनता हूँ तेरे घुँघरू की आवाज।
शायरी 16
जिंदगी एक नृत्य है, और तुम उसकी धुन,
तेरे हर कदम पर बजते हैं मेरे घुँघरू।
शायरी 17
तेरे प्यार की गूँज में खोया रहता हूँ मैं,
हर पल बजते हैं तेरे मीठे घुँघरू।
शायरी 18
इस दिल की हर आरज़ू है बस यही,
तेरी पायल के घुँघरू बजते रहें सदा।
शायरी 19
तेरा इंतजार करती हैं मेरी आँखें हर पल,
सुनने को तेरे आने के घुँघरू।
शायरी 20
मोहब्बत की ये कैसी धुन है, ए दिल,
हर साँस में बजते हैं अब घुँघरू।
शायari 21
तेरी यादों के साए में कटती है रात मेरी,
जब ख्वाबों में बजते हैं तेरे घुँघरू।
शायरी 22
इश्क की राहों में चलता रहा मैं,
और तेरे हर कदम पर बजते रहे घुँघरू।
शायरी 23
कभी हँसते हैं, कभी रोते हैं ये दिल के तार,
जैसे धुन में बजते हों तेरे घुँघरू।
शायरी 24
तेरी सादगी में भी एक कमाल है, प्रिये,
जो हर पल मेरे लिए बजाती है घुँघरू।
शायरी 25
ये दिल क्या जाने ठहराव का मतलब,
जब भी तुम चलती हो, बजते हैं घुँघरू।
शायरी 26
तेरी धुन में खोकर, मैं अपना आप भूल गया,
जब से सुने हैं मैंने तेरे घुँघरू।