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Monday, June 15, 2026

Hayaa (हया)

हया की रंगीन दुनिया: शायरी का अनमोल खज़ाना

नज़र में हया, दिल में पाकीज़गी

लबों पे है मुस्कान और आँखों में गहरा पानी है,
तेरी **हया** ही तो मेरी मोहब्बत की निशानी है।

चेहरे पे आती है तेरे जब भी थोड़ी सी लाली,
समझ लेता हूँ कि तुमने ओढ़ी है **हया** की चादर काली।

इश्क़ में भी रहे एक अदब, एक पर्दा सा,
यही तो सिखाती है हमें ये पाकीज़ा **हया**।

नज़रें झुका के चलना भी एक अदा है तेरी,
रूह को छू जाती है तेरी ये प्यारी सी **हया** मेरी।

दामन को अपनी **हया** से यूँ सँवारो तुम,
के देखने वाला भी कहे, क्या नायाब हो तुम।

जब कोई देखे तुम्हें, तो तुम शर्म से झुक जाओ,
यही तो असली हुस्न है, यही है तुम्हारी **हया**।

इश्क़ की राह में भी एक पर्दा ज़रूरी है,
दिल को पाक रखती है ये हुस्न-ए-**हया**।

खूबसूरती तो हर कोई देख लेता है,
मगर **हया** को हर आँख नहीं पहचानती है।

जिस दिल में **हया** हो, वो कभी नहीं भटकता,
नेकी की राहों पर चलता है, कभी नहीं अटकता।

तुम्हारा चेहरा जब भी देखता हूँ मैं,
**हया** के नूर से रोशन पाता हूँ मैं।

वो ज़माना अब कहाँ, जब आँखों में **हया** थी,
अब तो हर जगह बस बेपरवाही की हवा थी।

अगर **हया** ना हो तो हुस्न भी फीका लगे,
रूह की पाकीज़गी से ही तो हर रिश्ता जगे।

अपनी **हया** का दामन ना छोड़ना कभी,
यही तो है वो दौलत जो मिटती नहीं कभी।

हर बात पे शर्मा जाना, हर अदा में **हया**,
कुछ इस तरह से तुमने हमको दीवाना किया।

वो नज़रों की गुस्ताखी, और फिर आँखों में **हया**,
कुछ ऐसा ही तो होता है तेरा हर इक अदा।

कभी लबों पे हंसी, कभी आँखों में **हया**,
यही तो है अंदाज़-ए-मोहब्बत-ए-दिलरुबा।

हुस्न की क्या ज़रूरत, जब **हया** खुद कमाल हो,
हर एक नज़र में फिर एक नया सवाल हो।

वो चुप रहना तेरा, और बातों में **हया**,
सारा जहाँ हार जाए, ऐसी है तेरी अदा।

दिल की गहराइयों में **हया** को बसा लो तुम,
सच्ची मोहब्बत का दामन ना छोड़ना तुम।

एक नूर सा बिखर जाए, जब चेहरा खिलता है,
**हया** के पर्दे में ही तो सच्चा हुस्न मिलता है।

**हया** तेरी मेरे दिल में घर कर गई है,
हर सुबह अब तेरी यादों से भर गई है।

लबों पे ख़ामोशी, आँखों में थोड़ी सी **हया**,
तेरा अंदाज़-ए-बयाँ ही तो है सबसे जुदा।

तेरी **हया** की महक, फिज़ाओं में घुल जाए,
देखने वाला भी बस तुझमें ही खो जाए।

वो ज़ुल्फ़ों का हट जाना, फिर नज़र में **हया**,
हर अदा में तेरी, बस दिखता है खुदा।

**हया** है गर तुम्हारी, तो दिल भी पाक होगा,
ये इश्क़ भी तब ही तो सच्चा और बेबाक होगा।

जब तुम पास आती हो, तो दिल धड़क जाता है,
तेरी आँखों की **हया**, मुझे बेहद भाता है।

तेरी **हया** में जो जादू है, वो कहीं और नहीं,
यही तो है वो नगीना, जो मिलता हर मोड़ नहीं।

**हया** है गहना तेरा, **हया** है तेरी ज़ीनत,
इसकी हिफाज़त करना, यही तो है तेरी दौलत।

तेरी सादगी में भी एक अलग सी कशिश है,
तेरी आँखों की **हया** में एक गहरी रंजिश है।

नज़रें उठाना, फिर पलकों को झुका लेना,
ऐसी अदा है तेरी, कि दिल दे बैठे जमाना।

प्यार की हद से भी आगे निकल जाती है **हया**,
जब दिल से दिल मिलते हैं, तो बन जाती है दुआ।