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Pachtava (पछતાવા)

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पछतावा (Pachtava): दिल से निकली हर आवाज़

कुछ फैसले गलत थे, कुछ राहें थीं अंजाने,
अब उम्र भर दिल में रहा, बस पछतावा पुराने।

वो वक्त जो हाथ से फिसला, वो बातें जो कही नहीं,
हर शाम दिल में उठता है, एक गहरा पछतावा कहीं।

तेरी हर बात को हमने अनसुना कर दिया था,
अब तेरे जाने पर, बस पछतावा ही रह गया था।

क्यों ना सुनी दिल की आवाज़, क्यों दिमाग की मानी हर बात,
आज तन्हाई में घेरे है, एक कड़वा पछतावा दिन-रात।

वो लम्हे जो यूँ ही खो गए, वो रिश्ते जो टूट गए,
बस उन्हीं की याद में है, ये दिल पछतावा में डूबे।

काश! कह देते वो बातें जो दिल में दबी थीं,
आज ना होता इतना गहरा पछतावा, ना ये आंखें नम थीं।

हर गलती का दामन थामे, चलता रहा मैं बेवजह,
आज हर मोड़ पर मिलता है, बस पछतावा, हर सुबह।

क्या खूब सजा दी हमने खुद को, अपने ही हाथों से,
अब आंसू भी कम पड़ते हैं, इस पछतावा की रातों में।

छोड़ दी वो दोस्ती, वो प्यार, जो सच्चा था कभी,
आज उसी के गम में डूबे हैं, और पछतावा है अभी।

जो वक्त मिला था संभलने का, वो गंवा दिया हमने,
आज हर पल महसूस होता है, ये पछतावा के गम ने।

हर एक बात पे ऐतबार किया था गैरों का,
अपनों को ठुकरा कर पाया, बस पछतावा का अंधेरा।

बड़ी उम्मीदों से चले थे, इस राह पर अकेले,
पर अंत में मिला सिर्फ, गहरा पछतावा झेलते।

वो बीता कल जो लौटा नहीं, वो यादें जो मिटती नहीं,
बस इन्हीं की धूप-छाँव में है, पछतावा की ज़मीन।

हर आह में, हर दर्द में, बस यही एहसास है,
कि कर ना सके वो जो करना था, बस पछतावा ही पास है।

क्यों ना सोचा एक बार, अंजाम क्या होगा,
आज हर पल में है शामिल, ये पछतावा का रोना धोना।

अब कुछ बदल नहीं सकता, ये बात जानता हूँ मैं,
पर इस दिल से पछतावा को, कैसे निकालूँ मैं?

वो वादे जो तोड़े हमने, वो रिश्ते जो बिखेरे,
आज हर सुबह है, बस पछतावा के घेरे।

क्यों ना जी लिया उस पल को, जब सब कुछ मुमकिन था,
अब हर पल है एक बोझ, ये पछतावा का किन था।

खामोशियाँ बोलती हैं, वो बातें जो छुपी थीं,
आज दिल में है बस, गहरा पछतावा की नदियाँ।

हर शिकन, हर उदासी, एक कहानी सुनाती है,
कैसे गलतियों का बोझ, दिल पे पछतावा लाती है।

क्या हासिल किया आखिर, खोकर तेरा साथ,
अब तन्हाई में है बस, पछतावा की हर बात।

वो मासूम सी आँखें, जो रुला दी हमने,
आज हर पल याद आती हैं, और पछतावा हमने सहे।

ज़िन्दगी एक मौका था, जिसे गँवा बैठे हम,
अब क्या करें सिवाए, इस पछतावा के गम।

हर फैसले की कीमत, चुकानी पड़ रही है अब,
दिल को घेरे है हर तरफ से, ये पछतावा का सबब।

काश थाम लिया होता, वो हाथ जाते हुए,
आज ना होता ये दिल, पछतावा में रोते हुए।

जो बातें अनकही रह गईं, वो सिसकियाँ बन गईं,
हर आह में शामिल है अब, पछतावा की कहानियाँ।

वो मौका जो मिला था, फिर कभी ना मिलेगा,
बस इसी बात का है, ये गहरा पछतावा दिल को जलेगा।

गलत लोगों पे भरोसा, सही को ठुकरा देना,
आज बस रह गया है, पछतावा को जीना।

हर एक लम्हा जो यूँ ही गुज़रा, उसकी सज़ा है ये,
कि आज दिल में है बस, गहरा पछतावा ही ये।

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