Ulfat (उल्फ़त)
उल्फ़त के रंग यह सिलसिला उल्फ़त (उल्फ़त) का चलता ही रह गया, दिल की चाह में दिलबर मचलता ही रह गया। खुदा करे, मेरी उल्फ़त (उल्फ़त) में तुम कुछ यूँ उलझ जाओ, मैं तुमको दिल में भी सोचूँ तो तुम समझ जाओ। होंठों पे उल्फ़त (उल्फ़त) का नाम होता है, आँखों में छलकता जाम होता है। राज़-ए- उल्फ़त (उल्फ़त) , सीने में हम, लिए फिरते हैं, वो बयाँ अगर कर दें तो ज़िन्दगी ही संवर जाए। इश्क़ में हर कदम है इक मंज़िल, राह-ए- उल्फ़त (उल्फ़त) की मुश्किलात न पूछ। तुमसे उल्फ़त (उल्फ़त) के ये तकाज़े न निभाए जाते, वरना तमन्ना हमें भी खूब थी कि चाहे जाते। दिल में कुछ टूटने लगता है तिरे ज़िक्र के साथ, चंद आँसू तिरी उल्फ़त (उल्फ़त) के बहाने निकले। है ये उल्फ़त (उल्फ़त) भी क्या बला साहब, इस में झुकते नवाब देखे हैं। जगा दिया सुबह तेरी याद-ए- उल्फ़त (उल्फ़त) ने वरना, आज इतवार था बहुत देर तक सोते हम। कम निगाही की हमें खुद भी कहाँ थी तौफीक, कम निगाही के लिए उस ना उल्फ़त (उल्फ़त) चाहे जाते। ...