Adaa (अदा)
तेरी हर अदा पर फ़िदा तेरी हर अदा पे मरते हैं हम, क्या करें इस दिल का, जो तुझपे फिदा है। नज़र उठाई तो जादू, झुकाई तो कहर, क्या कहें तेरी इस अदा को, जिसकी कोई हद नहीं। तेरी वो मदहोश कर देने वाली अदा , हर आशिक को दीवाना बना जाती है। हजारों खामियां सही मुझमें, पर तेरी एक अदा पे सब माफ कर दिए। तेरी सादगी में भी एक अलग अदा है, जो हर रंगीनियत पर भारी पड़ती है। जब भी देखा तेरी आँखों में, एक नई अदा दिखी, क्या खूब है ये हुस्न तेरा, जो हर पल बदलता है। शिकायत भी करते हैं, प्यार भी लुटाते हैं, तेरी हर अदा को हम बस चाहते हैं। वो हंसने की अदा , वो चलने का अंदाज़, हर बात में है तेरे कुछ तो खास। क्या खूब तेरी अदा है, जो दिल को छू जाती है, तू दूर रहे या पास, हर पल याद आती है। तेरी मासूमियत भी एक अदा है, जो इस कदर भाती है, कि दिल को बस तेरी ही चाहत सताती है।