Sitam (सितम)
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सितम (Sitam) पर दिल छू लेने वाली शायरी
मेरे दिल पर ये कैसा सितम ढा दिया तुमने,
हंसते हुए लबों पर आँसू सजा दिया तुमने।
हर रात आँखों में यादों का सितम होता है,
तुम्हारा शहर अब मेरे लिए मातम होता है।
खुदा करे तुझपे कभी वो सितम न आए,
जो दिल सह रहा है और ज़ुबां पर न आए।
तेरे प्यार में ये कैसा सितम हुआ है,
हम तो डूबे थे, अब किनारा गुम हुआ है।
ज़िंदगी भर सहते रहे हम उनका हर सितम,
और वो कहते रहे, "तुमने प्यार ही कब किया हम से?"
ये बेवफ़ाई का सितम हम पे भारी पड़ा,
जीने की चाहत ने मरने का इरादा करा।
इश्क़ में मिली हर सज़ा को सितम न कहो,
कभी-कभी ये इश्क़ खुद भी एक इल्ज़ाम होता है।
आँखों में नमी और लबों पर मुस्कान है,
ये भी तो इश्क़ का एक हसीन सितम है।
दिल का दर्द कोई समझेगा कैसे,
जब हर साँस पर सितम हो रहा है ऐसे।
हम सह गए सब, तुम्हारा हर सितम,
सोचा शायद लौट आएँगे तुम्हारे कदम।
मुहब्बत के नाम पर ये कैसा सितम है,
जिंदा रहकर भी जीने से कम है।
हर रात ये तन्हाई और तेरा सितम,
क्या यही है प्यार का अंजाम सनम?
इतना सितम न कर कि दिल टूट जाए,
बिखर जाएँ अरमान और प्यार छूट जाए।
तेरी यादों का सितम हर पल जारी है,
लगता है जैसे मौत से भी बुरी बीमारी है।
ज़ालिम दुनिया का हर सितम उठा लिया,
बस तेरे प्यार का गम संभाला न गया।
हम तो तन्हा थे, उनका सितम और भी बढ़ा गया,
जिसने भी देखा हमें, वो मुस्कुराता चला गया।
दिल की हर धड़कन पर अब सितम है तेरा,
कैसे जियूँ मैं, जब हर साँस पर है पहरा।
क्या खूब किया तुमने ये सितम मेरे साथ,
मुस्कुराकर तोड़ दिया मेरा हर जज़्बात।
तेरी बेरुखी का सितम भी मंजूर था हमें,
कम से कम याद तो किया करते थे हमें।
ये दिल भी कितना मजबूर है मेरा,
सहता है तेरा हर सितम और कहता है 'तेरा'।
तेरे जाने के बाद हर लम्हा सितम है,
साँसें चलती हैं पर जीने में क्या दम है।
मोहब्बत में अक्सर लोग सितम करते हैं,
और हम बेखबर, उनका इंतजार करते हैं।
इश्क़ की राहों में मिलते हैं कई सितम,
पर हम तो दीवाने हैं, कहाँ डरते हैं हम।
ये बेवफ़ाई नहीं, तेरा सितम है,
जो हर साँस से पहले याद आता है।
गम-ए-जुदाई से बढ़कर कोई सितम नहीं,
हमने सब खो दिया, बस तू ही मिला नहीं।
हज़ार सितम ढाओ, हम फिर भी मुस्कुराएँगे,
हम वो हैं जो ज़हर पीकर भी गीत गाएँगे।
तूने तोड़ा दिल, ये भी क्या कम सितम था?
उस पर हमें तन्हा छोड़ दिया, ये बड़ा गम था।
कभी सोचा न था कि ऐसा भी सितम होगा,
खुशियाँ मिलेंगी नहीं और गम हरदम होगा।
क्या शिकायत करें हम किसी से, जब हर सितम,
अपनी किस्मत ने ही लिखा हो, हम पर ये करम।
तुम्हारे दिए हुए हर सितम को सह लेंगे,
बस एक बार कह दो कि तुम मेरे हो।
दुनिया के सारे सितम एक तरफ,
तेरी खामोशी का गम एक तरफ।
ये कैसा सितम है कि दिल भी नहीं रोता,
आँखों में पानी है पर आंसू नहीं होता।
हर रात चाँद से कहते हैं हम ये बात,
क्या तू भी सहता है कभी ऐसा सितम?
ज़िंदगी में अब सिर्फ तेरा ही सितम है,
खुशियाँ दूर, दर्द का हर पल हमदम है।