Muhib (मुहिब)
मुहिब: दिल की गहराइयों से जब से देखा है मैंने अपनी आँखों में तुम्हें, मेरे हर ख्वाब की ताबीर हो तुम, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तुमसे ही रौशन है मेरी ये दुनिया सारी, रूह में बसे हो ऐसे, मेरे सच्चे मुहिब (मुहिब) हो तुम। हर घड़ी, हर पल, बस तुम्हें सोचता हूँ, मेरी इबादत, मेरी चाहत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी मोहब्बत में खोकर मिली है मुझे राहत, मेरी हर आरज़ू, मेरी हर ज़रूरत, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। ज़िन्दगी की हर मुश्किल आसान हो गई, जब से तू मिला है, मेरे प्यारे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी अदाओं पर, तेरी बातों पर मैं फ़िदा, मेरी हर साँस में, मेरे दिल में, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। शाम-ओ-सहर तेरी यादों में गुम रहता हूँ, मेरी हर दुआ में शामिल, मेरे मुहिब (मुहिब) हो तुम। तेरी हंसी से खिलती है मेरी हर कली, मेरे बाग़-ए-हयात के गुल, मेरे मुहिब (मु...