Veeran (वीरان)

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वीरान (Veeran) शायरी संग्रह

दर्द-ए-वीरानी

शहर की गलियों में भटकते हुए, हर मंज़र को देखा,
पर दिल के अंदर झाँका तो, एक वीरान सा खंडहर देखा।

घर का सूनापन

जब से तुम गए हो, यह घर सूना हो गया है,
हर कोना, हर चौखट, अब तो वीरान हो गया है।

आँखों का समंदर

मेरी आँखों में अश्कों का समंदर लहराता है,
जब भी देखता हूँ, दिल का शहर वीरान नज़र आता है।

महक भी उदास

फूलों की महक भी अब चुभने लगी है,
बाग़ तो हैं कई, पर रूह वीरान रहने लगी है।

अफ़सोस की बात

क्या खबर थी कि एक दिन ऐसा भी आएगा,
महफिलें सजेंगी, पर दिल वीरान रह जाएगा।

भीतर का खालीपन

ज़िंदगी की दौड़ में सब कुछ तो हासिल कर लिया,
बस अपने अंदर की दुनिया को वीरान छोड़ दिया।

टूटे ख्वाबों का मेला

टूटे हुए ख्वाबों का मेला लगा रहता है,
इस वीरान दिल में बस तेरा ही इंतज़ार रहता है।

चाँदनी रात में

चाँदनी रात में भी अब सुकून नहीं मिलता,
मेरा हर पल, हर लम्हा, अब वीरान सा गुज़रता है।

मन का आँगन

बस्ती में रौनक तो है, शोर भी बहुत है,
पर मेरे मन का आँगन तो आज भी वीरान ही बहुत है।

मोहब्बत की राहें

मोहब्बत की राहें अक्सर ऐसी ही होती हैं,
कुछ लोग चलते रहते हैं, कुछ जगहें वीरान छोड़ जाती हैं।

सूखे पत्तों सी

सूखे पत्तों सी हो गई है ज़िंदगी मेरी,
हर ख़ुशी दूर हुई, हर शाम वीरान सी तेरी।

उम्मीद नहीं पलती

उस दिल में अब कोई उम्मीद नहीं पलती,
जो तुम्हारे जाने के बाद वीरान हो गई थी।

हवाएँ भी उदास

हवाएँ भी अब उदासियाँ लाती हैं,
जब से ये गुलशन वीरान हुआ है, बस ख़ामोशियाँ छाती हैं।

यादों की चादर

यादों की चादर ओढ़े बैठा हूँ तन्हाई में,
तेरी जुदाई ने हर गली को वीरान कर दिया है।

अरमानों का शहर

मेरे अरमानों का शहर अब ढह चुका है,
हर इमारत वीरान, बस दर्द ही रह चुका है।

दामन वीरान

कभी सोचता था कि रंग भर दूँगा इस दुनिया में,
पर अफ़सोस, अपना ही दामन वीरान रह गया है।

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