Reza (रेज़ा)
रेज़ा रेज़ा इश्क़: बिखरते एहसासों का सफर तेरी यादों के टुकड़े आज भी बिखरे हैं, दिल के हर रेज़ा में, तुम ही तो ठहरे हैं। मोहब्बत काँच सी थी, टूटी जब ज़माने में, हर एक रेज़ा चुभता है, अब इस फ़साने में। खामोशी जब दिल में शोर मचाती है, तो हर रेज़ा जुदा होकर बिखर जाता है। ख्वाबों की दुनिया थी, पल भर में ढह गई, हर इक रेज़ा में सिर्फ़ तेरी कमी रह गई। टूटे हुए तारों से मांगी थी दुआ कभी, आज दिल का हर रेज़ा वही कहानी कहता है। जब बिखरे जज़्बात, तो संभाले नहीं संभले, हर एक रेज़ा ने एक नया ग़म उछाला है। ...