Hijr (हिज्र)

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हिज्र (Hijr): दर्द-ए-जुदाई की शायरी

दर्द-ए-हिज्र की दास्तान

तुम्हारे हिज्र की हर शाम उदास लगती है,
जैसे कोई कहानी अधूरी छोड़ दी हो।

शायरी #2: लम्हा-ए-जुदाई

ये कैसा हिज्र है, जो रूह तक समा गया,
हर सांस में तेरा इंतज़ार बन गया।

शायरी #3: आँखों का पानी

हिज्र में आँखों से बहता पानी,
लिख रहा है दर्द की कहानी।

शायरी #4: तन्हा रातें

रात भर जागना, सुबह का इंतज़ार,
ये हिज्र ने दिया है कैसा बहार।

शायरी #5: दिल का आलम

दिल का आलम है कुछ ऐसा मेरे दोस्त,
हर पल हिज्र में रहता है गुमसुम।

शायरी #6: यादों का साया

तेरी यादों का साया है हर तरफ,
इस हिज्र में भी तू पास लगता है।

शायरी #7: खामोशी की ज़ुबान

लबों पर खामोशी, दिल में शोर है,
हिज्र ने मेरी दुनिया बदल दी है।

शायरी #8: हर तरफ उदासी

चारों तरफ हिज्र की चादर फैली है,
किससे कहें दिल की ये बात पुरानी है।

शायरी #9: बेताब दिल

यह दिल बेताब है तेरे दीदार को,
कब खत्म होगा ये हिज्र का सफर।

शायरी #10: वफा का इम्तिहान

हिज्र का इम्तिहान कुछ यूं चला,
वफा की राहों पर दिल जलता रहा।

शायरी #11: अधूरे सपने

नींदों में भी अब सताता है हिज्र तेरा,
ख्वाब भी अधूरे, रातें भी अकेली।

शायरी #12: रूह का दर्द

ये जिस्म तो है पर रूह कहीं और है,
इस हिज्र ने सब कुछ छीन लिया।

शायरी #13: इंतजार की घड़ियां

घड़ियां गुजरती हैं, पर तू नहीं आता,
ये हिज्र मुझे और कितना तड़पाएगा।

शायरी #14: हर सांस में याद

हर सांस में है तेरी याद का आलम,
इस हिज्र ने मुझको बेकरार किया।

शायरी #15: मौसम-ए-ग़म

मौसम-ए-ग़म है और हिज्र की बरसात,
क्या बताऊँ, कैसी कटी मेरी रात।

शायari #16: दिल में शोर

बाहर से शांत, अंदर से तूफान है,
ये हिज्र मेरे दिल का अरमान है।

शायरी #17: तड़प का आलम

हिज्र की तड़प अब सहा नहीं जाती,
एक पल भी अब रहा नहीं जाती।

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